देश की खबरें | कालेश्वरम सिंचाई परियोजना को कानून का उल्लंघन कर पर्यावरण मंजूरी दी गयी : हरित अधिकरण
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 20 अक्टूबर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने मंगलवार को कहा कि तेलंगाना में कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई परियोजना को कानूनी आवश्यकताओं का उल्लंघन करते हुए ‘पिछली तारीख से प्रभावी’ पर्यावरण मंजूरी दी गयी।

एनजीटी ने इसके साथ ही इससे हुए नुकसान का आकलन करने और इसकी भरपाई के लिए उठाए जाने वाले जरूरी कदमों को सुझाने के लिये एक समिति का गठन किया।

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अधिकरण ने पर्यावरण और वन मंत्रालय को सात सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन करने और अपनाये जाने वाले राहत और पुनर्वास उपाय सुझाने को कहा।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह रुख अस्वीकार्य है कि पर्यावरण मंजूरी दिये जाने से पहले क्रियान्वित परियोजना का सिंचाई से कोई लेना-देना नहीं है।

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अधिकरण ने कहा कि तेलंगाना सरकार विस्तार के बारे में लिये गए फैसले को न तो पर्यावरण संबंधी मंजूरी प्राप्त है और न ही वह मान्य है।

पीठ ने कहा, ‘‘हम परियोजना प्रस्तावक के इस रुख को स्वीकार करने में असमर्थ हैं कि प्राथमिक रूप से परियोजना जल आपूर्ति और जल प्रबंधन के लिए है और सिंचाई इस परियोजना का सहायक भाग है इसलिए 2008 से 2017 तक परियोजना के क्रियान्वयन से पहले पर्यावरण मंजूरी जरूरी नहीं थी।’’

अधिकरण ने कहा, ‘‘हम इस बात से भी सहमत नहीं हैं कि राज्य सरकार ने परियोजना में मंजूरी मिलने तक सिंचाई से जुड़ा कोई निर्माण कार्य नहीं किया और उस अवधि में सिर्फ पेयजल आपूर्ति से संबंधित विनिर्माण ही किए।’’

अधिकरण ने कहा कि लिफ्ट सिंचाई परियोजना को कानूनी आवश्यकताओं का उल्लंघन करते हुए ‘पिछली तारीख से प्रभावी’’ पर्यावरण मंजूरी दी गयी।

पीठ ने कहा, ‘‘सभी गतिविधियां स्पष्ट रूप से सिंचाई परियोजना का हिस्सा हैं, जिन्हें अलग-अलग नहीं किया जा सकता है। यह स्वीकार करना मुश्किल है कि ऐसी सभी गतिविधियां सिर्फ पेयजल आपूर्ति के लिए हैं।’’

उसने कहा कि परियोजना का पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव हुआ है और यह कभी भी पूरी तरह से जलापूर्ति परियोजना नहीं थी।

अधिकरण ने पर्यावरण मंत्रालय के संबंधित सचिव को इस परियोजना की निगरानी करने का निर्देश दिया और कहा कि प्रभावित पक्ष को तीन सप्ताह के भीतर इस संबंध में मंत्रालय को अभिवेदन देने की छूट होगी।

तेलंगाना निवासी मोहम्मद हयातुद्दीन की याचिका पर एनजीटी का यह फैसला आया, जिन्होंने आरोप लगाया था कि बिना पर्यावरण और अन्य वैधानिक मंजूरियों के योजना का निर्माण शुरू किया गया।

वकीलों संजय उपाध्याय और सालिक शफीक के माध्यम से दाखिल याचिका में वन्य क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई, विस्फोट करने तथा सुरंगों की खुदाई जैसी गैर वन्य गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। ये गतिविधियां वन संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन करके चलायी जा रही थीं।

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