मुंबई, 28 सितम्बर बम्बई उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में तब कुछ गड़बड़ चल रही थी, जब वह कथित अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए आया था। अदालत ने यह टिप्पणी अभिनेत्री कंगना रनौत की याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
न्यायमूर्ति एस जे कथावाला और न्यायमूर्ति आर आई चागला की पीठ ने रनौत के मामले में कहा कि बीएमसी ने कथित अवैध निर्माणों की तस्वीरें काम रोकने के नोटिस के साथ संलग्न करने और ध्वस्तीकरण करने से पहले कुछ दिन इंतजार करने की अपनी ही प्रथा का पालन नहीं किया।
अदालत ने यह टिप्पणी रनौत द्वारा दायर उस रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जो उन्होंने उपनगरीय बांद्रा में पाली हिल स्थित अपने बंगले एक हिस्से को नौ सितम्बर को ढहाये जाने को चुनौती देते हुए दायर की थी।
न्यायाधीश बीएमसी के एच वार्ड के अधिकारी भाग्यवंत लाते से सवाल कर रहे थे जो कि रिट याचिका में एक प्रतिवादी हैं और जिनके अधिकार क्षेत्र में रनौत की सम्पत्ति पड़ती है।
सवाल करने के दौरान, पीठ ने कहा कि रनौत की इमारत के करीब के भवनों में समान अवैधता के मामलों में बीएमसी ने ध्वस्तीकरण से पहले कई दिनों तक इंतजार किया।
अदालत ने कहा कि इसके अलावा, ज्यादातर अन्य मामलों में उसने कथित अवैध निर्माणों की तस्वीरें काम रोकने संबंधी भवन मालिकों को सौंपे गए नोटिस के साथ दी थीं और वह ऐसे प्रकरणों में अक्सर पुलिस को ऐसी कार्रवाई के लिये साथ नहीं ले जाती।
पीठ ने कहा कि हालांकि रनौत के मामले में बीएमसी के पास कथित अवैध निर्माण की डिजिटल तारीख और समय के साथ कोई तस्वीर नहीं है तथा ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अभिनेत्री को नोटिस देने के मात्र 24 घंटे के भीतर भारी पुलिस बल की मौजूदगी में की गई।
न्यायाधीश ने कहा कि बीएमसी ने अपने जवाब में दावा किया कि उसने इसी तरह के एक अवैध निर्माण को आठ सितम्बर को ध्वस्त किया था। हालांकि, जब पीठ ने उससे उसकी तस्वीरों के लिए कहा तो उसने कहा कि रिकार्ड में ऐसी तस्वीरें या दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
वार्ड अधिकारी ने यह भी कहा कि बीएमसी टीम आठ सितम्बर की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए पुलिस को साथ नहीं ले गई थी।
इसपर पीठ ने नाराजगी जतायी।
पीठ ने कहा कि श्रीमान साकरे (बीएमसी के स्थायी अधिवक्ता) यहां कुछ बहुत ही गड़बड़ है। आठ तारीख की कोई तस्वीर नहीं है। ऐसा कैसे है कि यह ध्वस्तीकरण को सिस्टम में आठ (सितम्बर) को नहीं दिखाया गया है? जब हमने फाइल के बारे में पूछा तब इसे तैयार किया गया। क्या कोई जवाब है?
पीठ ने यह भी पूछा कि बीएमसी नौ सितम्बर को रनौत का बंगला ध्वस्त करने के लिए इतनी अधिक संख्या में पुलिस बल क्यों लेकर गया था। इस पर लाते ने कहा कि रनौत का मामला ‘‘नाजुक’’ था।
पीठ ने सवाल किया, ‘‘नाजुक मामलों की परि क्या है? क्या सेलिब्रिटी के मामले नाजुक हो जाते हैं?’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY