19 फरवरी की प्रमुख खबरें और अपडेट्स
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

भारत और दुनिया की अहम खबरें एक साथ, एक ही जगह पढ़ने के लिए आप सही पेज पर हैं. इस लाइव ब्लॉग को हम लगातार अपडेट कर रहे हैं, ताकि ताजा खबरें आप तक पहुंचा सकें.-सीरिया से अपने सैनिकों को वापस बुलाएगा अमेरिकाः रिपोर्ट

- एआई इम्पैक्ट समिट: मोदी ने पेश किया "मानव" विजन

-बिल गेट्स एआई इम्पैक्ट समिट में नहीं देंगे भाषण: गेट्स फाउंडेशन

-एआई का भविष्य कुछ अरबपतियों के फैसले पर निर्भर नहीं होना चाहिए: यूएन प्रमुख

-मार्शल लॉ लगाने वाले दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति को उम्र कैद की सजा

-अनिल अंबानी को ईडी का नया समन

-मुफ्त बिजली योजना पर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से पूछे सवाल

-सुप्रीम कोर्ट में सीएए के खिलाफ याचिकाओं पर 5 मई से सुनवाई होगी

यूरोपीय संघ ने ईरान के रेवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स को आतंकवादी संगठन घोषित किया

यूरोपीय संघ ने ईरान की इस्लामिक रेवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को औपचारिक तौर पर आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है. गुरुवार, 19 फरवरी को जारी एक प्रेस रिलीज में कहा गया है, "यूरोपीय संघ के आतंकवादरोधी प्रतिबंध तंत्र के तहत आईआरजीसी भी अब निषेधात्मक उपायों का सामना करेगी." इसके साथ ही यह भी कहा गया है, "इसमें इसके धन और दूसरी संपत्तियों या आर्थिक संसाधनों को यूरोपीय संघ के सदस्य देशों में जब्त करना और यूरोपीय संघ के ऑपरेटरों को इस समूह के लिए आर्थिक संसाधनों को मुहैया कराने से रोकना शामिल है."

यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों के बीच इस मुद्दे पर जनवरी में सहमति बन गई थी. आईआरजीसी पर यूरोपीय संघ ने पहले भी मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए प्रतिबंध लगाए हैं.

यूरोपीय संघ के कुछ मंत्रियों का कहना है कि ईरान में विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई के दौरान 30,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई. इसके बाद यूरोपीय संघ पर यह कदम उठाने के लिए दबाव काफी ज्यादा बढ़ गया. लंबे समय से फ्रांस इस कदम का विरोध कर रहा था, लेकिन उसने अपना विरोध हटा लिया है. जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है यह बहुत पहले से जरूरी हो गया था.

यूक्रेन के एयर डिफेंस के लिए स्वीडन 1.4 अरब डॉलर खर्च करेगा

स्वीडन ने गुरुवार को यूक्रेन के लिए 12.9 अरब क्रोनर (1.4 अरब डॉलर) की सैन्य सहायता की घोषणा कि है. इसका ज्यादातर हिस्सा यूक्रेन में एयर डिफेंस की क्षमता विकसित करने पर खर्च होगा.

स्वीडन के रक्षा मंत्री पाल जॉनसन ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा कि सैन्य सहायता पैकेज यूक्रेन को स्वीडन की तरफ से दिया तीसरा बड़ा पैकेज है. यह यूक्रेन की ओर से जताई गई जरूरतों के अनुरूप है.

इनमें से करीब 4.5 अरब क्रोनर की रकम यूक्रेन को एक उन्नत शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम मुहैया कराने पर खर्च होंगे. इनमें ट्राइडॉन एमके2 मोबाइल एंटी एयरक्राफ्ट आर्टिलरी सिस्टम के अतिरिक्त यूनिट भी होंगे जिसे देने की घोषणा स्वीडन ने फरवरी की शुरुआत में की थी.

