जरुरी जानकारी | सेबी ने विनसम यार्न्स जीडीआर निर्गम मामले में 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया

नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने विनसम यार्न्स लि. के ग्लोबल डिपोजिटरी रिसीट (जीडीआर) से जुड़े मामले में एक व्यक्ति पर बृहस्पतिवार को 25 करोड़ रुपये का जुमाना लगाया।

अरुण पंचरिया नाम के इस व्यक्ति पर सेबी के धोखाधड़ी एवं अनुचित व्यापारिक व्यवहार निरोधक नियम के तहत जुर्माना लगाया गया है।

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विनसम ने मार्च 2011 में 1.324 करोड़ डॉलर मूल्य का जीडीआर जारी किया था।

जांच में पाया गया कि पंचरिया के नियंत्रण वाली इकाई विंटेज एफजेडई (अब अल्टा विस्टा इंटरनेशनल एफजेडई) जीडीआर निर्गम की अकेली खरीदार थी। विंटेज ने ईयूआरएएम बैंक से निर्गम लेने के लिये कर्ज लिया। इस कर्ज के लिए विनसम ने जीडीआर से प्राप्त राशि को गिरवी रखा था।

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पैन एशिया एडवाइजर्स (अब ग्लोबल फाइनेंस एंड कैपिटल लि.)विनसम के जीडीआर निर्गम की मुख्य प्रबंधक थी। पंचरिया पैन एशिया के भी निदेशक थे।

फिर, पंचरिया से संबद्ध एफआईआई-उप-खातों के जरिये जीडीआर को शेयरों में परिवर्तित किया गया। परिवर्तित 56.36 लाख शेयर को 69.21 लाख रुपये में भारतीय शेयर बाजार में बेचा गया।

जांच में सेबी ने पाया कि पंचरिया ने जीडीआर निर्गम जारी करने वाली कंपनी के साठगांठ कर धोखाधड़ी करने का जाल बुना।

सेबी ने कहा, ‘‘यह साबित हो गया है कि अरूण पंचरिया धोखाधड़ी के लिये जिम्मेदार था और जीडीआर के अभिदान की व्यवस्था की। इसको लेकर विनसम के शेयरधारकों को गुमराह किया गया और उनके साथ धोखाधड़ी की गयी।

फलत: नियामक ने 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया।

जीडीआर जारी करने में गड़बड़ी के अन्य मामले में सेबी ने फारमैक्स इंडिया पर 12 करोड़ रुपये का जुर्मना लगाया है।

फारमैक्स ने जून 2010 में 5.992 करोड़ डॉलर और अगस्त 2010 में 1.198 करोड़ डॉलर मूल्य के जीडीआर निर्गम जारी किये।

जीडीआर को विंटेज ने लिया। इसके लिये उसने ईयूआरएएम बैंक से कर्ज लिया। कर्ज को लेकर फारमैक्स ने जरूरी गारंटी दी।

इस संदर्भ में कंपनी ने गुमराह करने वाली जानकारी दी और जरूरी सूचना को छिपाया।

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