नयी दिल्ली, 18 सितंबर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने असम के डिगबोई शहर में प्रस्तावित सालेकी संरक्षित वन क्षेत्र के तहत तिकाक परियोजना में खनन की अनुमति को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसले का जिम्मा गौहाटी उच्च न्यायालय पर छोड़ दिया ।
न्यायमूर्ति एस पी वांगडी और विशेषज्ञ सदस्य नगीन नंदा की पीठ ने कहा कि गौहाटी उच्च न्यायालय में कुछ याचिकाएं लंबित हैं जिनमें मौजूदा याचिका के मामले भी उठाए गए हैं।
असम की ओर से पेश अधिवक्ता नलिन कोहली ने बताया कि मामले में दो विभिन्न मंचों पर कार्यवाही चल रही है इसलिए मौजूदा सुनवाई बाद में की जा सकती है ।
पीठ ने कहा, ‘‘रिकॉर्ड पर रखे गए दस्तावेज पर गौर करते हुए और विभिन्न पक्षों की दलीलों के बाद हम कोहली से सहमति जताते हैं। ’’
पीठ ने कहा कि देहिंग पटकाई हाथी संरक्षित क्षेत्र, प्रस्तावित सालेकी वन क्षेत्र में कथित अवैध खनन गतिविधियों की छानबीन के लिए असम सरकार ने एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया था।
पीठ ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता के वकील संजय उपाध्याय ने दलील दी है कि अधिकरण में मौजूदा मामले की सुनवाई में कोई बाधा नहीं है, हमारी राय में यह ठीक नहीं होगा कि एक ही विषय पर दो अलग-अलग मंच सुनवाई करे। ’
एनजीटी ने पर्यावरण कार्यकर्ता प्रदीप भुइयां और जयदीप भुइयां की याचिका का निपटारा कर दिया । याचिका में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी कमेटी द्वारा प्रस्तावित सालेकी वन क्षेत्र से आरक्षित वन भूमि के 98.59 हेक्टेयर के इस्तेमाल की इजाजत को चुनौती दी गयी थी।
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