देश की खबरें | आरएफएल मामला: फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रवर्तक शिविंदर सिंह की जमानत अर्जी खारिज
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 25 सितम्बर दिल्ली की एक अदालत ने रेलिगेयर फिनवेस्ट लिमिटेड (आरएफएल) में निधियों के कथित दुरुपयोग से संबंधित एक मामले में फोर्टिस हेल्थकेयर के पूर्व प्रमोटर शिविंदर मोहन सिंह की जमानत अर्जी शुक्रवार को खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि गहरी जड़ों वाले आर्थिक अपराधों को देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला गंभीर अपराध माना जाना चाहिए।

अदालत ने यह भी कहा कि शिविंदर द्वारा गवाहों को प्रभावित किये जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि जांच के दौरान उन कंपनियों के निदेशकों के बयान दर्ज किये गए थे जिन्हें आरएफएल द्वारा ऋण दिये गए और वे उनसे सम्बद्ध पाये गए।

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने कहा कि यह जांच से प्रथम दृष्टया स्थापित हुआ है कि शिविंदर ने अन्य के साथ मिलकर साजिश रचकर आरएफएल को 2,397 करोड़ रुपये का गलत लाभ पहुंचाया।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘‘जो पैसा 14 कंपनियों को आरएफएल द्वारा दिया गया था वह अंततः आरएचसी होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड पहुंच गया, जो कि शिविंदर मोहन सिंह और मालविंदर मोहन सिंह द्वारा नियंत्रित और स्वामित्व वाली एक कंपनी है। इस प्रकार, अर्जीकर्ता (शिविंदर) ने आरएफएल की कीमत पर खुद को अवैध रूप से समृद्ध किया। अर्जीकर्ता आरईएल (रेलीगेर इंटरप्राइजेज लिमिटेड) के माध्यम से आरएफएल के मामलों पर गहरा नियंत्रण रख रहा था।’’

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अदालत ने कहा, ‘‘आरएफएल से ऋण को मंजूरी देने वाली विभिन्न कमेटियों में आरएफएल और आरईएल के सदस्य थे। इस प्रकार अर्जीकर्ता आरएफएल के मामलों से खुद को दूर नहीं कर सकता। यह एक ऐसा मामला है जिसमें बहुत बड़ी आर्थिक धोखाधड़ी है। ऐसे मामलों में किए गए अपराधों को गंभीर अपराध माना जाना चाहिए।’’

शिविंदर के वकील एन हरिहरन ने अदालत से कहा कि पूरे सबूत की प्रकृति दस्तावेजी है और वह जब्त की जा चुकी है और इसलिए सबूतों से उनके द्वारा छेड़छाड़ किये जाने की संभावना नहीं है।

पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त लोक अभियोजक एल डी सिंह ने जमानत अर्जी का विरोध किया और कहा कि मामले में भारी वित्तीय धोखाधड़ी की गई है इसलिए शिविंदर जमानत के हकदार नहीं हैं।

शिकायतकर्ता आरएफएल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर ने भी जमानत अर्जी का यह कहते हुए विरोध किया कि आरएफएल को उसका पैसा वापस नहीं मिला और उसे शिविंदर और अन्य व्यक्तियों के कृत्यों से नुकसान हुआ।

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