जरुरी जानकारी | सिंगापुर के प्रधानमंत्री को भारत के आरसीईपी में शामिल होने पर फिर विचार करने की उम्मीद

सिंगापुर, सात दिसंबर सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली सिएन लूंग ने क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) में शामिल होने को लेकर भारत के फिर विचार करने की सोमवार को उम्मीद जतायी। उन्होंने भारत के इस समझौते से होने वाले लाभ को कसौटी पर कसने की आशा जतायी।

सिंगापुर 10 दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के समूह आसियान और भारत के बीच संबंध मजबूत करने को लेकर आशान्वित है। वह अगले साल से आसियान-भारत संबंध के संवाद का समन्वयक होगा।

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लूंग ने कहा,‘‘मेरा देश दोनों पक्षों के बीच रिश्ते और प्रगाढ़ करने के लिए आशान्वित है।’’

वह ‘इंडिया ऑन अवर माइंड्स’ किताब के विमोचन पर बोल रहे थे।

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पिछले साल चार नवंबर को भारत इस वृहद मुक्त व्यापार समझौते आरसीईपी से अलग हो गया था। इसकी वजह समझौते की बातचीत के दौरान भारत की चिंताओं और मुद्दों का निराकरण ना हो पाना था।

लूंग ने कहा कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ (पूर्व के साथ संबंध बढ़ाने पर जोर देने वाली नीति) नीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पूर्वी एशियाई क्षेत्र के साथ एकीकरण और व्यापक तौर पर मुक्त क्षेत्र बनाने की मंशा को दिखाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमारे पास बातचीत के लिए व्यापक एजेंडा है, लेकिन एक कदम के बारे में हमें लगता है कि भारत भविष्य में इस पर थोड़ा और समय लेगा। यह आरसईपी में भारत के शामिल होने फिर विचार करने की बात है।’’

भारत ने आरसीईपी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। जबकि 15 अन्य देश इस समझौते पर हस्ताक्षर कर चुके हैं जो आसियान और उसके पांच सहयोगी देशों के बीच मुक्त व्यापार को सुनिश्चित करता है।

आसियान समूह में इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपीन, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया शामिल हैं। जबकि आरसीईपी में उसके अन्य पांच सहयोगी देश चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड हैं।

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