देश की खबरें | केजी बेसिन मीथेन ईंधन का उत्कृष्ट स्रोत : अध्ययन
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 12 सितंबर केंद्र सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत काम करने वाले आगरकर अनुसंधान संस्थान (एआरआई) द्वारा किये गए एक अध्ययन के मुताबिक कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन में मीथेन हाइड्रेट का विशाल भंडार है जो स्वच्छ ईंधन का स्त्रोत है।

‘मरीन जीनोमिक्स’ नाम के जर्नल में प्रकाशन के लिये स्वीकार किया गया यह अध्ययन कहता है कि मीथेन एक स्वच्छ और कम लागत वाला ईंधन है और ऐसा आकलन है कि “एक घन मीटर मीथेन हाइड्रेट में 160-180 घन मीटर मीथेन होती है।”

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पुणे स्थित एआरआई द्वारा किये गए अध्ययन के मुताबिक, “केजी बेसिन में मीथेन हाइड्रेट्स में मौजूद मीथेन का कम से कम आकलन भी करें तो यह दुनिया में मौजूद कुल जीवाश्म ईंधन का दोगुना है।”

मीथेन के जलने की स्वच्छ प्रक्रिया इसे बेहद आकर्षक ईंधन बनाती है। ऑक्सीजन की मौजूदगी में जलाने पर इसका एक अणु पानी के दो अणु और कॉर्बन डाई ऑक्साइड का एक अणु छोड़ता है।

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केजी बेसिन को हाइड्रोकार्बन के समृद्ध स्त्रोत के तौर पर जाना जाता है।

यह अध्ययन डीएसटी-एसईआरबी (विज्ञान एवं अभियांत्रिकी अनुसंधान बोर्ड) के युवा वैज्ञानिक परियोजना के तहत किया गया था।

अध्ययन के मुताबिक एआरआई के दल ने मीथेनोजन्स की पहचान की है जो मीथेन हाइड्रेट के रूप से जैव-जनित मीथेत उत्पादित करते हैं जो ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्त्रोत हो सकता है।

मीथेन हाइड्रेट तब बनता है जब हाइड्रोजन से संयुग्मित जल और मीथेन गैस समुद्र में उच्च दबाव व कम तापमान में संपर्क में आते हैं।

अध्ययन के प्रधान अन्वेषक विक्रम बी लांजेकर ने कहा, “कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन और अंडमान व महानदी के तट के निकट जैव-जनित मूल के मीथेन हाइड्रेट के व्यापक भंडार यह अनिवार्य कर दिया कि इससे जुड़े मीथेनोजेनिक समुदाय का अध्ययन किया जाए।”

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