एजेंसी न्यूज

LIVE: 15 जनवरी की बड़ी खबरें और अपडेट्स

भारत और दुनिया की अहम खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं.

LIVE: 15 जनवरी की बड़ी खबरें और अपडेट्स
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

भारत और दुनिया की अहम खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.- नासा का पहला मेडिकल रेस्क्यू, चार अंतरिक्ष यात्री लौटे

-ईरान के विदेश मंत्री ने कहा, "फांसी देने की कोई योजना नहीं"

-75 देशों के लिए 'इमिग्रेंट वीजा प्रोसेसिंग' निलंबित करेगा ट्रंप प्रशासन

- मस्क के ग्रोक एआई ने न्यूड तस्वीरें बनाने पर लगाई रोक

- फुटबॉल विश्व कप 2026 के लिए टिकटों की भारी मांग, 50 करोड़ से ज्यादा आवेदन

- जर्मनी: गलत सजा काटने वाले बेगुनाह को मिला 13 करोड़ रुपये का मुआवजा

जर्मनी: गलत सजा काटने वाले बेगुनाह को मिला 13 करोड़ रुपये का मुआवजा

जर्मनी के बवेरिया राज्य के न्याय मंत्रालय ने घोषणा की है कि मेनफ्रेड गेंडित्ज्की को राज्य सरकार की ओर से 13 लाख यूरो (लगभग 13.6 करोड़ रुपये) का मुआवजा दिया जाएगा. गेंडित्ज्की, जो एक अपार्टमेंट बिल्डिंग के सुपरिटेंडेंट थे, को 2010 में एक बुजुर्ग महिला की हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.

यह भी पढ़ें:ग्वालियर में वॉल पेंटिंग पर अश्लील निशान, क्या कला में भी सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं?

उन पर आरोप था कि उन्होंने महिला को बाथटब में डुबोकर मार डाला. लेकिन 13 साल जेल में बिताने और 4,916 दिनों के संघर्ष के बाद, 2023 में दोबारा हुई सुनवाई में उन्हें पूरी तरह बरी कर दिया गया. नई फॉरेंसिक रिपोर्ट में महिला की मौत को एक संभावित दुर्घटना माना गया.

यह भी पढ़ें: जोंडरफेरमोएगेन: क्या है जर्मनी में चुने गए 2025 के सबसे खराब शब्द का मतलब

मुआवजे की यह राशि गेंडित्ज्की के लिए एक बड़ी जीत है, क्योंकि इससे पहले राज्य के अभियोजकों ने एक अजीबोगरीब मांग रखी थी कि वे जेल में रहने और खाने के खर्च के बदले लगभग एक लाख यूरो सरकार को चुकाएं. गेंडित्ज्की के वकील ने इस मांग को सिरे से खारिज करते हुए हर्जाने की मांग की थी. हालांकि, न्याय मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि पूरी राशि गेंडित्ज्की के पास नहीं रहेगी. इसमें से कुछ हिस्सा टैक्स में जाएगा और उन्हें अपने वकीलों की भारी फीस भी चुकानी होगी.

फुटबॉल विश्व कप 2026 के लिए टिकटों की भारी मांग, 50 करोड़ से ज्यादा आवेदन

फीफा ने बुधवार, 14 जनवरी की देर रात बताया कि 2026 विश्व कप के टिकटों के लिए दुनिया भर से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है. फीफा के अनुसार, 11 दिसंबर से 13 जनवरी के बीच चली बिक्री प्रक्रिया के दौरान टिकटों के लिए 50 करोड़ से ज्यादा आवेदन प्राप्त हुए हैं.

मेजबान देशों - अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा - के बाद जर्मनी वह देश है जहां से सबसे ज्यादा आवेदन आए हैं. फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने इसे एक "ग्लोबल स्टेटमेंट" बताया है. प्रशंसकों को 5 फरवरी तक सूचित किया जाएगा कि क्या वे रैंडम लॉटरी के माध्यम से टिकट हासिल करने में सफल रहे हैं.

टिकटों की भारी कीमतों को लेकर वैश्विक स्तर पर हुए विरोध के बाद, फीफा ने प्रशंसकों के लिए 'सपोजिटर एंट्री टियर' नामक एक नई श्रेणी शुरू की है. यह सस्ती श्रेणी 11 जून से 19 जुलाई तक होने वाले सभी मैचों के लिए लागू होगी.

हालांकि, इन सस्ते टिकटों की संख्या काफी सीमित है. फीफा प्रत्येक मैच के लिए संबंधित टीम के समर्थकों को केवल 8 फीसदी टिकट आवंटित करता है, जिसमें से इस नई सस्ती श्रेणी के लिए केवल 10 फीसदी हिस्सा रखा गया है.

मस्क के ग्रोक एआई ने न्यूड तस्वीरें बनाने पर लगाई रोक

दुनिया भर में बढ़ते विरोध के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने बुधवार, 14 जनवरी को बताया कि ग्रोक अब किसी भी असली व्यक्ति की ऐसी तस्वीरें नहीं बनाएगा जिसमें उन्हें कम कपड़ों या आपत्तिजनक स्थिति में दिखाया गया हो.

यह कार्रवाई विशेष रूप से ग्रोक के 'स्पाइसी मोड' के दुरुपयोग को रोकने के लिए की गई है, जिसका इस्तेमाल महिलाओं और बच्चों की अश्लील तस्वीरें बनाने के लिए किया जा रहा था. कंपनी की सेफ्टी टीम के अनुसार, यह प्रतिबंध प्रीमियम ग्राहकों सहित सभी यूजर्स पर समान रूप से लागू होगा.