जॉनसन का कहना है कि लक्ष्य यह है कि यूक्रेन को यह सिस्टम 24 महीने के भीतर दे दिया जाए. बाकी का धन बड़ी मात्रा में गोला बारूद पर खर्च होगा जिसमें लॉन्ग रेंज की तोपों के गोले, सैनिकों की ट्रेनिंग और साथ ही लॉन्ग रेंज के ड्रोन के लिए सहयोग की योजनाएं शामिल हैं. यह धन स्वीडन की तरफ से यूक्रेन को सालाना 40 अरब क्रोनर की सहायता का हिस्सा है.

कांच पर लेजर से दर्ज डाटा हजारों साल सुरक्षित रहेगा

अब से हजारों साल बाद क्या हमारे डिजिटल युग की जानकारियां बची रहेंगी? मानव की जानकारियां अब किताबों की लाइब्रेरी की बजाय हार्ड ड्राइव में रखी जा रही हैं. ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह जानकारियां आने वाले दशकों तक बची रहेंगी, सदियों की तो बात ही छोड़िए. बुधवार, 18 फरवरी को माइक्रोसॉफ्ट ने एक नई रिसर्च के आधार पर बताया है कि शीशे पर लेजर से लिखी जानकारियां डेटा को 10,000 हजार सालों तक सुरक्षित रखेंगी.

2019 से ही माइक्रोसॉफ्ट का सिलिका प्रोजेक्ट ग्लास की प्लेटों पर आंकड़े दर्ज करने की कोशिश कर रहा है. ठीक वैसे ही जैसे फोटोग्राफी के शुरुआती दिनों में निगेटिव्स को ग्लास में सुरक्षित रखा जाता था.

इस तंत्र में सिलिका ग्लास का इस्तेमाल होता है जो तापमान में बदलाव, नमी और विद्युत चुंबकीय दखलंदाजी से सुरक्षित है. भरपूर ऊर्जा इस्तेमाल करने वाले डेटा सेंटरों के लिए यह एक बड़ी समस्या है क्योंकि वे तेजी से खत्म होने वाले हार्ड ड्राइव और मैग्नेटिक टेप का इस्तेमाल करते हैं. जिन्हें हर कुछ साल पर बैकअप लेना पड़ता है.

नेचर जर्नल में माइक्रोसॉफ्ट के रिसर्च विंग ने कहा है कि सिलिका पहली ग्लास स्टोरेज टेक्नोलॉजी है जिसने लिखने, पढ़ने और डेटा को डिकोड करने का भरोसेमंद जरिया दिखाया है. हालांकि इस रिसर्च में शामिल नहीं रहे विशेषज्ञों का कहना है कि इस नई तकनीक के सामने अभी कई और चुनौतियां हैं.

सुंदरबन में तेज कटाव पर एनजीटी की सख्ती, घोरमारा द्वीप बचाने का आदेश

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सुंदरबन में तेजी से हो रहे तटीय कटाव, खासकर पश्चिम बंगाल के घोरमारा द्वीप के सिकुड़ने पर गंभीर चिंता जताई है. एक समाचार रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि 2042 तक घोरमारा का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा खत्म हो सकता है. इस रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए, ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट कहा कि तात्कालिक और टुकड़ों में किए जाने वाले उपाय इस गंभीर पर्यावरणीय संकट का समाधान नहीं हैं.

सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने बताया कि गंगा डेल्टा क्षेत्र प्राकृतिक भौगोलिक बदलावों, समुद्र-स्तर में वृद्धि, बार-बार आने वाले चक्रवातों और ऊपरी इलाकों में बांधों के कारण गाद की कमी जैसी वजहों से भारी कटाव झेल रहा है. जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार 1969 से 2019 के बीच भारतीय सुंदरबन में 250 वर्ग किलोमीटर से अधिक भूमि समुद्र में समा चुकी है, जबकि घोरमारा द्वीप का क्षेत्रफल इसी अवधि में 8.59 वर्ग किमी से घटकर 3.83 वर्ग किमी रह गया है.

