देश की खबरें | कोविड-19 संकट पर विशेष चर्चा के साथ झारखंड विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

रांची, 22 सितंबर कोविड-19 संकट पर विशेष चर्चा के साथ ही झारखंड विधानसभा का तीन दिनों का मानसून सत्र मंगलवार को संपन्न हो गया जिसके बाद झारखंड विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गयी।

विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो ने कोरोना वायरस के संकट पर विशेष चर्चा के उपरांत आज शाम विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी। राज्य विधानसभा का मानसून सत्र 18 सितंबर को प्रारंभ हुआ था।

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मानसून सत्र के तीसरे और अंतिम दिन सदन ने आठ विधेयकों को पारित किया।

विधानसभा का सत्र मंगलवार को भोजनावकाश से पूर्व हंगामेदार रहा और इस दौरान हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही कुल मिलाकर मुश्किल से एक घंटे ही चल सकी एवं इस दौरान सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित भी करनी पड़ी।

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झारखंड विधानसभा में मानसून सत्र के अंतिम दिन मंगलवार को जैसे ही प्रश्नकाल प्रारंभ हुआ मुख्य विपक्षी भाजपा ने उच्च न्यायालय के सोमवार के आदेश के आलोक में बेरोजगार हुए लोगों के मुद्दे, बेरोजगारी और कानून व्यवस्था की स्थिति पर लाये गये अपने कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग की, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो ने इसकी अनुमति नहीं दी जिसके बाद भाजपा सदस्यों ने सदन में हंगामा किया तथा अध्यक्ष के आसन के समक्ष आकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

हंगामे के बीच भाजपा विधायक तथा पूर्व कृषि मंत्री रणधीर सिंह ने कार्यस्थगन पर चर्चा कराये जाने पर जोर दिया। इस पर विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो ने कहा, ‘‘सदन ऐसे नहीं चलेगा।’’

इसके जवाब में भाजपा विधायक रणधीर सिंह ने कहा, ‘‘ऐसे ही चलेगा।’’ भाजपा विधायक के अपने इस बयान के दोहराने पर भड़के विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो ने कहा, ‘‘सदन में गुंडागर्दी नहीं चलेगी।’’

विधानसभा अध्यक्ष ने आसन के सामने पहुंचे रणधीर सिंह को तत्काल मार्शलों को आदेश देकर सदन से बाहर करवा दिया।

विधानसभा अध्यक्ष की इस कार्रवाई पर सदन से बाहर रणधीर सिंह ने कहा, ‘‘क्या सरकार का विरोध करना गुंडागर्दी है?

भाजपा विधायक भानुप्रताप शाही ने भी कार्यस्थगन पर चर्चा की जोरदार मांग की और उनका साथ सभी भाजपा विधायकों ने दिया। साथ ही उन्होंने उच्च न्यायालय के राज्य के नियोजन नीति पर कल के आदेश से उपजी स्थिति पर मुख्यमंत्री के बयान की मांग की, लेकिन मुख्यमंत्री सदन में नहीं थे जिसके चलते विधानसभा अध्यक्ष ने संसदीय कार्यमंत्री से जवाब दिलाने की बात कही जिसके लिए भाजपा राजी नहीं हुई।

इसके बाद हुए हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो ने एक घंटे के लिए स्थगित कर दी और प्रश्नकाल नहीं चल सका।

सदन की कार्यवाही दोबारा साढ़े बारह बजे प्रारंभ होने पर मुख्यमंत्री सदन में आ चुके थे और उन्होंने इस मुद्दे पर अपने बयान में दो टूक कहा, ‘‘जैसी करनी वैसी भरनी।’’

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, ‘‘पिछली सरकार की गलतियों का खामियाजा उनकी सरकार भुगत रही है। संविधान जिस बात की अनुमति नहीं देता वैसा कार्य पिछली सरकार ने किया और 13 अनुसूचित जिलों में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के सभी सरकारी पद सौ प्रतिशत स्थानीय लोगों के लिए आरक्षित कर दिये। जिसके चलते उच्च न्यायालय ने इसे खारिज कर दिया।’’

उन्होंने जैसे ही कहा, ‘‘गलत किया तो भुगतना पड़ेगा।’’ सदन में भारी शोरशराबा प्रारंभ हो गया।

भाजपा ने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों के हित में बनायी गयी इस नीति के पक्ष में वर्तमान राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में उचित ढंग से सरकार का पक्ष नहीं रखा।

वास्तव में राज्य सरकार की जिला नियोजन नीति को रद्द करने के सोमवार के झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश के चलते राज्य में नौ हजार से अधिक उच्च माध्यमिक स्कूल शिक्षकों की नौकरी चली गयी है और वर्ष 2016 की नियोजन नीति को रद्द करने से इसके आधार पर अभी नयी नियुक्तियों पर भी रोक लग गयी है। जिससे बेरोजगारी और भी बढ़ने की आशंका है।

बढ़ते हंगामे को देखकर एक बार फिर विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा की कार्यवाही दोपहर बाद दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

भोजनावकाश के बाद विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने पर सदन ने कुल आठ विधेयकों को अपनी स्वीकृति प्रदान की। इनमें झारखंड राज्य सेवा देने की गारंटी संशोधन विधेयक 2020 , दंड प्रक्रिया संहिता (झारखंड संशोधन) विधेयक 2020, झारखंड खनिज धारित भूमि पर (कोविड-19 महामारी) उपकर विधेयक 2020, झारखंड माल और सेवा कर संशोधन विधेयक 2020, झारखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन संशोधन विधेयक 2020, झारखंड मूल्य कर संशोधन विधेयक 2020, मोटर वाहन कारारोपण संशोधन विधेयक 2020 और झारखंड राज्य भौतिक चिकित्सा (फिजियोथेरेपी) परिषद विधेयक 2020 शामिल हैं।

इन विधेयकों को पारित करने के दौरान झारखंड खनिज धारित भूमि पर (कोविड-19 महामारी) उपकर विधेयक 2020 और मोटर वाहन कारारोपण संशोधन विधेयक 2020 को भाजपा विधायकों ने प्रवर समिति को सौंपने की मांग की।

लेकिन विधानसभा में इस मांग को अस्वीकार कर सभी विधेयकों को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

विधेयकों के पारित होने के बाद विधानसभा में कोरोना वायरस के संकट पर विशेष चर्चा में मुख्य विपक्षी भाजपा सरकार पर जबर्दस्त आक्रामक रही जिस दौरान भाजपा की ओर से सीपी सिंह ने राज्य में इस संकट से निपटने की तैयारियों पर प्रश्नचिह्न लगाया और कहा कि संक्रमित लोगों को यहां अस्पताल में बिस्तर नहीं मिल रहे हैं और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को रिम्स के निदेश का बंग्ला दे दिया गया है जहां वह राजनीतिक बैठकें कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि झारखंड में कोरोना वायरस संक्रमितों के बढ़ने की दर देश के अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है और यह इस समय 2.2 प्रतिशत है जबकि महाराष्ट्र में 1.9 प्रतिशत, दिल्ली में 1.8 प्रतिशत तथा उत्तर प्रदेश में भी 1.8 प्रतिशत है।

उन्होंने सरकार को आगाह किया कि सत्ता आनी जानी है। यह किसी को स्थाई नहीं हासिल होती है। बहस के दौरान राज्य सरकार के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने इन आरोपों का खंडन किया जिससे सदन में जमकर हंगामा हुआ।

, इन्दु,

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