Chandrashekhar Azad Martyrdom Day: चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि, कहा- अन्याय के खिलाफ अडिग संकल्प ही सच्चा पराक्रम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम ने कहा कि अन्याय के खिलाफ अडिग रहने का उनका संकल्प हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा.
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Chandrashekhar Azad Martyrdom Day: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने शुक्रवार, 27 फरवरी 2026 को महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद (Chandrashekhar Azad) के बलिदान दिवस (Martyrdom Day) पर उन्हें नमन किया. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया (Social Media) प्लेटफॉर्म X पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आजाद ने मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया. प्रधानमंत्री ने उनके साहस को याद करते हुए लिखा कि अन्याय के खिलाफ खड़े रहने का उनका दृढ़ संकल्प ही सच्ची वीरता है और उनका बलिदान हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा. यह भी पढ़ें: PM Modi on Instagram: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रचा इतिहास, इंस्टाग्राम पर 10 करोड़ फॉलोअर्स वाले दुनिया के पहले राजनेता बने
प्रधानमंत्री मोदी ने चंद्रशेखर आजाद को श्रद्धांजलि दी
भारत माता के वीर सपूत चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर उन्हें मेरी आदरपूर्ण श्रद्धांजलि। उन्होंने मां भारती को गुलामी की बेड़ियों से आजाद कराने के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया, जिसके लिए वे सदैव स्मरणीय रहेंगे।
— Narendra Modi (@narendramodi) February 27, 2026
अमर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद का जीवन बताता है कि अन्याय के खिलाफ अडिग रहने का संकल्प ही सच्चा पराक्रम है। मातृभूमि के लिए उनके बलिदान की गाथा देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करती रहेगी।
न हि शौर्यात्परं किञ्चित् त्रिषु लोकेषु विद्यते।
शूरः सर्वं पालयति सर्वं शूरे प्रतिष्ठितम् ।। pic.twitter.com/h6fZZfRWKa
— Narendra Modi (@narendramodi) February 27, 2026
'आजाद' नाम की ऐतिहासिक कहानी
चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के अलीराजपुर में चंद्रशेखर सीताराम तिवारी के रूप में हुआ था. क्रांतिकारी आंदोलन से उनका जुड़ाव महज 15 साल की उम्र में असहयोग आंदोलन (1920-21) के दौरान हुआ.
जब उन्हें गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया गया, तो उन्होंने बड़ी बेबाकी से अपना नाम 'आजाद', पिता का नाम 'स्वतंत्रता' और निवास स्थान 'जेल' बताया था. इसी घटना के बाद वे देश भर में 'आजाद' के नाम से प्रसिद्ध हो गए.
क्रांतिकारी सफर और HSRA का गठन
1922 में जब महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस लिया, तो आजाद का झुकाव सशस्त्र क्रांति की ओर बढ़ गया. वे 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) में शामिल हुए और 1925 के काकोरी ट्रेन एक्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
साल 1928 में दिल्ली के फिरोज शाह कोटला मैदान में एक ऐतिहासिक बैठक के दौरान संगठन का पुनर्गठन कर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) बनाया गया. हालांकि आजाद उस बैठक में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं थे, लेकिन उन्हें संगठन की सैन्य शाखा का कमांडर नियुक्त किया गया था. उन्होंने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों के साथ मिलकर लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए जॉन सॉन्डर्स की हत्या की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया. यह भी पढ़ें: PM Modi Israel Visit: दिव्यांग कलाकारों की प्रस्तुति ने जीता पीएम मोदी का दिल; 'आई लव माई इंडिया' बना भारत-इजरायल दोस्ती का नया प्रतीक
अल्फ्रेड पार्क: अंतिम सांस तक रहे 'आजाद'
27 फरवरी 1931 का दिन भारतीय इतिहास में अमर हो गया। प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) के अल्फ्रेड पार्क में एक मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया. आजाद ने अकेले ही वीरतापूर्वक पुलिस बल का मुकाबला किया.
जब उनके पास अंतिम गोली बची, तो उन्होंने अपनी उस प्रतिज्ञा को निभाया कि वे कभी जीवित गिरफ्तार नहीं होंगे. उन्होंने वह अंतिम गोली खुद को मार ली और अपनी शर्तों पर वीरगति को प्राप्त हुए. आज उस पार्क को 'चंद्रशेखर आजाद पार्क' के नाम से जाना जाता है, जो उनके अदम्य साहस का साक्षी है.
(The above story first appeared on LatestLY on Feb 27, 2026 10:04 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