एनजीटी ने पाया कि राज्य प्राधिकरणों ने तटबंध मरम्मत और कटाव रोकने जैसे कार्यों जैसे कदमों की जानकारी तो दी, लेकिन दीर्घकालिक और व्यापक संरक्षण योजना अभी तक पेश नहीं की गई है. इसके मद्देनजर ट्रिब्यूनल ने वन महानिदेशक (भुवनेश्वर क्षेत्रीय कार्यालय) और पश्चिम बंगाल के प्रधान मुख्य वन संरक्षक की संयुक्त समिति गठित की है, जिसे मैंग्रोव संरक्षण, कटाव-नियंत्रण, विस्तृत कार्ययोजना, अनुमानित लागत, एजेंसियों की जिम्मेदारी और समयसीमा तय करके तीन महीने में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई 28 मई 2026 को होगी.

स्वीडन ने किशोरों के लिए जेल के नए नियम बनाए

स्वीडन ने गुरुवार, 18 फरवरी को किशोरों के लिए जेल में रखने के नए नियमों की घोषणा की है. यह उन किशोरों के लिए है जिनकी उम्र 13 साल तक है और जिन पर गंभीर अपराध का दोष साबित हुआ है. स्वीडन के बाल न्याय तंत्र की बड़ी आलोचना होती रही है, अब इनमें सुधार किया गया है और नए नियम इसी साल जुलाई से लागू होंगे.

स्वीडन में अल्पमत की दक्षिणपंथी सरकार है, जिसे धुर दक्षिणपंथधी पार्टी स्वीडन डेमोक्रैट्स सहयोग दे रही है. सरकार ने बढ़ते अपराध पर लगाम कसने के लिए कुछ उपायों की घोषणा की है. जनवरी में उसने कहा कि अपराध की जिम्मेदारी के लिए उम्र की सीमा को 15 साल से घटा कर 13 साल किया जाएगा. सरकार ने 126 विभागों से इस बारे में सलाह मांगी थी उनमें से ज्यादातर ने इसका विरोध किया यहां तक कि पुलिस और जेल विभाग ने भी. हालांकि सरकार अपनी योजनाओं को आगे बढ़ा रही है.

स्कैंडिनेवियाई देश स्वीडन बीते एक दशक से ज्यादा समय से संगठित हिंसक अपराधों को बढ़ने से रोकने के लिए जूझ रहा है. इनका मुख्य रूप से संबंध प्रतिद्वंद्वी गुटों की नशीली दवाओं के बाजार पर नियंत्रण के लिए आपसी होड़ से है. इन नेटवर्कों में 15 साल से कम उम्र के किशोरों की भर्ती बढ़ती जा रही है. उन्हें बम धमाकों और गोलीबारी में इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि वे पकड़े भी गए तो उन्हें जेल में नहीं डाला जाएगा.

स्वीडन की आठ मौजूदा जेलों को बच्चों के लिए खास सेक्शन बनाने के निर्देश दिए गए हैं. इनमें से तीन 1 जुलाई से शुरू हो जाएंगे. सुधारों के लागू होने की भी यही तारीख है.

अफगानिस्तान में भुखमरी का सबसे बड़ा संकट, लाखों बच्चों की जिंदगी खतरे में

अफगानिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे भयावह पोषण संकट से गुजर रहा है. काबुल के अस्पतालों में कुपोषित बच्चों की भरमार है, जहां जीवन बचाने के लिए जगह और संसाधन कम पड़ रहे हैं.

संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के मुताबिक देश के दो-तिहाई हिस्से में गंभीर या संकट के स्तर की कुपोषण स्थिति है और लगभग 40 लाख बच्चों की जान खतरे में है.

