देश की खबरें | दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था पर रिपोर्ट निष्पक्ष, जमीनी रिपोर्टिंग पर आधारित : न्यूयॉर्क टाइम्स

नयी दिल्ली, 19 अगस्त अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था पर अपनी स्टोरी को ‘निष्पक्ष और जमीनी रिपोर्टिंग’ पर आधारित बताते हुए ‘पेड न्यूज’ के आरोपों को शुक्रवार को खारिज कर दिया।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के आवास पर शुक्रवार को छापेमारी के बाद अखबार के आलेख को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच वाकयुद्ध शुरू हो गया। आप नीत सरकार की आबकारी नीति को तैयार करने और इसके क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं को लेकर सीबीआई ने यह कार्रवाई की। सिसोदिया के पास शिक्षा और आबकारी विभाग की भी जिम्मेदारी है ।

आप ने कहा कि जब ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने शिक्षा के दिल्ली मॉडल पर सकारात्मक खबर छापी तो नरेंद्र मोदी नीत केंद्र सरकार ने सीबीआई को सिसोदिया के घर भेज दिया, वहीं भाजपा ने यह कहकर पलटवार किया कि यह एक ‘पेड’ आलेख है।

मामले पर स्पष्टीकरण के अनुरोध पर ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की बाह्य संचार निदेशक निकोल टायलर ने एक ई-मेल में पीटीआई को बताया, ‘‘दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के प्रयासों के बारे में हमारी रिपोर्ट निष्पक्ष, जमीनी रिपोर्टिंग पर आधारित है।’’

उन्होंने कहा कि शिक्षा एक ऐसा मुद्दा है जिसे ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ वर्षों से कवर करता रहा है। टायलर ने कहा, ‘‘न्यूयॉर्क टाइम्स की पत्रकारिता हमेशा स्वतंत्र होती है, राजनीतिक या विज्ञापनदाता के प्रभाव से मुक्त होती है।’’

‘खलीज टाइम्स’ द्वारा इसी आलेख को प्रकाशित करने संबंधी आरोपों के बारे में टायलर ने स्पष्ट किया, ‘‘अन्य समाचार संस्थान नियमित रूप से लाइसेंस लेते हैं और हमारे (समाचार) कवरेज को पुनः प्रकाशित करते हैं।’’

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने 18 अगस्त को अपने अंतरराष्ट्रीय संस्करण के पहले पृष्ठ पर एक खबर प्रकाशित की जिसमें आम आदमी पार्टी के शासन के दौरान ‘‘दिल्ली की शिक्षा प्रणाली में व्यापक परिवर्तन’’ को रेखांकित किया गया है। आलेख के साथ तीन छात्राओं के साथ सिसोदिया की एक तस्वीर भी प्रकाशित की है। आलेख में कहा गया है, ‘‘दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने स्कूलों का औचक दौरा कर सुधार की शुरुआत की। अब भारत के अन्य राज्य दिल्ली मॉडल को अपनाने पर जोर दे रहे हैं।’’

सीबीआई के छापे पर प्रतिक्रिया जताते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘‘दिल्ली ने भारत को गौरवान्वित किया है। दिल्ली मॉडल अमेरिका के सबसे बड़े अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स के पहले पन्ने पर है। केंद्र ने सीबीआई को मनीष सिसोदिया के घर भेज दिया है।’’

भाजपा ने पलटवार करते हुए सिसोदिया की तस्वीर के साथ प्रकाशित ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के आलेख को ‘‘पेड न्यूज’’ करार दिया और केजरीवाल नीत सरकार पर इस तरह के प्रचार पर जनता का पैसा बर्बाद करने का आरोप लगाया।

भाजपा के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘ऐसा कैसे हुआ कि ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ और ‘खलीज टाइम्स’ दिल्ली के गैर-मौजूद शिक्षा मॉडल पर एक ही आलेख, शब्द दर शब्द, एक ही व्यक्ति द्वारा लिखे गए, वही तस्वीरें (वह भी एक निजी स्कूल की) प्रकाशित करते हैं?’’

मालवीय ने कहा, ‘‘अरविंद केजरीवाल का सबसे अच्छा बचाव पेड प्रमोशन के अलावा और कुछ नहीं है...।’’ उत्तर-पूर्वी दिल्ली से भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने भी आलेख का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि आप प्रचार पर सरकारी धन बर्बाद कर रही है।

तिवारी ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘लो जी यहां भी पकड़े गये...न्यूयॉर्क टाइम्स और खलीज टाइम्स में एक समान शब्द और एक ही व्यक्ति के लिखे हुए हैं... बेशर्म आप, दिल्ली की जनता का पैसा बर्बाद कर रही है अपनी तस्वीर छपवाने के लिए वह पैसा भी दे रही।’’

आरोपों का जवाब देते हुए आप ने कहा, ‘‘यह बिल्कुल हास्यास्पद और बेतुका है कि भाजपा ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के आलेख के ‘पेड’ आलेख होने का दावा कर रही है। मीडिया में काम करने वाला कोई भी व्यक्ति एक लेख को देख सकता है और यह पता लगा सकता है कि यह पेड है या नहीं।’’

आप ने कहा कि इस स्टोरी को करने वाले पत्रकार ने इस साल मार्च में औपचारिक रूप से एक साक्षात्कार और तस्वीरों के लिए अनुरोध किया था। पार्टी ने कहा कि ‘लॉन्गफॉर्म प्रिंट’ होने के कारण, अखबार ने इस पर एक महीने तक काम किया, जिससे उन्हें एक छात्र प्रदीप पासवान जैसी कहानियों पर कार्य करने में मदद मिली।

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