देश की खबरें | पंजाब के अनुसूचित जाति आयोग ने पंचायतों में मजदूर विरोधी प्रस्तावों का संज्ञान लिया
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चंडीगढ़, 13 जून पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने शनिवार को राज्य के कुछ ग्राम पंचायतों में पारित मजदूर विरोधी प्रस्तावों को रद्द करने के निर्देश दिए हैं।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति में यहां बताया गया कि आयोग की अध्यक्ष तेजिंदर कौर ने ग्रामीण विकास और पंचायत विभाग के निदेशक को निर्देश दिया कि इन प्रस्तावों को रद्द कर दें और 19 जून तक कार्रवाई रिपोर्ट पेश करें।

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उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से आयोग को पता चला है कि गांवों में अधिकतर मजदूर अनुसूचित जाति से आते हैं।

आयोग ने घनौरी गांव की पंचायत द्वारा पारित ‘‘तानाशाही’’ प्रस्ताव का कड़ा संज्ञान लिया जिसमें पंचायत ने धान रोपने की दर 3800 रुपये तय की, जिस कारण मजदूर तय दर पर काम करने के लिए बाध्य हैं। पंचायत ने इस प्रस्ताव का उल्लंघन करने वालों का सामाजिक बहिष्कार करने का भी निर्णय किया है।

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अध्यक्ष ने संगरूर के उपायुक्त को निर्देश दिया कि मुद्दे की गहन जांच करें और सब डिविजनल अधिकारी (सिविल) के माध्यम से 19 जून तक आयोग के समक्ष विस्तृत रिपोर्ट सौंपें।

कौर ने कहा कि आयोग के संज्ञान में आया कि घनौरी गांव की पंचायत ने 30 मई को प्रस्ताव पारित कर गांव के श्रमिकों के लिए धान रोपने की खातिर 3800 रुपये मजदूरी तय की और उन्हें इसी दर पर काम करना होगा।

प्रस्ताव के मुताबिक मजदूरों को पहले गांव के लिए मजदूरी करनी होगी और अगर वे किसी दूसरे गांव में काम करने जाते हैं तो पूरा गांव खेतों में उनका प्रवेश प्रतिबंधित कर देगा।

इसके अलावा प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि गांव में दैनिक मजदूरी की दर 300 रुपये है। मजदूरों को शाम का भोजन नहीं मिलेगा और बर्तन उन्हें अपने घरों से लाना होगा।

प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि अगर गांव के किसी निवासी ने इस आदेश का उल्लंघन किया तो उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।

अध्यक्ष ने कहा कि कानून के मुताबिक पंचायत को इस तरह का प्रस्ताव जारी करने का कोई अधिकार नहीं है।

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