2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद अंतरराष्ट्रीय सहायता लगभग बंद हो गई, जिससे गरीबी और भूख तेजी से बढ़ी है. आर्थिक संकट, सूखा, 2025 के दो बड़े भूकंप और पड़ोसी देशों से लौट रहे लाखों शरणार्थियों ने हालात और बिगाड़ दिए. फंडिंग की भारी कमी के कारण डब्ल्यूएफपी अब चार में से तीन कुपोषित बच्चों को इलाज देने में असमर्थ है. संगठन का कहना है कि 2024 में जहां 60 करोड़ डॉलर का फंड मिला था, वहीं 2026 के लिए यह घटकर सिर्फ लगभग 20 करोड़ डॉलर रह गया है.

देश में भूख का सबसे बड़ा असर महिलाओं पर पड़ा है, खासकर उन पर जिन्हें तालिबान सरकार की पाबंदियों के कारण रोजगार से बाहर कर दिया गया है. डब्ल्यूएफपी के अनुसार कुपोषित गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं की संख्या में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने तुरंत सहायता बहाल नहीं की, तो आने वाले महीनों में मौतों का आंकड़ा और भी तेजी से बढ़ सकता है.

सुप्रीम कोर्ट में सीएए के खिलाफ याचिकाओं पर 5 मई से सुनवाई होगी

सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर नई सुनवाई तारीख तय कर दी है. कोर्ट ने कहा है कि 5 मई 2026 से इन याचिकाओं पर सुनवाई शुरू होगी. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि असम और त्रिपुरा से जुड़े मामलों को छोड़कर देश के बाकी सभी मामलों की सुनवाई पहले होगी. असम और त्रिपुरा के मामलों पर अलग से सुनवाई की जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट में सीएए के खिलाफ कुल 237 याचिकाएं लंबित हैं. इनमें कहा गया है कि यह कानून धार्मिक आधार पर भेदभाव करता है और खासकर मुस्लिम समुदाय के साथ अन्याय करता है. याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार को यह कानून लागू नहीं करना चाहिए था. 11 मार्च 2024 को केंद्र सरकार ने सीएए के नियम अधिसूचित किए थे, जिसके बाद कुछ नई याचिकाएं भी दाखिल हुई हैं.

यह कानून 2019 में संसद से पारित हुआ था, जिसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है. विपक्ष और कई संगठनों ने इसे संविधान के खिलाफ और भेदभावपूर्ण बताया है. मामला लंबे समय से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और इस पर अंतिम फैसला अभी बाकी है.

आई-पैक रेड: ईडी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा हमें आतंकित किया गया

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को पश्चिम बंगाल सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली. राज्य सरकार की यह टिप्पणी कि "एजेंसी को हथियार बनाया गया है" पर प्रतिक्रिया देते हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि "एजेंसी हथियार नहीं, बल्कि आतंकित की जा रही है." मामला ईडी द्वारा कोलकाता स्थित आईपैक कार्यालय में की गई तलाशी के दौरान कथित बाधा डालने को लेकर दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और वरिष्ठ अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है.

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि ईडी अपना हलफनामा दाखिल करेगी और बाद में विस्तृत संवैधानिक मुद्दों पर दलीलें देगी. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि राज्य की ओर से याचिका की मैंटेनबिलिटी पर सवाल उठाए जाएंगे, जिस पर वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा और अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इस मुद्दे पर पूर्ण सुनवाई होगी. मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च के लिए तय की गई है.

पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी प्रतिक्रिया में ईडी की याचिका को अनुच्छेद 32 के तहत अस्वीकार्य बताया है. उनका कहना है कि यह याचिका मूलभूत अधिकारों के उल्लंघन से नहीं जुड़ी और ईडी ने पीएमएलए के तहत उपलब्ध वैकल्पिक उपायों का इस्तेमाल नहीं किया.

