देश की खबरें | एमबीबीएस अभ्यर्थी की आखिरी तिथि के बाद नीट (यूजी) के लिए फार्म भरने की इजाजत के अनुरोध वाली याचिका खारिज
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नयी दिल्ली, 26 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक एमबीबीएस अभ्यर्थी की वह अर्जी खारिज कर दी जिसमें उसने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को यह निर्देश देने का अनुरोध किया था कि उसे नीट (यूजी)-2020 के लिए आवेदन दायर करने की इजाजत दे। अदालत ने कहा कि उसके पास इसके लिए कोई वैध कारण नहीं है जिसने उसे छह जनवरी की अंतिम तिथि से पहले फार्म जमा करने से रोका।

लड़की ने दलील दी कि वह अपना फार्म पूर्व में इसलिए नहीं भर सकी क्योंकि उसके पिता की तबीयत खराब थी और बाद में मई में एनटीए ने पहले ही भरे जा चुके नीट फार्म में जानकारी में सुधार के लिए तिथि 31 मई तक के लिए बढ़ायी थी। इसलिए उसे उसका फार्म भरने की इजाजत दी जाए।

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न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने उसकी दलीलें खारिज कर दी और कहा कि जानकारी में सुधार के लिए समय में विस्तार इसलिए दिया गया क्योंकि कई उम्मीदवारों को कोविड-19 के मद्देनजर लागू लॉकडाउन के चलते अपने आवास बदलने पड़े और ‘‘तदनुसार इसका उन सेंटर के शहरों पर प्रभाव होता जो उन्होंने अपने फार्म में भरे थे।’’

अदालत ने कहा, ‘‘इसलिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा उन सेंटर के शहरों के विकल्पों में सुधार के लिए तिथि में विस्तार की इजाजत देने में एक तर्क है जो उन्होंने पहले ही भरे गए आनलाइन फार्म में दिये थे।’’

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उसने कहा कि याचिकाकर्ता (लड़की) छह जनवरी की आखिरी तिथि से पहले फार्म जमा कर सकती थी ‘‘जब कोविड-19 महामारी के चलते कोई दिक्कत नहीं थी।’’

अदालत ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता को कोई भौतिक फार्म जमा नहीं करना था, एक आनलाइन फार्म भरना था जो किसी भी स्थान से किया जा सकता है।’’

याचिकाकर्ता के लिए पेश हुए अधिवक्ता राकेश मल्होत्रा ने यह भी दलील दी कि एनटीए ने संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) मेन 2020 आनलाइन आवेदन जमा करने के लिए आखिरी तिथि बढायी थी और उसी तरह का मौका उन लोगों को मिलना चाहिए जो ‘नेशनल एलिजीबिलीटी कम एंट्रेंस टेस्ट- अंडर ग्रैजुएट’ (नीट-यूजी) के लिए फार्म आखिरी तिथि से पहले नहीं भर पाए।

अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया कि एक गैर मेडिकल कोर्स जेईई-2020 और मेडिकल सीटें भरने के लिए होने वाले नीट (यूजी)-2020 के बीच कोई समानता नहीं है।

अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

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