नयी दिल्ली, पांच दिसंबर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)की परिकल्पना यह सुनिश्चित करने के लिए की गई थी कि देश के युवा 21वीं सदी की दुनिया में अपना सही स्थान हासिल कर सकें।
मुर्मू ने राष्ट्रीय राजधानी में श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के पहले दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए यह बयान दिया।
उन्होंने कहा,''एनईपी (राष्ट्रीय शिक्षा नीति) की परिकल्पना है कि हमारे युवा भारतीय परंपराओं में विश्वास रखते हुए 21वीं सदी की दुनिया में अपना सही स्थान बनाएं। हमारे देश में नैतिकता, धार्मिक आचरण, परोपकार और सर्व-मंगल जैसे जीवन मूल्यों के आधार पर प्रगति हो केवल तभी शिक्षा सार्थक मानी जाती है।''
राष्ट्रपति ने कहा कि जो लोग हमेशा दूसरों की भलाई में लगे रहते हैं उनके लिए इस दुनिया में कुछ भी हासिल करना मुश्किल नहीं है।
उन्होंने कहा, "मूर्ख लोग दूसरों की सलाह पर कुछ अपनाते हैं या अस्वीकार करते हैं।''
मुर्मू ने छात्रों को सलाह दी कि जो कुछ भी "हमारी परंपराओं में वैज्ञानिक और उपयोगी है" उसे स्वीकार किया जाना चाहिए और जो रूढ़िवादी, अन्यायपूर्ण और बेकार है उसे अस्वीकार कर दिया जाना चाहिए। विवेक को हमेशा जागृत रखना चाहिए।
उन्होंने श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से छात्राओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए अधिक अवसर प्रदान करने का आग्रह किया। राष्ट्रपति ने कहा कि संस्कृत भारतीय संस्कृति की पहचान और वाहक होने के साथ हमारे देश की प्रगति का आधार भी रही है।
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