पढ़ें रिपोर्ट: आई-पैक के दफ्तर में ईडी की छापेमारी से पश्चिम बंगाल की सियासत गरमाई

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद "घूसखोर पंडत" विवाद पर विराम

पोस्टर रिलीज के साथ विवादों में घिरी फिल्म "घूसखोर पंडत" मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केस का निपटारा कर दिया है. अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि फिल्म को लेकर कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं होगी और न ही किसी याचिका पर सुनवाई होगी. गुरुवार, 19 फरवरी को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म मेकर्स को बड़ी राहत दी. सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए निर्देश जारी किया है कि अब "घूसखोर पंडत" से जुड़े विवाद को बंद किया जाना चाहिए. इसके साथ ही अदालत ने किसी नई याचिका पर भी सुनवाई से इनकार किया.

इसके साथ ही फिल्म मेकर्स ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा भी दायर किया है, जिसमें कहा गया है कि फिल्म मेकर्स और प्रोडक्शन हाउस का किसी धर्म, जाति या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं था. फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है, जो एक अपराध की जांच पर आधारित है. फिल्म में किसी भी जाति, धर्म, समुदाय या संप्रदाय को भ्रष्ट नहीं दिखाया गया है.

हफलनामें में दावा किया गया कि फिल्म का पुराना नाम "घूसखोर पंडत" वापस ले लिया गया है और नया नाम अभी तय नहीं हुआ है. साथ ही सभी प्रचार सामग्री, पोस्टर और ट्रेलर वापस ले लिए गए हैं.

इससे पहले मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म मेकर्स को कड़ी फटकार लगाई थी और अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी वर्ग को निशाना बनाने पर लताड़ा भी था.

विवाद को लेकर फिल्म स्टार्स और मेकर्स दोनों सोशल मीडिया पर सफाई भी दे चुके हैं. अभिनेता मनोज वाजपेयी ने भी कहा था कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं, बल्कि सिर्फ मनोरंजन करना है.

ब्रिटेन में एंड्रयू माउंटबेटेन विंडसर गिरफ्तार

ब्रिटेन की पुलिस ने एंड्रयू माउंटमबेटेन विंडसर को गिरफ्तार कर लिया है. विंडसर ब्रिटेन के वर्तमान किंग चार्ल्स के भाई और पूर्व प्रिंस हैं. उन पर सार्वजनिक पद का दुरुपयोग करने के आरोप हैं. समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक ब्रिटेन की थेम्स वैली पुलिस ने यह जानकारी दी है. थेम्स वैली पुलिस के कार्यक्षेत्र में पश्चिमी लंदन का इलाका है. जिसमें माउंटबेटेन विंडसर का पुराना घर भी शामिल है. पुलिस का कहना है कि वह उन खबरों की पड़ताल कर रही है जिनमें कहा गया है कि पूर्व प्रिंस एंड्रयू ने यौन अपराधी जेफ्री एप्सटीन को 2010 में कारोबारी रिपोर्ट भेजी थी.

यौन अपराधों के दोषी करार दिए गए जेफ्री एप्सटीन से जुड़े हजारों दस्तावेज अमेरिका में सार्वजनिक किए जा रहे हैं. इन दस्तावेजों ने कई प्रमुख हस्तियों के एप्सटीन से संबंध होने की जानकारी दी है.

ब्रिटेन के कानून के मुताबिक पुलिस ने उनका नाम नहीं बताया. हालांकि यह जरूर कहा है कि उन्होने एक शख्स को गिरफ्तार किया है जिसकी उम्र 60 साल से ज्यादा है. एंड्रयू माउंटबेटेन की उम्र 66 साल है. गिरफ्तारी की खबरें तब आई जब नॉरफोक के सांडरिंघम इस्टेट में वुड फार्म के बाहर पुलिस की गाड़ियां नजर आईं. वहां सादे कपड़ों में पुलिस अधिकारियों की तस्वीरें भी दिखीं.

पुलिस ने बयान जारी कर कहा है कि वह इस मामले की संवेदनशीलता और लोगों के हितों को समझती है और उचित समय पर इस खबर का अपडेट दिया जाएगा.

