ताजा खबरें | रास में उठी श्रम कानूनों में किए गए बदलाव समाप्त करने की मांग

नयी दिल्ली, 14 सितंबर राज्यसभा में कांग्रेस के एक सदस्य ने श्रम कानूनों में किए गए बदलावों को समाप्त करने की मांग उठाते हुए सोमवार को कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से उत्पन्न हालात के कारण रोजगार गंवा चुके मजदूरों की मदद के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी है।

कांग्रेस के पी एल पुनिया ने उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से अप्रत्याशित स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस संकट में मजदूरों को अपने रोजगार खत्म हो जाने की वजह से घोर संकट का सामना करना पड़ रहा है।

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उन्होंने कहा ‘‘हमने बेरोजगार हो चुके मजदूरों को मीलों की दूरी पैदल तय कर अपने घरों की ओर जाते हुए देखा है। ’’

पुनिया ने कहा कि ऐसे विषम हालात में इन बेहाल मजदूरों की मदद करने के बजाय कुछ राज्य सरकारों ने उद्योगपतियों के हितों में श्रम कानूनों में बदलाव कर दिया। इन बदलावों के तहत मजदूरों के काम करने के घंटे बढ़ा दिए गए और ओवरटाइम की अवधि भी अधिक कर दी गई है।

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उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश इसका उदाहरण हैं।

पुनिया ने श्रम कानूनों में किए गए बदलावों को समाप्त करने ओर पुराने श्रम कानूनों को बहाल करने की मांग करते हुए सरकार से कहा कि मजदूरों के हित में यह कदम उठाना बेहद जरूरी है।

विभिन्न दलों के सदस्यों ने उनके इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया।

शून्यकाल में ही भाजपा के हरनाथ सिंह यादव ने बढ़ती आबादी और उसकी वजह से घटते संसाधनों का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि देश जनसंख्या विस्फोट के मुहाने पर खड़ा है। बढ़ती आबादी ने न केवल बेरोजगारी, खाद्य संकट, पर्यावरण, जलसंकट, संसाधनों की कमी जैसी समस्याएं खड़ी की हैं बल्कि सामाजिक तानेबाने को भी गहरे तक प्रभावित किया है।

उन्होंने सरकार से ऐसे उपाय करने की मांग की जिनसे न केवल आबादी नियंत्रित की जा सके बल्कि संसाधनों का अधिकतक पयोग सुनिश्चित किया जा सके।

कांग्रेस की फूलोंदेवी नेताम ने छत्तीसगढ़ी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की।

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