जरुरी जानकारी | ऋण शोधन प्रक्रिया में चल रही कंपनियों को न्यूनतम सार्वजनिक शेयर की शर्त में ढील देने का प्रस्ताव

नयी दिल्ली, 19 अगस्त बाजार नियामक सेबी ने बुधवार को उन कंपनियों के लिये 25 प्रतिशत न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता से संबंधित नियमों में ढील देने का प्रस्ताव किया जो कॉरपोरेट ऋण शोधन प्रक्रिया में गयी हैं और प्रक्रियाओं का पालन करते हुए फिर से सूचीबद्धता चाहती हैं।

इसके अलावा सेबी ने ऐसी कंपनियों के खुलासा नियमों को कड़ा करने का भी प्रस्ताव किया है।

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भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा कि समाधान योजना के क्रियान्वयन से संभव है कि ऐसी कंपनियों में सार्वजनिक शेयाधारिता नीचे चली जाए।

वास्तव में, हाल में एक मामले में पाया गया कि कॉरपोरेट ऋण शोधन समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) के बाद सार्वजनिक हिस्सेदारी घटकर 0.97 प्रतिशत पर आ गयी। यह भी देखा गया कि अतिरिक्त एहतियाती निगरानी कार्रवाई के बावजूद शेयर के दाम में 8,764 प्रतिशत का उछाल आया।

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सेबी के अनुसार इतने कम सार्वजनिक शेयरधारित से कई चिंता सामने आयी हैं। इसमें शेयर की कीमत की निष्पक्ष खोज का विफल होना शामिल हैं। ऐसे में निगरानी उपाय बढ़ाने की जरूरत है।

नियामक के अनुसार कम शेयरों की उपलब्धता से शेयरों की मांग और आपूर्ति के अंतर से संबंधित मुद्दों के कारण ऐसी कंपनियों के व्यापार में स्वस्थ भागीदारी प्रतिबंधित होती है।

इन मसलों को देखते हुए सेबी ने कॉरपोरेट ऋण शोधन समाधान प्रक्रिया के अंतर्गत आने वाली कंपनियों के लिये न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारित (एमपीएस) के लिये सीमा पर फिर से विचार करने का प्रस्ताव किया है।

नियामक ने इस बारे में संबंधित पक्षों और बाजार मध्यस्थें से 18 सितंबर तक टिप्पणी देने को कहा गया है।

इसमें सुझाव दिया गया है कि सीआईआरपी के बाद कंपनियों को न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता से चूक की तिथि से छह महीने के भीतर कम-से-कम 10 प्रतिशत और तीन साल के भीतर 25 प्रतिशत शेयरधारित हासिल करने को अनिवार्य किया जा सकता है।

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