पाकिस्तान: गैस सिलेंडर ब्लास्ट में कम से कम 16 की मौत

पाकिस्तान के कराची में गुरुवार, 19 फरवरी एक आवासीय इमारत में गैस सिलेंडर विस्फोट के बाद इमारत ढह गई, जिसमें कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई. कई दूसरे लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है. विस्फोट उस समय हुआ जब लोग रमजान के पहले रोजे से पहले सेहरी की तैयारी कर रहे थे. अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं.

हादसे के बाद रेस्क्यू टीम ने भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया, जबकि आसपास की संकरी गलियों और अव्यवस्थित ढांचे के कारण बचाव अभियान धीमा पड़ गया. अब तक कम से कम 14 घायलों को शहर के एक बड़े अस्पताल में भर्ती कराया गया है. अधिकारियों का कहना है कि अभी भी कई लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं.

मुफ्त बिजली योजना पर सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से पूछे सवाल

भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार, 19 फरवरी को तमिलनाडु बिजली बोर्ड को उपभोक्ताओं को बिना वित्तीय स्थिति देखे मुफ्त बिजली देने के वादे पर कड़ी फटकार लगाई. अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार और दूसरे पक्षों को नोटिस जारी किया, जो डीएमके सरकार की उस याचिका से जुड़ा है जिसमें राज्यभर में मुफ्त बिजली देने का प्रस्ताव रखा गया था.

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्याकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि राज्यों और राजनीतिक दलों द्वारा अपनाई जा रही “फ्रीबी कल्चर” देश की आर्थिक विकास प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है. अदालत ने कहा कि अधिकांश राज्य पहले से ही राजस्व घाटे में हैं, लेकिन फिर भी बड़े पैमाने पर मुफ्त योजनाओं की घोषणा करते रहते हैं, जिससे योजनाबद्ध विकास प्रभावित होता है.

चीफ ने उदाहरण देते हुए कहा कि कई राज्यों में बड़े जमींदारों तक को मुफ्त बिजली मिलती है. उन्होंने सवाल किया, "आखिर इसके लिए पैसा देगा कौन? यह करदाताओं का पैसा है." अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि चुनावों से ठीक पहले ऐसी कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा चिंताजनक प्रवृत्ति बन चुकी है और इस पर राजनीतिक दलों व समाजशास्त्रियों को गंभीरता से विचार करने की जरूरत है.

ईरान में गिरफ्तार ब्रिटिश जोड़े को 10 साल कैद की सजा

ब्रिटेन के लिंडसे और क्रेग फोरमैन मोटरसाइकिल से दुनिया घूमने निकले थे. जनवरी 2025 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. अब उनके परिवार ने बताया है कि इस जोड़े को जासूसी के आरोप में ईरान ने 10 साल की सजा सुनाई है. दोनों की उम्र 50 साल से ऊपर है. इन दोनों ने जासूसी के आरोपों से इनकार किया है.

उनके परिवार का कहना है कि पिछले साल अक्टूबर में उनकी अदालत में पेशी हुई थी. यह सुनवाई तीन घंटे चली लेकिन उसमें उन लोगों को अपनी सफाई पेश करने का कोई मौका नहीं दिया गया. उनके बेटे जो बेनेट ने एक बयान जारी कर कहा है, "उन्होंने लगातार आरोपों से इनकार किया है. हमने जासूसी के आरोपों को साबित करने वाला कोई सबूत नहीं देखा."

ब्रिटेन की विदेश मंत्री इवेट कूपर ने इस सजा की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें, "पूरी तरह डरावना और न्यायोचित नहीं" करार दिया है. कूपर ने एक बयान जारी कर कहा है कि सरकार इस मामले को ईरानी सरकार के साथ बिना रुके उठाती रहेगी जब तक कि क्रेग ओर लिंडसे फोरमैन सुरक्षित यूके नहीं लौट आते और अपने परिवार से नहीं मिलते.

