नयी दिल्ली, चार सितंबर अधिवक्ता कल्याण न्यास ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि उसने अपने सदस्य वकीलों के लिये अनुग्रह राशि के तौर पर एक करोड़ रुपये की रकम निश्चित करने का फैसला किया है भले ही वे कोविड-19 से पीड़ित हों या न हों।
अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल संजय जैन ने न्यास के अध्यक्ष के तौर पर उसका प्रतिनिधित्व करते हुए मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ को बताया कि यह फैसला बुधवार को लिया गया और उन अधिवक्ताओं से आवेदन मांगे गए हैं जिन्हें सहायता की जरूरत है।
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न्यास ने अदालत को बताया कि पूर्व में उसके अपने निर्धन और कोविड-19 से पीड़ित सदस्यों के लिये कोविड-19 राहत कोष के तहत दो करोड़ रुपये की रकम अलग रखी थी।
जैन ने कहा कि इसके अलावा कोष के वितरण के उद्देश्य से एक उप-समिति भी गठित की गई है।
न्यास द्वारा उठाए जा रहे कदमों को संज्ञान में लेते हुए पीठ ने तय किया कि अधिवक्ता वैभव शर्मा द्वारा दायर याचिका की अब और निगरानी की आवश्यकता नहीं है। शर्मा ने अपनी याचिका में मांग की थी कि कोरोना वायरस के मद्देनजर आर्थिक संकट से जूझ रहे न्यास के हर सदस्य को 25-25 हजार रुपये की अनुग्रह राशि दी जाए।
शर्मा की तरफ से पेश हुए वकील ने हालांकि न्यास द्वारा तय रकम को वकीलों की भारी संख्या देखते हुए अपर्याप्त करार दिया। इसके बाद अदालत ने न्यास ने कहा कि आर्थिक स्थिति अगर इजाजत दे तो न्यास इस रकम को बढ़ा भी सकता है।
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