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स्वच्छ भारत मिशन से प्रति परिवार सालाना 53,000 रुपये से अधिक का लाभ: अध्ययन

नरेन्द्र मोदी सरकार के महत्वकांक्षी कार्यक्रम स्वच्छ भारत मिशन से गांवों में न केवल स्वच्छता को बढ़ावा मिल रहा है बल्कि परिवार को स्वास्थ्य लाभ के रूप में अच्छी-खासी बचत करने में भी योगदान मिल रहा है. एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में यह कहा गया है.

स्वच्छ भारत मिशन से प्रति परिवार सालाना 53,000 रुपये से अधिक का लाभ: अध्ययन
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Twitter)

नयी दिल्ली: नरेन्द्र मोदी सरकार के महत्वकांक्षी कार्यक्रम स्वच्छ भारत मिशन से गांवों में न केवल स्वच्छता को बढ़ावा मिल रहा है बल्कि परिवार को स्वास्थ्य लाभ के रूप में अच्छी-खासी बचत करने में भी योगदान मिल रहा है. एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में यह कहा गया है. अध्ययन के अनुसार स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम से ग्रामीण भारत में प्रति परिवार 53,000 रुपये (727 अमेरिकी डॉलर) से अधिक का सालाना लाभ होने का अनुमान है. ग्रामीण परिवारों को यह लाभ मुख्य रूप से अतिसार (डायरिया) का प्रभाव कम होने और शौच के लिये घर से बाहर जाने में लगने वाले समय की बचत के रूप में हुआ है.

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स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण को लेकर किये गये अध्ययन में यह भी पाया गया कि परिवार पर किये गये खर्च पर 10 साल में रिटर्न इसकी लागत का 1.7 गुना होगा जबकि कुल खर्च पर समाज को 10 साल में रिटर्न इसकी लागत का 4.3 गुना होगा. अध्ययन में योजना के आर्थिक प्रभाव का पहली बार विश्लेषण किया गया है. यह वैश्विक सूचना विश्लेषण से जुड़े एलसेवियर की पत्रिका साइंस डायरेक्ट के अक्टूबर 2020 के अंक में प्रकाशित हुआ है. इसके अनुसार इस योजना से सबसे गरीब को को वित्तीय रूप से लागत का 2.6 गुना लाभ होगा जबकि समाज को इस पर आई लागत का 5.7 प्रतिशत तक फायदा मिलेगा.

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सर्वे में 12 राज्यों के 10,051 ग्रामीण परिवार को शामिल किया गया. इसमें बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश और असम शामिल हैं. कुछ साल पहले तक देश के खुले में शौच करने वाले लोगों में से 90 प्रतिशत इन्हीं राज्यों से थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन की शुरूआत दो अक्टूबर, 2014 को की. उन्होंने उस समय घोषणा की कि भारत अक्टूबर 2019 तक खुले में शौच से मुक्त हो जाएगा. मिशन की वेबसाइट के अनुसार शत प्रतिशत लक्ष्य दो अक्टूबर 2019 को हासिल कर लिया गया जबकि योजना शुरू किये जाने के समय यह 38.7 प्रतिशत था. योजना की शुरूआत से 10 करोड़ से अधिक घरों में शौचालय बनाये गये.

अध्ययन के अनुसार, ‘‘प्रति परिवार वित्तीय प्रतिबद्धता यानी निवेश औसतन 257 डॉलर (करीब 19,000 रुपये) है। जबकि सालाना परिचालन और रखरखाव खर्च 37 डॉलर (करीब 2,700 रुपये) है. वहीं चिकित्सा लागत के संदर्भ में 10 साल के लिये बचत 123 डॉलर सालाना (करीब 9,000 रुपये) है. इस हिसाब से वित्तीय रिटर्न 60 डॉलर (करीब 4,000 रुपये) सालाना बैठता है.

इसमें कहा गया है कि दो तिहाई से अधिक (69.5 प्रतिशत) परिवार को औसतन 183 डॉलर (13,000 रुपये से अधिक) की सब्सिडी मिली. इनमें से 63.8 प्रतिशत परिवारों ने सरकार की सब्सिडी के साथ अपना पैसा भी लगाया जो औसतन 154 डॉलर (11,000 रुपये से अधिक) लगाया.

अध्ययन के अनुसार, ‘‘सालाना 727 डॉलर प्रति परिवार लाभ मुख्य रूप से अतिसार के प्रभाव में कमी (55 प्रतिशत) और स्वच्छता को लेकर यानी शौच के लिये बाहर जाने में लगने वाले समय की बचत (45 प्रतिशत) के संदर्भ में है.’’ इसमें यह भी पाया गया कि घरों में स्वच्छता से संपत्ति का मूल्य भी 294 डॉलर (21,000 रुपये से अधिक) बढ़ा. अध्ययन के अनुसार स्वास्थ्य लाभ का कारण समय से पहले मृत्यु में कमी आने के रूप में है. मूल्य के हिसाब से इसका आकल 249 डॉलर (करीब 18,000 रुपये) आंका गया है. इसमें कहा गया है, ‘‘वित्तीय और गैर-वित्तीय निवेश प्रति परिवार औसतन 268 डॉलर (19,700 रुपये) जबकि सालाना परिचालन एवं रखरखाव खर्च 131 डॉलर (9,600 रुपये) है. जबकि आर्थिक लाभ 10 साल के लिये सालाना 727 डॉलर है....’’

इसके अनुसार लोगों के घरों से बाहर शौच के लिये जाने में लगने वाला समय उल्लेखनीय रूप से कम हुआ है. इससे एक परिवार के सभी सदस्यों को समय बचत के कारण मूल्य के संदर्भ में औसतन 325 डॉलर (24,000 रुपये) सालाना का लाभ हुआ है.

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(The above story first appeared on LatestLY on Oct 22, 2020 10:14 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).