नयी दिल्ली, 26 अक्टूबर केंद्र सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि सुदर्शन टीवी को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के मामले में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय आदेश के साथ तैयार है।
सुदर्शन टीवी को यह नोटिस अंतर मंत्रालयी समूह की सिफारिश पर जारी किया गया था, जिसने चैनल के ‘बिंदास बोल’ कार्यक्रम की सभी कड़ियों को देखा था।
सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ को सूचित किया कि मंत्रालय का आदेश कल तक पेश किया जाएगा, जिसके बाद असंतुष्ट लोग इसे चुनौती दे सकते हैं।
मेहता की दलीलों को सुनने के बाद शीर्ष अदालत ने मामले में सुनवाई 19 नवंबर तक स्थगित कर दी।
शीर्ष अदालत उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें चैनल के ‘बिंदास बोल’ कार्यक्रम को लेकर शिकायत की गई थी। कार्यक्रम के प्रोमो में दावा किया गया था कि चैनल ‘सरकारी सेवा में मुस्लिमों की घुसपैठ की बड़ी साजिश का खुलासा करेगा।’
सॉलिसीटर जनरल ने पीठ को सूचित किया था कि अंतर-मंत्रालयी समूह ने चैनल के प्रतिनिधियों का पक्ष सुना है। इससे पहले 23 सितंबर को केंद्र ने शीर्ष अदालत को सूचित किया था कि प्रथम दृष्टया सुदर्शन चैनल के ‘बिंदास बोल’ शो ने कार्यक्रम संहिता का उल्लंघन किया है और चैनल को नोटिस जारी किया गया है।
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