जयपुर/नयी दिल्ली, 22 जुलाई राजस्थान में कांग्रेस के अंदर चल रही लड़ाई बुधवार को उच्चतम न्यायालय पहुंच गई। राज्य के विधानसभा अध्यक्ष ने सचिन पायलट और पार्टी के 18 अन्य असंतुष्ट विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही 24 जुलाई तक रोके जाने के उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी है।
शीर्ष न्यायालय की वेबसाइट पर उपलब्ध 23 जुलाई (बृहस्पतिवार) की कार्यसूची के अनुसार न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ इस याचिका पर सुनवाई करेगी।
विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) सी. पी. जोशी ने शीर्ष न्यायालय में दायर की गई अपनी याचिका में कहा कि न्यायपालिका से कभी भी यह अपेक्षा नहीं की गयी थी कि वह ऐसे मामलों में हस्तक्षेप करेगी, जिससे संवैधानिक गतिरोध पैदा हो।
उन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने का अनुरोध करते हुये कहा है कि यह सुनिश्चित करना शीर्ष अदालत का कर्तव्य है कि संवैधानिक प्राधिकारी अपनी अपनी सीमाओं में रहते हुये अपने अधिकारों का इस्तेमाल करें और संविधान में प्रदत्त ‘लक्ष्मण रेखा’ का पालन करें।
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राजस्थान में सत्ता के लिये रस्साकशी के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)ने कथित उर्वरक घोटाले से जुड़े धन शोधन के एक मामले में बुधवार को देश भर में की गई कार्रवाई के तहत राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भाई के परिसरों में भी छापे मारे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
इस पर , कांग्रेस ने अग्रसेन गहलोत को निशाना बनाने वाले इन छापों को राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार गिराने की उसकी कथित कोशिश करार दिया।
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, '‘ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आपने इस देश में 'रेडराज' पैदा किया हुआ है। आपके इस 'रेडराज' से राजस्थान डरने वाला नहीं। आपके 'रेडराज' से राजस्थान की आठ करोड़ जनता घबराने वाली नहीं है।’’
इस बीच, मुख्यमंत्री गहलोत ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा । इसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि राजस्थान की निर्वाचित सरकार को गिराने का प्रयास हो रहा है और इस षड्यंत्र में एक केंद्रीय मंत्री भी शामिल हैं।
गहलोत के अनुसार, ‘‘मुझे ज्ञात नहीं है कि किस हद तक यह सब आपकी जानकारी में है, या आपको गुमराह किया जा रहा है। इतिहास ऐसे कृत्य में भागीदार बनने वालों को कभी माफ नहीं करेगा।’’ यह पत्र बुधवार को मीडिया को जारी किया गया।
बर्खास्त उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भी एक नोटिस भेजा है, जिसके जरिये उन्होंने कांग्रेस विधायक गिरिराज सिंह मलिंग से माफी मांगने की मांग की है। साथ ही , पार्टी बदलने के लिये उनके द्वारा धन की पेशकश किये जाने का आरोप लगाने को लेकर एक रुपये का मुआवाज अदा करने को भी कहा।
जयपुर में विधानसभा अध्यक्ष जोशी ने कहा कि वह संवैधानिक संकट टालने के लिये उच्चतम न्यायालय का रुख कर रहे हैं।
उनकी याचिका में दलील दी गई है कि संविधान की 10 वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता कार्यवाही विधानमंडल का कामकाज है और इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।
शीर्ष न्यायालय का रुख करने का फैसला मंगलवार शाम लिया गया, जब विधानसभा अध्यक्ष के कार्यालय ने राजस्थान उच्च न्यायालय के एक आदेश पर विचार किया।
मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महंती और न्यायमूर्ति प्रकाश गुप्ता के आदेश में कहा गया था कि इसकी कार्यवाही शुक्रवार को फिर से शुरू होगी तथा विधानसभा अध्यक्ष से (विधायकों को जारी अयोग्यता) नोटिसों पर तब तक कोई भी कार्रवाई रोके रखने का अनुरोध किया।
विधानसभा अध्यक्ष ने असंतुष्ट विधायकों को ये नोटिस भेजे थे और पूछा था कि क्यों न उन्हें विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया जाए।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने पार्टी व्हिप की अवज्ञा करने को लेकर विधायकों को राजस्थान विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने के लिये विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत कर रखी है। इसी शिकायत पर अध्यक्ष ने बागी विधायकों को नोटिस जारी किए थे।
हालांकि, पायलट खेमे की दलील है कि पार्टी का व्हिप तभी लागू होता है जब विधानसभा का सत्र चल रहा हो।
कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष को दी गई अपनी शिकायत में पायलट और अन्य असंतुष्ट विधायकों के खिलाफ संविधान की 10वीं अनुसूची के पैराग्राफ 2(1)(ए) के तहत कार्रवाई करने की मांग की है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत करने के बाद पायलट को उप मुख्यमंत्री पद और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से बर्खास्त किया जा चुका है।
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