ग्लोबल फुटप्रिंट नेटवर्क के मुताबिक जर्मनी ने पूरे साल के प्राकृतिक संसाधान मई के महीने में ही खत्म कर दिए हैं. पर्यावरण पर काम करने वाली संस्थाओं के मुताबिक ऐसा जीवाश्म ईंधन के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण हुआ है.आने वाली 10 मई तक जर्मनी उन सारे प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल कर चुका होगा जो सैद्धांतिक रूप से पूरे साल चलने चाहिए थे. अंतरराष्ट्रीय संस्था 'ग्लोबल फुटप्रिंट नेटवर्क' के पारिस्थितिक शोधकर्ताओं के यह अनुमान लगाया है. यह संगठन सभी देशों के साथ-साथ पूरी पृथ्वी के लिए वार्षिक रूप से 'अर्थ ओवरशूट डे' की गणना करता है.
शोधकर्ताओं ने जर्मनी के बारे में यह भी कहा कि अगर पृथ्वी पर हर कोई जर्मनी की तरह प्राकृतिक संसाधनों का उपभोग करे और उतनी ही कार्बन-डाइऑक्साइड उत्सर्जित करे, तो पृथ्वी की सालाना जैव-क्षमता साल की पहली तिहाई के भीतर ही समाप्त हो जाएगी.
जर्मन एसोसिएशन फॉर द एनवायरमेंट एंड नेचर कंजर्वेशन के अनुसार, जर्मनी मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधन के अधिक इस्तेमाल के कारण बहुत अधिक प्राकृतिक संसाधनों का उपभोग करता है. इसके मुख्य कारणों में औद्योगिक क्षेत्र, भवन निर्माण क्षेत्र, सड़क परिवहन और औद्योगिक पशुपालन शामिल हैं. संस्था ने कहा कि इस आदत के नतीजे लंबे समय से सूखे, भारी बारिश या शहरों में बढ़ती गर्मी के माध्यम से महसूस किए जा रहे हैं.
संस्था के प्रमुख ओलाफ बान्ट ने कहा, "हमारी वर्तमान जीवनशैली और आर्थिक मॉडल टिकाऊ नहीं हैं. नवीकरणीय ऊर्जा की ओर रुख करने के बजाय, हम कोयले, तेल और गैस पर निर्भर रहना जारी रखे हुए हैं. बान्ट ने इस बात का भी जिक्र किया कि इसके उलट सौर और पवन ऊर्जा से बिजली, हीट पंप और हल्के, कॉम्पैक्ट और किफायती इलेक्ट्रिक गाड़ियां स्वतंत्रता, योजना सुरक्षा और जलवायु सुरक्षा प्रदान करेंगे."
2025 में, जर्मनी का 'अर्थ ओवरशूट डे' 3 मई को आया था, जो इस साल की गणना से एक सप्ताह पहले था. हालांकि, संगठन ने कहा कि ऐसा पिछले 12 महीनों में कम पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली का संकेत देने के बजाय, मुख्य रूप से अपडेट किए गए डेटा और गणना के तरीकों में बदलाव के कारण हुआ था. 2024 में भी मई की शुरुआत में ही जर्मनी ने सारे संसाधन इस्तेमाल कर लिए थे. तब कहा गया था कि अगर सभी लोग जर्मनी के लोगों की तरह प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल करता रहा तो इंसानों को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए पृथ्वी जैसे तीन और ग्रहों की जरूरत पड़ेगी.
ऐसा नहीं है कि सिर्फ जर्मनी के लोग ही संसाधनों का दोहन कर रहे हैं. कतर, लग्जमबर्ग, चीन, अमेरिका, कंबोडिया, सहित आधे से ज्यादा देशों की हालत इस मामले में गंभीर बनी हुई है. पर्यावरण पर काम कर रही संस्थाओं का यह भी कहना है कि ज्यादा प्राकृतिक संसाधन इस्तेमाल करने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि इससे लोगों का जीवनस्तर बेहतर हो रहा है. उदाहरण के तौर पर स्वीडन और जर्मनी में जीवन स्तर काफी समान है, लेकिन स्वीडन ने यह जर्मनी की तुलना में प्रति व्यक्ति 16% कम उत्सर्जन में हासिल की है.
अर्थ ओवरशूट डे वह तारीख है जब प्राकृतिक संसाधनों के लिए इंसानों की मांग उस मात्रा से अधिक हो जाती है जिसे पृथ्वी उस साल में दोबारा बना सकती है. आधिकारिक वैश्विक तारीख की घोषणा ग्लोबल फुटप्रिंट नेटवर्क 'विश्व पर्यावरण दिवस' के मौके पर करेगा जो हर साल पांच जून को मनाया जाता है.













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