नयी दिल्ली, सात सितंबर नीति आयोग देश में सुधारों को आगे बढ़ाने के लिये वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक की निगरानी प्रणाली का लाभ उठायेगा और इस संबंध में उसने एक समन्वय समिति का गठन किया है।
एक सरकारी विज्ञप्ति में सोमवार को कहा गया है कि 29 चुनींदा वैश्विक सूचकांक के मामले में देश के प्रदर्शन की निगरानी करने के लिये ‘‘वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) सरकार के निर्णय का हिस्सा है।
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इसमें कहा गया है कि सुधारों और वृद्धि को बढ़ाने के लिये वैश्विक सूचकांक को अपनाने का उद्देश्य विभिन्न महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक मानदडों के मामले में भारत के प्रदर्शन को मापना और उसकी निगरानी करना है। इसके साथ ही इन सूचकांकों का इस्तेमाल सरकारी नीतियों के अंतिम छोर के क्रियान्वयन में सुधार लाने के साथ ही नीतियों में सुधारों को बढ़ाने में सक्षम बनाना भी है।
देश में वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक के मामले में नीति आयोग नोडल एजेंसी है। उसने इसके लिये एक बहुआयामी गरीबी सूचकांक समन्वय समिति का गठन भी किया है।
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एमपीआई 107 विकासशील देशों में बहुआयामी गरीबी को मापने वाला एक अंतरराष्ट्रीय मानक है। इसे सबसे पहले आक्सफोर्ड पावर्टी एण्ड ह्यूमन डेवलपमेंट इनीसियेटिव और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने यूएनडीपी की मानव विकास रिपोर्ट के लिये 2010 में तैयार किया था।
विज्ञप्ति के मुताबिक यह सूचकांक संयुक्त राष्ट्र संघ के सतत विकास पर बने उच्चस्तरीय राजनीतिक मंच पर हर साल जुलाई में जारी किया जाता है।
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