तनाव के दौर में डरावनी कॉमिक्स खूब बिक रही हैं

आज के दौर में भी डर बिकता है. फिल्म, टीवी और वीडियो गेम की दुनिया को अभिभूत करने वाला डर कॉमिक्स की दुनिया में भी धूम मचा रहा है. न्यूयॉर्क में रहने वाले टिनियन फोर की लिखी कॉमिक सीरिज "समथिंग इस किलिंग द चिल्ड्रन" सीरिज की 50 लाख से ज्यादा कॉपियां बिकी हैं. यह कॉमिक्स पहली बार 2019 में पेश की गई थी. इसी तरह "द हाउस ऑन द लेक" और "द डिपार्टमेंट ऑफ ट्रुथ" की सफलता ने टिनियन को अमेरिका के कॉमिक्स क्रिएटरों की दुनिया में सबसे ज्यादा बिकने वाला नाम बना दिया है. इन कहानियों में इंसानों के जिंदा रहने और कॉन्सपिरैसी थ्योरीज की बातें हैं.

टिनियन ने समाचार एजेंसी एएफपी को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "भय आपको उन चीजों की बात करने का मौका देता है जिनसे समाज को डर लगता है, या फिर आप खुद जिन चीजों से डरते हैं, और आप उनके सभी चरम बिंदुओं को मिलाते हैं." उनका कहना है कि नेटफ्लिक्स की स्ट्रेंजर थिंग्स से लेकर रेजिडेंट एविल जैसे वीडियो गेम एक तरह से प्रेशर वॉल्व की तरह काम करते हैं. साथ ही वे वास्तविक जीवन के डर को थोड़ा कम करते हैं.

टिनियन ने यह भी कहा, "जब दुनिया ज्यादा डरावनी हो तो भय का जॉनर अच्छा काम करता है."

भय और अपराध से जुड़े कॉमिक्स विश्वयुद्ध के बाद 1950 के दशक में खूब पसंद किए गए. इससे राजनेता परेशान हुए. इसकी वजह से अमेरिका में प्रकाशक कॉमिक्स कोड अथॉरिटी पर सहमत हुए जिसने इस जॉनर को 1970 और 80 के दशक तक प्रतिबंधित कर दिया था.

ट्रंप के विवादित बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक वॉशिंगटन में

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक गुरुवार, 19 फरवरी को वॉशिंगटन में हो रही है. इसमें गाजा पट्टी पर चर्चा होगी.

डॉनल्ड ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि वह तटवर्ती इलाके में मानवीय सहायता और पुनर्निर्माण के लिए कई अरब डॉलर का पैकेज पेश करेंगे. फलस्तीनी इस्लामी गुट हमास और इस्राएल की जंग में इस इलाके में भारी तबाही हुई है.

ट्रंप इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (आईएसएफ) पर भी अपनी बात रखना चाहते हैं. आईएसएफ इस इलाके मे व्यवस्था बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय शांति सैनिकों का दस्ता है.

दोनों पक्षों के बीच संघर्षविराम के बाद इस्राएल ने तटवर्ती इलाके के करीब आधे हिस्से पर नियंत्रण कर रखा है जबकि बाकी बचा हिस्सा हमास के नियंत्रण में है. ट्रंप की शांति योजना ने हमास से हथियार डालने को कहा है हालांकि मिलिशिया इसके लिए तैयार नहीं है.

ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस की घोषणा दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में की थी. वह इसके चेयरमैन है. इस परिषद का लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का समाधान निकालना है. हालांकि पहले इसे सिर्फ गाजा की शांति प्रक्रिया पर नजर रखने वाली परिषद समझा गया था. आलोचक इस बोर्ड को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिद्वंद्वी के तौर पर देखते हैं. ट्रंप संयुक्त राष्ट्र की लगातार आलोचना करते रहे हैं.

जर्मनी और फ्रांस समेत कई यूरोपीय देशों ने इस बोर्ड का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया है. बोर्ड के करीब दो दर्जन सदस्यों में हंगरी, इस्राएल, बेलारूस, कतर, सऊदी अरब और तुर्की जैसे देश शामिल हैं. पहली बैठक में 20 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधियों के पहुंचने की उम्मीद है.