नयी दिल्ली, 17 सितंबर कांग्रेस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने कृषि उपज एवं कीमत आश्वासन संबंधी विधेयकों को ‘किसान विरोधी’ करार देते हुए बृहस्पतिवार को लोकसभा में आरोप लगाया कि इन विधेयकों से जमाखोरी, कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा तथा उद्योगपतियों एवं बिचौलियों को फायदा होगा जबकि किसान बर्बाद हो जाएंगे।
वहीं, भाजपा ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत, स्वावलंबी भारत बनाने के लिए यह कानून बन रहा है जो ऐतिहासिक साबित होगा। ये विधेयक कृषि क्षेत्र में सुधार के लिये महत्वपूर्ण कदम हैं जो किसानों को मजबूत और समृद्ध बनाएंगे।
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कांग्रेस के सांसद रवनीत सिंह बिट्टू ने लोकसभा में कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए यह आरोप भी लगाया कि बड़े बहुमत के साथ सत्ता में आई सरकार किसानों को भूल गई है।
उन्होंने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म दिन है और ऐसे मौके पर किसानों के लिए काला कानून लाया जा रहा है। इससे किसानों को बख्श देना चाहिए।
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बिट्टू ने कहा कि कोरोना वायरस संकट के कारण सबकुछ बंद था और प्रधानमंत्री मोदी ने सबको राशन देने का ऐलान किया था। उन्होंने कहा कि पंजाब के गोदामों से पूरे देशों में अनाज का बड़ा हिस्सा जा रहा है। अगर ये गोदाम खाली हो जाएंगे तो 80 करोड़ लोगों को अनाज कहां से देंगे?
बिट्टू ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘ आपका सहयोगी शिरोमणि अकाली दल भी आपके खिलाफ बोला। अब तो जाग जाओ।’’
उन्होंने कहा कि पंजाब, हरियाणा और कई दूसरे राज्यों में किसान सड़कों पर हैं। ऐसा लगता है कि इतना बड़ा बहुमत मिलने से यह सरकार किसानों को भूल गई और ’किसान विरोधी विधेयक’ लेकर आई है।
भाजपा के वीरेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर किसानों की समृद्धि वाले इन विधेयक को लाया गया है। यह किसानों को मजबूत बनाने के लिए बहुत बड़ा कदम है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आजादी के बाद यह पहली सरकार है जिसने किसानों की समृद्धि के लिए चिंता की है।
सिंह ने विधेयक पर विपक्ष के कुछ सदस्यों की चिंताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि मैं कहना चाहता हूं कि किसान कभी गुलाम नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक भाजपा के घोषणा पत्र का हिस्सा था। भाजपा ने अनुच्छेद 370 को समाप्त करने और राम मंदिर निर्माण के अपने घोषणा पत्र के वादों को पूरा किया है, उसी तरह किसानों को समृद्ध बनाने का वादा भी पूरा किया जा रहा है।
उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अगर ‘‘ हम (सरकार) किसान और मजदूर विरोधी होते तो किसानों को सालाना छह हजार रुपये कैसे देते?’’
सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत, स्वावलंबी भारत बनाने के लिए यह कानून बन रहा है जो ऐतिहासिक साबित होगा।
तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह किसान विरोधी है। इसके कारण गरीब और कम पढ़े-लिखे किसानों को मजबूत पक्षों की शर्तों को मानने को विवश होना पड़ेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि इससे जमाखोरी, कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा तथा उद्योगपतियों एवं बिचौलियों को फायदा होगा। राज्य के पास अधिकार नहीं रह जायेगा। इससे आम लोग प्रभावित होंगे क्योंकि कीमतों में इजाफा होगा।
बनर्जी ने कहा कि इसके कारण अनुबंध की शर्तें पूरा नहीं होने की स्थिति में मुकदमों की संख्या बढ़ेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरे कृषि क्षेत्र का निजीकरण करने का प्रयास है।
जारी दीपक वैभव हक
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