मुंबई, छह अगस्त रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को इलेक्ट्रॉनिक मंच ई-कुबेर प्रणाली पर वैकल्पिक रूप से स्वचालित ‘स्वीप-इन और स्वीप आउट’ (एएसआईएसओ) सुविधा पेश की। इससे बैंकों को नकदी के प्रबंधन में मदद मिलेगी। कोविड-19 संकट के कारण उत्पन्न बाधाओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
एएसआईएसओ सुविधा के तहत बैंक यह निर्धारित कर सकेंगे वह दिन की समाप्ति पर कितनी राशि (या दायरा) रिजर्व बैंक के पास चालू खाते में रखना चाहते हैं।
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आरबीआई ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘‘पहले से निर्धारित राशि के आधार पर नकदी की सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) और रिवर्स रेपो बोली, जो भी मामला बनता हो, स्वयं से सृजित होगा। इसमें किसी प्रकार के मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत नहीं होगी।’’
दिन के समापन पर तरलता समायोजन सुविधा (एलएएफ) परिचालन के लिये केंद्रीय बैंक के अनुसार एएसआईएसओ सुविधा से बैंक कोविड-19 संकट के कारण उत्पन्न बाधाओं के बीच कर्यबल का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। साथ ही उन्हें दिन के समापन पर नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) राशि के प्रबंधन को लेकर एलएएफ/एमएसएफ भागीदारी में लचीलापन मिलेगा।
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आरबीआई ने कहा कि एलएएफ और एमएसएफ का लाभ लेने के लिये प्रात्र बैंकों के पास छह अगस्त, 2020 से एएसआईएसओ सुविधा के उपयोग का विकल्प होगा।
केंद्रीय बैंक के अनुसार यह सुविधा वैकल्पिक है और ई-कुबेर पोर्टल के जरिये रिवर्स रेपो और एमएसएफ के माध्यम से ‘मैनुअल’ बोली की मौजूदा व्यवस्था के अलावा है।
शीर्ष बैंक ने यह भी कहा कि दिन के समान पर चालू खाता में रकम या उसके दायरे में संशोधन की सुविधा कामकाजी दिवस को ‘आरटीजीएस’ (रीयल टाइम ग्रास सेटलमेंट) पर सुबह नौ बजे रात 11.30 बजे तक उपलब्ध होगी।
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