मुंबई, नौ अक्टूबर महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को बंबई उच्च न्यायालय को सूचित किया कि मुंबई में लोकल ट्रेनों के फेरे बढ़ाने को लेकर उसे कोई आपत्ति नहीं है और सामाजिक दूरी के नियम का पालन करके और मास्क पहन कर आम जनता भी इन सेवाओं का इस्तेमाल कर सकती है।
अभी केवल उन्हीं लोगों को लोकल ट्रेनों में यात्रा करने की इजाजत है जो आवश्यक सेवाओं में काम कर रहे हैं। कोविड-19 महामारी के कारण लोकल ट्रेन सेवाओं का सीमित संचालन हो रहा है।
महाधिवक्ता आशुतोष कुम्भाकोनी ने शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जीएस कुलकर्णी की खंडपीठ को बताया कि ट्रेनों के फेरे बढ़ाने और सेवाओं को सभी के लिए खोलने पर राज्य सरकार को कोई आपत्ति नहीं है।
कुम्भाकोनी ने कहा, ‘‘कोरोना वायरस जाने वाला नहीं है, यहीं रहने वाला है। लोगों को सतर्क रहना होगा।’’
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इस हफ्ते की शुरुआत में पीठ ने कहा था कि लॉकडाउन के आंशिक रूप खुलने के साथ-साथ रेलवे सेवाओं में भी इजाफा होना चाहिए। उसने राज्य सरकार से कहा था कि वह रेलवे से सेंट्रल, हार्बर और वेस्टर्न लाइनों पर प्रतिदिन रेलगाड़ियों के फेरे बढ़ाने का अनुरोध करे।
कुम्भाकोनी ने शुक्रवार को अदालत को बताया कि सरकार रेलवे को पत्र लिखकर इस बारे में पहले ही अनुरोध कर चुकी है।
उन्होंने यह भी बताया कि यह प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया था जिसने इसे मंजूरी दे दी।
पीठ ने कहा था कि हर क्षेत्र अब खुल रहा है और ऐसे में लोकल ट्रेन की मांग भी बढ़ रही है इसलिए राज्य सरकार और रेलवे को मांग को देखते हुए फेरे बढ़ाने चाहिए।
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