नयी दिल्ली, 27 अक्टूबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने उपयुक्त सुरक्षा प्रदान करने में केंद्र सरकार की विफलता को लेकर बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
स्वामी ने कहा है कि केंद्र ने पहले के आश्वासन के बावजूद उनके उस आवास पर कोई सुरक्षा मुहैया नहीं कराई, जिसमें वह सरकारी बंगले को छोड़ने के बाद रहेंगे।
जेड श्रेणी की सुरक्षा प्राप्त स्वामी ने इससे पहले सुरक्षा खतरों का हवाला देते हुए सरकारी बंगले के पुन: आवंटन के लिए अदालत का रुख किया था। राज्यसभा सदस्य के रूप में स्वामी का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त हो गया था।
स्वामी के वकील ने उनके मुवक्किल के निजी आवास पर पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने के मुद्दे का मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष उल्लेख किया। अदालत ने मामले की सुनवाई 31 अक्टूबर को करने की सहमति जता दी।
स्वामी का प्रतिनिधित्व करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता जयंत मेहता ने अदालत को बताया कि जब अदालत की एकल पीठ ने पूर्व सांसद को बंगला खाली करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया था, तो केंद्र ने आश्वासन दिया था कि उनके घर में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी।
मेहता ने कहा, ''आज तक कुछ (सुरक्षा इंतजाम) नहीं किया गया है। उनके सरकारी बंगले को खाली करने की आखिरी तारीख 26 अक्टूबर थी। उनकी जान जोखिम में है। उन्होंने अंडरटेकिंग के संदर्भ में निर्देश के लिए एक अर्जी दायर की है।’’
पीठ में न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद भी शामिल हैं।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY