देश की खबरें | पीवीआर सिनेमा को दर्शकों की वापसी के लिए है अच्छी फिल्मों और मौखिक प्रचार पर भरोसा
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 24 जुलाई पीवीआर सिनेमा ने शुक्रवार को कहा कि सरकार से थियेटरों को आम लाोगों के लिए खोल देने की अनुमति मिल जाने के बाद वे अच्छी फिल्मों और दर्शकों द्वारा लोगों के बीच उनकी व्यवस्था की तारीफ करने पर भरोसा करते हैं।

भारत में थियेटर कोरोना वायरस लॉकडाउन के चलते मार्च से बंद हैं लेकिन अब थियेटर चेन मालिकों को उम्मीद है कि ‘अनलॉक 3’ में सरकार उनके धंधे को क्रमिक तरीके से खोलने की अनुमति दे सकती है।

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इस माह के प्रारंभ में मल्टीप्लेक्स ऑफ इंडिया ने विभिन्न मंत्रालयों एवं प्रधानमंत्री कार्यालय तथा नीति आयोग को मानक संचालन प्रक्रिया की सूची सौंपी थी और सरकार को सुरक्षा नियमों की तैयारी को लेकर आश्वासन देने का प्रयास किया था।

पीवीआर सिनेमा के सीईओ गौतम दत्ता ने अपने थियेटरों में सुरक्षा इंतजामों के मीडिया द्वारा अवलोकन के दौरान साक्षात्कार में कहा, ‘‘ हर स्तर के ग्राहक होते हैं। कुछ ऐसे होते हैं जो थोड़े साहसी होते हैं, कुछ ऐसे होते हैं जो दूसरों की देखादेखी करते हैं और कुछ ऐसे भी होते हैं जो पूरी तरह नकारात्मक होते हैं। ऐसे में हम पहले आशावादियों के पास पहुंचने की उम्मीद करते हैं जिन्हें आने में दिक्कत नहीं है और जिनमें (आत्म) विश्वास है।’’

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उन्होंने कहा,‘‘ एक बार वह हो जाता है तो हमारी योजना है कि हम उनका प्रचारकर्ता के रूप में इस्तेमाल करेंगे। हम उन्हें सुरक्षित महसूस कराना चाहते हैं ताकि वे बाहर जाएं तो थियेटर के बारे में दूसरों को अपना अनुभव बताएं।’’

यह मल्टीप्लेक्स चेन भारत के 71 शहरों में 176 संपत्तियों पर 845 पर्दे पर सिनेमा दिखाती है। उसने एक दूसरे के बीच दूरी, डिजिटल लेन-देन, शौचालय सुविधा का 50 फीसद इस्तेमाल, फाइबर और ग्लास शील्ड जैसे कई कदम उठाये हैं। इसके अलावा वह अपने कर्मचारियों की स्वास्थ्य जांच रोजाना करेंगे तथा उन्हें पीपीई किट, ग्लव्स, फेस शील्ड आदि देंगे।

दत्ता ने कहा कि वह उस डर से वाकिफ है जो दर्शकों को सिनेमाघरों में जाने से रोकता है लेकिन उन्हें आशा है कि उन्होंने जो कदम उठाये हैं, उससे सिनेप्रेमी हॉल तक पहुंचेंगे।

कई सिनेपंडितों ने अनुमान लगाया है कि लॉकडाउन के बाद की स्थिति में थियेटरों का भविष्य स्टार वाले प्रोजेक्ट पर निर्भर करता है जबकि दुआ मानते हैं कि बड़े बजट की फिल्में और अच्छे कथानक की फिल्में लोगों को हॉल तक लाने में अहम हैं।

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