देश की खबरें | राज्यों को आपदा मोचन कोष की 50 प्रतिशत तक की राशि कोविड-19 से निपटने में खर्च करने की अनुमति मिली
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 24 सितंबर केंद्र ने राज्यों को राज्य आपदा मोचन कोष (एसडीआरएफ) की 50 प्रतिशत तक की राशि कोविड-19 से निपटने में खर्च करने की अनुमति दे दी है।

महामारी से निपटने के लिए इस राशि का इस्तेमाल पृथक-वास केंद्रों, जांच प्रयोगशालाओं, ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्रों जैसी अवसंरचना को मजबूत करने तथा वेंटिलेटर और पीपीई किट खरीदने जैसे मद में किया जा सकता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 से सर्वाधिक प्रभावित सात राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बुधवार को कहा था कि उनकी सरकार ने महामारी से लड़ने के वास्ते एसडीआरएफ खर्च से संबंधित राज्यों की सीमा बढ़ा दी है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को एक संदेश में कहा कि इसने वित्त वर्ष 2020-2021 में विशेष स्थिति में एक बार के लिए एसडीआरएफ की 50 प्रतिशत तक की राशि कोविड-19 की रोकथाम के वास्ते खर्च के लिए सहायता संबंधी वस्तुओं और नियमों की सूची में आंशिक संशोधन किया है।

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राज्य पृथक-वास, नमूना एकत्र करने और परीक्षण प्रतिष्ठानों जैसे क्षेत्रों में एसडीआरएफ की 50 प्रतिशत तक की राशि खर्च कर सकते हैं।

महामारी से प्रभावित लोगों और पृथक-वास केंद्रों में रखे गए लोगों (गृह पृथक-वास से इतर) के अस्थायी व्यवस्थापन, आहार, कपड़े, चिकित्सा देखरेख इत्यादि तथा क्लस्टर निषिद्ध अभियान भी संशोधित नियमों के दायरे में होंगे।

नमूना एकत्र करने में इस्तेमाल की जाने वाली चीजें, निगरानी और संपर्कों का पता लगाने संबंधी कार्य तथा महत्वपूर्ण उपकरणों की खरीद और प्रयोगशालाएं, सरकार के दायरे में अतिरिक्त प्रयोगशालाएं स्थापित करने का खर्च तथा जांच किट भी नए नियमों के दायरे में होंगी।

इन नियमों के दायरे में चिकित्सा जगत से जुड़े लोगों, निकाय, पुलिस और अग्निशमन सेवा से जुड़े लोगों के लिए पीपीई किट की कीमत, थर्मल स्कैनर, वेंटिलेटर और प्यूरीफायर, अस्पतालों में ऑक्सीजन उत्पादन तथा भंडारण की कीमत भी होगी।

इसके अलावा मरीजों को लाने-ले जाने के लिए एंबुलेंस सेवा में सुधार, निषिद्ध क्षेत्रों, कोविड-19 अस्पतालों, कोविड केंद्रों की स्थापना और सरकारी अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली चीजों का खर्च में संशोधित नियमों के दायरे में आएगा।

गृह मंत्रालय की ओर से भेजे गए संदेश में कहा गया है कि संबंधित मुख्य सचिव के नेतृत्व में राज्य कार्यकारी समिति पूरे तंत्र पर निगरानी सुनिश्चित करेगी जिससे कि सरकार की अन्य योजनाओं के साथ इसका कोई दोहराव न हो।

संशोधित नियमों के दायरे में शामिल चीजों से परे कोविड-19 संबंधी कोई अन्य खर्च राज्य सरकार के संसाधन से होगा, न कि एसडीआरएफ से।

एसडीआरएफ का अधिकांश कोष राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष में जाता है।

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