अहमदाबाद, 10 जुलाई गुजरात उच्च न्यायालय ने दिल्ली के उप राज्यपाल वी के सक्सेना को प्रदान की गई अंतरिम राहत उनकी उस अर्जी का अंतिम निस्तारण होने तक बढ़ा दी जिसमें उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर पर हमले से संबंधित मामले में सुनवायी उनके (सक्सेना) उपराज्यपाल पद पर बने रहने तक स्थगित रखने का अनुरोध किया था।
सोमवार को न्यायमूर्ति समीर दवे की अदालत ने याचिका के अंतिम निस्तारण होने तक सक्सेना के खिलाफ आपराधिक मुकदमे पर रोक लगा दी और केंद्र को मुकदमे में एक पक्षकार के तौर पर शामिल किया। मामले में अगली सुनवायी 29 अगस्त को होगी।
मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पी सी गोस्वामी की अदालत ने गत 8 मई को सक्सेना के खिलाफ उस मामले में सुनवायी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था जिसमें सक्सेना और तीन अन्य लोगों पर नर्मदा बचाओ आंदोलन की कार्यकर्ता मेधा पाटकर पर 10 अप्रैल 2002 को गांधी आश्रम में एक शांति बैठक के दौरान हमला करने का आरोप है।
सोमवार को सुनवाई के दौरान पाटकर ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली सक्सेना की याचिका का विरोध किया। उनके वकील आनंद याग्निक ने कहा कि लोक अभियोजक ने सक्सेना की याचिका का समर्थन किया है, ऐसे में सरकार को एक विस्तृत हलफनामा दायर करने की आवश्यकता है क्योंकि मामला गंभीर है और इससे संविधान की व्याख्या जुड़ी हुई है।
सक्सेना के वकील जल उनवाला ने अदालत के समक्ष कहा कि मुकदमे को स्थगित करने के अनुरोध वाली सक्सेना की याचिका को खारिज करते हुए मेट्रोपोलिटन अदालत ने अपने आदेश में इस मुद्दे पर बात नहीं की कि क्या उपराज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत छूट दी जा सकती है।
सक्सेना ने अपनी याचिका में, दलील दी कि निचली अदालत ने एक गलत टिप्पणी की कि यदि उन्हें संरक्षण प्रदान किया गया तो गवाहों से जिरह नए सिरे से करनी होगी, जिससे मुकदमे में देरी होगी।
उन्होंने कहा कि मेट्रोपॉलिटन अदालत की टिप्पणी इस तथ्य के मद्देनजर गलत है कि अगर मुकदमा समाप्त भी हो जाता है, तो भी अदालत भारत के संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत संरक्षण के मद्देनजर उन्हें हिरासत में भेजने की स्थिति में नहीं होगी।
मामले के विवरण के अनुसार, लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर पाटकर पर उस समय हमला किया था जब वह 2002 के गुजरात दंगों के बाद आयोजित एक शांति बैठक में शामिल थीं।
पाटकर की शिकायत पर साबरमती थाने में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एक मामला दर्ज किया गया था। मामले की सुनवाई यहां एक मेट्रोपोलिटन अदालत में चल रही है।
अन्य आरोपियों एलिसब्रिज विधायक अमित शाह, वेजलपुर विधायक अमित ठाकेर और कांग्रेस नेता रोहित पटेल से जिरह पूरी हो चुकी है। जब सक्सेना की बारी आई, तो उनके वकील ने संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत छूट के आधार पर उनके खिलाफ मुकदमे को स्थगित करने की मांग करते हुए एक आवेदन दायर किया था।
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