जरुरी जानकारी | सेबी ने नई वित्तीय प्रौद्योगिकी का सीमित ग्राहकों के बीच परीक्षण को लेकर दिशानिर्देश जारी किया

नयी दिल्ली, पांच जून पूंजी बाजार नियामक सेबी ने शुकवार को नियामकीय ‘सैंड बॉक्स’ को लेकर दिशानिर्देश जारी किये। सैंड बॉक्स एक व्यवस्था है जिसमें नई वित्तीय प्रौद्योगिकी के सुरक्षात्मक उपायों के साथ खुले माहौल में सीमित ग्राहकों के बीच परीक्षण की अनुमति दी जाती है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के अनुसार इस कदम का मकसद प्रतिभूति बाजार परिवेश के और विकास तथा उसे पारदर्शी बनाये रखने के लिये वित्तीय प्रौद्योगिकी को अपनाने और उसके उपयोग को प्रोत्साहित करना है।

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सेबी ने कहा कि विशिष्ट ‘सैंड बॉक्स’ परीक्षण आवेदनों के विश्लेषण के बाद न्यूनतम नियामकीय बोझ के साथ नवप्रवर्तन को बढ़ावा देने के लिये विभिन्न नियमनों से छूट दी जा सकती है।

दिशानिर्देश के तहत सेबी के दायरे में आने वाली इकाइयों को वित्तीय प्रौद्योगिकी समाधान के वास्तविक माहौल में सीमित ग्राहकों के बीच निर्धारित समय के लिये प्रयोग को लेकर कुछ सुविधाएं एवं लचीलापन उपलब्ध कराया जाएगा।

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सेबी ने एक परिपत्र में कहा कि निवेशकों के हितों की रक्षा तथा जोखिम को कम करने के लिये इन सुविधाओं के साथ जरूरी सुरक्षा उपाय किये जाएंगे।

बाजार नियामक ने विस्तृत दिशानिर्देश में कहा कि सेबी के पास पंजीकृत सभी इकाइयां नियामकीय सैंड बॉक्स के तहत परीक्षण के लिये पात्र होंगी।

सेबी ने कहा, ‘‘इकाई स्वयं से परीक्षण कर सकती हैं या वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनी की सेवा ले सकती हैं। किसी भी हालत में पंजीकृत इकाई ही मुख्य आवेदनकर्ता होगा।’’

नियामकीय छूट के बारे में सेबी ने कहा कि वह मामले के आधार पर प्रावधानों से छूट देने पर गौर करेगा जो इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन सी वित्तीय प्रोद्योगिकी का परीक्षण किया जाएगा।

निवेशकों की सुरक्षा के तहत अपने ग्राहक को जानो (केवाईसी) और मनी लांड्रिंग निरोधक नियमों से कोई छूट नहीं दी जाएगी।

परियोजना की पात्रता के बारे में नियामक ने कहा कि समाधान नया और अनूठा होना चाहिए और ऐसा होना चाहिए जिससे भारतीय प्रतिभूति बाजार में मौजूदा पेशकश में उल्लेखनीय मूल्यवर्धन हो और वाकई में उसके ग्राहकों पर परीक्षण की आवश्यकता है।

इतना ही नहीं सैंड बॉक्स में परीक्षण के लिये आवेदन देने से पहले आवेदनकर्ता द्वारा सीमित मात्रा में उसका ‘ऑफलाइन’ परीक्षण होना चाहिए। साथ ही समाधान से उपयोगकर्ताओं को सीधे तौर पर लाभ होना चाहिए और उससे वित्तीय प्रणाली कोई खतरा नहीं होना चाहिए।

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