यह कदम पेरिस के एक गैर-लाभकारी संगठन एआई फोरेंसिक्स की उस रिपोर्ट के बाद उठाया गया है, जिसमें खुलासा हुआ था कि ग्रोक द्वारा बनाई गई 20,000 तस्वीरों में से आधी से अधिक आपत्तिजनक थीं. इस रिपोर्ट के अनुसार, दो फीसदी तस्वीरें नाबालिग बच्चों से संबंधित थीं.

इसी कारण इंडोनेशिया और मलेशिया ने पहले ही ग्रोक पर प्रतिबंध लगा दिया है. अब ब्रिटेन की 'ऑफकॉम' और अमेरिका के कैलिफोर्निया में भी इस मामले की जांच शुरू हो गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या कंपनी ने सुरक्षा कानूनों का उल्लंघन किया है.

75 देशों के लिए 'इमिग्रेंट वीजा प्रोसेसिंग' निलंबित करेगा ट्रंप प्रशासन

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के प्रशासन ने 75 देशों के आवेदकों के लिए इमिग्रेंट वीजा प्रोसेसिंग को अस्थायी रूप से रोकने का एलान किया है. विदेश विभाग के प्रवक्ता ने बुधवार, 14 जनवरी को बताया कि यह कदम 21 जनवरी से लागू होगा और इसका उद्देश्य वीजा आवेदकों की स्क्रीनिंग और वेटिंग को "उच्चतम स्तर" पर सुनिश्चित करना है. प्रभावित देशों में पाकिस्तान, बांग्लादेश, ब्राजील, कोलंबिया, बोस्निया, अल्बानिया और कई अफ्रीकी व मध्य-पूर्वी राष्ट्र शामिल हैं.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रमुख उप प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि विभाग अपनी लंबे समय से चली आ रही अधिकारिता का उपयोग कर उन संभावित प्रवासियों को अयोग्य घोषित करेगा जो अमेरिकी कल्याण योजनाओं का लाभ उठाने की संभावना रखते हैं.

यह रोक केवल इमिग्रेंट वीजा पर लागू होगी, जबकि विजिटर वीजा प्रभावित नहीं होंगे. ट्रंप प्रशासन ने जनवरी में सत्ता में लौटने के बाद से कानूनी प्रवास को कठिन बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें एच-1बी वीजा पर भारी शुल्क और सोशल मीडिया स्क्रीनिंग शामिल है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम अगले साल में लगभग 3.15 लाख कानूनी प्रवासियों को अमेरिका से बाहर कर सकता है.

ईरान के विदेश मंत्री ने कहा, "फांसी देने की कोई योजना नहीं"

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने बुधवार (14 जनवरी) को कहा कि सरकार के पास प्रदर्शनकारियों को "फांसी देने की कोई योजना नहीं" है. उन्होंने अमेरिकी चैनल फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में स्पष्ट किया, "फांसी बिल्कुल सवाल से बाहर है." यह बयान उस समय आया है जब देश में आर्थिक संकट और राजनीतिक असंतोष के चलते बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन जारी हैं.

ट्रंप की धमकियों और देशव्यापी प्रदर्शनों के बीच ईरान का दावा, पूरी तरह काबू में आए हालात

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मंगलवार को सीबीएस न्यूज से बातचीत में कहा कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों को फांसी देता है तो अमेरिका "बहुत सख्त कदम" उठाएगा. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि कार्रवाई किस रूप में होगी. बुधवार को ट्रंप ने संकेत दिया कि उन्हें जानकारी मिली है कि ईरान में हिंसा फिलहाल कम हो रही है और बड़े पैमाने पर फांसी की कोई योजना नहीं है.

नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स सोसाइटी के अनुसार, ईरानी जेलों में फांसी आम है. वहीं, अमेरिकी संगठन एचआरएएनए ने दावा किया है कि अब तक 2,403 प्रदर्शनकारियों और 147 सरकारी समर्थकों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 18,137 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. ईरानी सरकार आर्थिक संकट के लिए विदेशी प्रतिबंधों को जिम्मेदार ठहरा रही है और विरोध प्रदर्शनों में बाहरी हस्तक्षेप का आरोप लगा रही है.

नासा ने अंतरिक्ष स्टेशन से किया पहला मेडिकल इवैक्यूएशन

नासा ने बुधवार, 14 जनवरी को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) से एक अमेरिकी, एक जापानी और एक रूसी अंतरिक्ष यात्री समेत चार सदस्यीय दल को समय से पहले धरती पर वापस भेजा. इनमें से एक अंतरिक्ष यात्री को मेडिकल देखभाल की आवश्यकता थी.

यह मेडिकल आवश्यकता पड़ने पर किसी अंतरिक्ष यात्री को "नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन" (नासा) द्वारा धरती पर भेजे जाने का पहला मामला है.

नासा ने पिछले सप्ताह एक अंतरिक्ष यात्री की तबीयत बिगड़ने के बाद यह कदम उठाया. हालांकि एजेंसी ने ना तो नाम उजागर किया और ना ही स्वास्थ्य समस्या के बारे में जानकारी दी. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आपात स्थिति नहीं थी, लेकिन अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने की तुलना में पृथ्वी पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने के कारण यह निर्णय लिया गया.

इस कदम के बाद आईएसएस पर केवल तीन अंतरिक्ष यात्री रह गए हैं, जिससे नासा को नियमित और आपातकालीन स्पेसवॉक फिलहाल रोकने पड़ेंगे. नासा और स्पेसएक्स अब फरवरी के मध्य में नई चार सदस्यीय टीम को फ्लोरिडा से भेजने की तैयारी कर रहे हैं. यह घटना नासा के 65 साल के मानव अंतरिक्ष उड़ान इतिहास में पहली मेडिकल इवैक्यूएशन है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 15, 2026 03:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).