देश की खबरें | ताजिया जुलूस मामला : मप्र उच्च न्यायालय ने पूर्व पार्षद के खिलाफ एनएसए का आदेश रद्द किया
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

इंदौर, 17 सितंबर मुहर्रम पर भारी भीड़ जुटाकर ताजिया जुलूस निकालने के मामले में पूर्व पार्षद को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत जेल में बंद किये जाने का जिला प्रशासन का आदेश मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने निरस्त कर दिया है।

अदालत ने कहा कि प्रशासन ने एनएसए लगाने के इस फैसले के लिये "मीडिया ट्रायल" के आधार पर अपनी राय बनायी।

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न्यायमूर्ति एससी शर्मा और न्यायमूर्ति शैलेन्द्र शुक्ला ने शहर के केंद्रीय जेल में बंद पूर्व पार्षद उस्मान पटेल (60) के बेटे तनवीर पटेल की दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका मंगलवार को मंजूर की। इसके साथ ही, 60 वर्षीय राजनेता के खिलाफ एनएसए लगाने से जुड़ा जिलाधिकारी मनीष सिंह का 17 दिन पुराना आदेश रद्द कर दिया।

युगल पीठ ने कहा कि केवल मुहर्रम के जुलूस में शामिल होने पर पटेल के खिलाफ एनएसए का आदेश जारी करने का निश्चित रूप से कोई आधार नहीं बनता।

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अदालत ने कहा, "जिलाधिकारी ने (पटेल पर एनएसए लगाने के फैसले के लिये) मीडिया ट्रायल के आधार पर अपनी राय बनायी। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन दिनों मीडिया ट्रायल बेहद आम हो गया है और अब अधिकारी भी उसके आधार पर अपना निर्णय कर रहे हैं।"

जिलाधिकारी ने पटेल के खिलाफ एनएसए के तहत 31 अगस्त को जारी आदेश में कहा था कि कोविड-19 के प्रकोप के मद्देनजर जिले में सार्वजनिक स्थलों पर सभी धार्मिक आयोजनों पर रोक है। लेकिन पटेल ने प्रतिबंधात्मक आदेश की कथित तौर पर धज्जियां उड़ाते हुए बड़े ताजिये का निर्माण कराया और 30 अगस्त को सड़क पर भारी भीड़ के साथ जुलूस निकालने के लिये लोगों को उकसाया।

जिलाधिकारी ने अपने आदेश में ताजिया जुलूस को लेकर स्थानीय समाचार पत्रों में छपी खबरों का भी उल्लेख किया था।

बहरहाल, पटेल की बृहस्पतिवार देर शाम तक केंद्रीय जेल से रिहाई नहीं हो सकी थी। उनके बेटे और याचिकाकर्ता तनवीर पटेल ने बताया, "जब मैंने उच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए अपने पिता की रिहाई का आदेश जारी करने के लिये जिला प्रशासन से संपर्क किया, तो मुझे बताया गया कि इस संबंध में कानूनी औपचारिकताओं के तहत प्रदेश के गृह विभाग के निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है।"

गौरतलब है कि शहर के वॉर्ड क्रमांक 38 के पूर्व पार्षद उस्मान पटेल ने सीएए को "संविधान विरोधी प्रावधान" बताते हुए भाजपा से अपना करीब 40 साल पुराना नाता फरवरी में तोड़ दिया था। इसके बाद उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ की मौजूदगी में सैकड़ों अन्य मुस्लिम नेता-कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस का दामन थाम लिया था।

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