भारत सरकार ने देश में अवैध ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए अभियान तेज कर दिया है. साल 2026 की शुरुआत में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने 'सट्टा किंग श्री गणेश' जैसे अवैध प्लेटफॉर्म्स से जुड़े सैकड़ों वेब लिंक को ब्लॉक कर दिया है. यह कार्रवाई 'प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट 2025' के लागू होने के बाद की गई है, जिसका उद्देश्य युवाओं को वित्तीय धोखाधड़ी और जुए की लत से बचाना है.
डिजिटल स्ट्राइक: 7,800 से अधिक साइट्स ब्लॉक
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक कुल 7,800 से अधिक अवैध सट्टेबाजी और जुए की वेबसाइटों को प्रतिबंधित किया जा चुका है. जनवरी 2026 में ही 242 नए लिंक ब्लॉक किए गए हैं. 'सट्टा किंग श्री गणेश' जैसे प्लेटफॉर्म अक्सर अपने डोमेन बदलकर दोबारा सक्रिय होने की कोशिश करते हैं, लेकिन सरकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी तंत्र का उपयोग कर इन्हें रियल-टाइम में ट्रैक कर रही है.
सख्त सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान
नए कानून के तहत ऑनलाइन सट्टेबाजी को एक गंभीर अपराध माना गया है. इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
जेल की सजा: अवैध गेमिंग प्लेटफॉर्म चलाने या उन्हें बढ़ावा देने वालों को 3 से 5 साल तक की जेल हो सकती है.
आर्थिक दंड: संचालकों पर 1 करोड़ रुपये से लेकर 2 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
प्रचार पर रोक: सेलिब्रिटीज या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स द्वारा इन ऐप्स का विज्ञापन करना अब कानूनी जुर्म है, जिसके लिए उन पर भारी जुर्माना तय किया गया है.
उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षा चेतावनी
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि 'श्री गणेश सट्टा' जैसी साइट्स पर 'लीक जोड़ी' या 'निश्चित जीत' के नाम पर लोगों को ठगा जाता है. ये प्लेटफॉर्म अक्सर 'म्यूल अकाउंट्स' (दूसरों के नाम पर खुले बैंक खाते) का उपयोग करके पैसे को विदेशों में भेज देते हैं, जिससे पीड़ित का पैसा वापस मिलना नामुमकिन हो जाता है. इसके अलावा, इन असुरक्षित वेबसाइटों का उपयोग करने से मोबाइल और कंप्यूटर का डेटा चोरी होने का खतरा भी रहता है.
ई-स्पोर्ट्स और जुए के बीच स्पष्ट अंतर
सरकार ने नए नियमों में 'स्किल-बेस्ड गेम' (जैसे ई-स्पोर्ट्स) और 'चांस-बेस्ड गेम' (जैसे सट्टा किंग) के बीच स्पष्ट रेखा खींच दी है. जहां ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने की योजना है, वहीं श्री गणेश सट्टा जैसे खेल, जो पूरी तरह भाग्य पर आधारित हैं, अब भारतीय कानून के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित हैं. बैंकिंग संस्थानों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे किसी भी प्लेटफॉर्म से जुड़े वित्तीय लेनदेन को तुरंत रोक दें.













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