देहरादून, 17 अप्रैल भारतीय पर्वतों, नदियों और रेलमार्गों पर अपने लेखन के लिए स्कॉटिश मूल के मशहूर यात्रा वृत्तांत लेखक बिल ऐटकेन का बुधवार रात यहां एक अस्पताल में निधन हो गया। वह 90 वर्ष के थे।
कुछ दिन पहले मसूरी में स्थित अपने घर में गिरने के बाद उन्हें उपचार के लिए देहरादून लाया गया था, लेकिन उनकी हालत में ज्यादा सुधार नहीं हुआ।
वर्ष 1934 में स्कॉटलैंड में जन्मे ऐटकेन ने 1950 के दशक के अंत में भारत आने के बाद खासकर कौसानी और मिर्तोला के हिमालयी आश्रमों में और उसके आसपास के क्षेत्रों समेत पूरे भारत की यात्रा की।
वह 1970 के दशक में दिल्ली और मसूरी में रहे। हालांकि, यात्रा के सिलसिले में वह अरुणाचल प्रदेश, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, हरियाणा के कम-ज्ञात भागों और महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश व तमिलनाडु में भी रहे।
दो दर्जन से ज्यादा यात्रा पुस्तकों में ऐटकेन ने भारत के धार्मिक और प्राकृतिक परिदृश्यों का उल्लेख किया और यहां के लोगों व उनकी मान्यताओं के बारे में काफी लेखन किया। उन्हें भारतीय रेलवे में भी गहरी दिलचस्पी थी और वह नयी दिल्ली में राष्ट्रीय रेल संग्रहालय के मित्र मंडल के अध्यक्ष थे।
"सेवन सेक्रेड रिवर्स", "डिवाइनिंग द डेक्कन - ए मोटरबाइक टू द हार्ट ऑफ इंडिया", "फुटलूज इन द हिमालया", "द नंदा देवी अफेयर", "एक्सप्लोरिंग इंडियन रेलवेज", "माउंटेन डिलाइट", "ट्रैवल्स बाय ए लेसर लाइन", "जांस्कर" और "1000 हिमालयन क्विज" उनकी कुछ उल्लेखनीय कृतियां हैं।
ऐटकेन के निधन पर लेखन जगत की हस्तियों ने शोक जताया है। वरिष्ठ लेखक रामचंद्र गुहा ने ऐटकेन को ‘एक्स’ पर श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने लिखा, "स्कॉटिश मूल के अद्भुत भारतीय लेखक बिल ऐटकेन के निधन की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। वह अपने भारत, उसकी संस्कृतियों और उसके परिदृश्यों को करीब से जानते थे। उनकी किताबें 'सेवन सेक्रेड रिवर्स' और 'फुटलूज़ इन द हिमालया' अनूठी हैं।"
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