बेंगलुरु, 30 मार्च कर्नाटक विधानसभा में बुधवार को चुनाव सुधारों पर विशेष बैठक के बाद सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
चुनाव सुधारों पर विशेष बहस के दौरान मजबूत दल-बदल विरोधी कानून की जरूरत, मतदान को अनिवार्य बनाना, निर्वाचन आयोग के कामकाज, राजनीतिक दलों और कॉरपोरेट के बीच गठजोड़ को खत्म करना जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
नेता प्रतिपक्ष सिद्धरमैया ने 1970 के दशक से देश में बिगड़ती चुनावी व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की। जबकि, मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने देश के लोगों के पास मौजूद शक्तियों का हवाला देते हुए विविधता के बावजूद लोकतांत्रिक व्यवस्था और मूल्यों की रक्षा की उम्मीद जताई।
बहस में भाग लेते हुए बोम्मई ने कहा, ‘‘भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था समय की कसौटी पर खरा उतरी है और हम इसकी रक्षा करने में सक्षम हैं। अमेरिका समेत कई विकसित देशों से तुलना करने पर हम देखते हैं कि हमारे देश में हर चुनाव के बाद सत्ता का सहज हस्तांतरण होता है।
चुनाव प्रणाली की रक्षा के लिए मजबूत कानूनों की वकालत करते हुए सिद्धरमैया ने कहा कि निर्वाचन आयोग में नियुक्तियां करने के लिए एक कॉलेजियम प्रणाली होनी चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष विश्वेश्वर हेगड़े कागेरी ने युवाओं से लोकतंत्र और संसदीय व्यवस्था की देखरेख करने का आह्वान करते हुए कहा कि ‘मेरा वोट बिक्री के लिए नहीं है’, यह एक जन आंदोलन बनना चाहिए।
जनता दल (सेक्युलर) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने कहा कि निर्वाचन आयोग को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की विश्वसनीयता के बारे में संदेह दूर करना चाहिए और इस संबंध में खुली चर्चा का आह्वान किया।
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