देश की खबरें | केरल सरकार शीर्ष अदालत के फैसले का स्वागत करती है, इसे लागू किया जाएगा : देवस्वोम मंत्री

तिरूवनंतपुरम, 13 जुलाई केरल की सरकार ने सोमवार को कहा कि श्री पद्मनाभ स्वामी मंदिर पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का वह स्वागत करती है और इसे लागू किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने इस प्रख्यात मंदिर में त्रावणकोर शाही परिवार के प्रशासन के अधिकार को बरकरार रखा। वहीं कांग्रेस और भाजपा ने कहा कि यह सत्तारूढ़ वामपंथी दल के लिए बड़ा झटका है।

उच्चतम न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हुए देवस्वोम मंत्री कडकम्पल्ली सुरेन्द्रन ने कहा कि सरकार फैसले का सम्मान करती है और इसे लागू किया जाएगा।

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सुरेन्द्रन ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमें अब भी उच्चतम न्यायालय के फैसले का विश्लेषण करने की जरूरत है। विस्तृत फैसला अभी नहीं आया है। हम उच्चतम न्यायालय के फैसले को लागू करेंगे।’’

मंदिर के नजदीक कुछ लोग फैसले से काफी खुश होकर मिठाइयां बांटते नजर आए।

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केरल उच्च न्यायालय के 2011 के फैसले को दरकिनार करते हुए उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को मंदिर प्रशासन में त्रावणकोर शाही परिवार के अधिकार को बरकरार रखा। केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को आदेश दिया था कि मंदिर के प्रबंधन और संपत्ति का नियंत्रण हासिल करने के लिए एक न्यास का गठन किया जाए।

फैसले का स्वागत करते हुए त्रावणकोर शाही परिवार ने कहा कि वे फैसले से खुश हैं।

शाही परिवार ने एक संदेश में कहा, ‘‘आज के उच्चतम न्यायालय के फैसले का हम न केवल परिवार पर पद्मनाभ स्वामी के आशीर्वाद बल्कि उनके सभी श्रद्धालुओं पर आशीर्वाद के रूप में सम्मान करते हैं।’’

शाही परिवार की एक वरिष्ठ सदस्य पूयम तिरूनाल गोवरी पार्वती बाई ने कहा, ‘‘भगवान आपको आशीर्वाद दें।’’

पूर्व मुख्यमंत्री ओम्मन चांडी ने कहा कि फैसला त्रावणकोर शाही परिवार और श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान है और राज्य सरकार को ‘‘बड़ा झटका’’ है। विपक्ष के नेता रमेश चेन्नथला ने कहा कि निर्णय पूर्ववर्ती यूडीएफ सरकार के रूख को मंजूरी है।

चेन्निथला ने कहा कि फैसला श्रद्धालुओं की आस्था की जीत है और यह उनकी जीत है।

भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष के. सुरेन्द्रन ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का निर्णय पार्टी के विचार की पुष्टि है कि मंदिर के रीति-रिवाज और परंपराएं श्रद्धालुओं के लिए होती हैं न कि राजनीतिक दलों या सरकार के लिए।

सुरेन्द्रन ने कोझिकोड में संवाददाताओं से कहा कि राज्य सरकार को स्वीकार करना चाहिए कि मंदिर प्रशासन पर उनका रुख गलत था।

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