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8वां वेतन आयोग: क्या 72,000 रुपये होगी न्यूनतम बेसिक सैलरी? वेतन वृद्धि पर ताजा अपडेट

8वें वेतन आयोग के गठन के बाद केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी को लेकर चर्चा तेज है. कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 72,000 रुपये करने की मांग की है, जिस पर सरकार के अंतिम फैसले का इंतजार है.

8वां वेतन आयोग: क्या 72,000 रुपये होगी न्यूनतम बेसिक सैलरी? वेतन वृद्धि पर ताजा अपडेट
8वां वेतन आयोग (Photo Credits: File Image)

केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की चर्चाएं अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई हैं. सरकारी कर्मचारी यूनियनों ने सरकार के समक्ष न्यूनतम बेसिक सैलरी को मौजूदा 18,000 रुपये से बढ़ाकर 72,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा है. हालांकि, सरकार ने अभी तक इस भारी-भरकम बढ़ोतरी पर कोई आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है, लेकिन आयोग के गठन और सुझावों के लिए निर्धारित 30 अप्रैल 2026 की समयसीमा के करीब आने से हलचल तेज हो गई है.

न्यूनतम वेतन 72,000 रुपये की मांग और तर्क

भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) जैसे प्रमुख कर्मचारी संगठनों ने तर्क दिया है कि पिछले दशक में प्रति व्यक्ति आय और जीवन स्तर में भारी बदलाव आया है. संगठनों का कहना है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई को देखते हुए फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) को 2.57 से बढ़ाकर 4 गुना किया जाना चाहिए. यदि सरकार 4 के फिटमेंट फैक्टर को स्वीकार करती है, तो न्यूनतम वेतन सीधे 72,000 रुपये तक पहुंच जाएगा. वहीं, नेशनल काउंसिल (JCM) ने 3.83 के फिटमेंट फैक्टर के साथ न्यूनतम वेतन 69,000 रुपये करने का सुझाव दिया है.

फिटमेंट फैक्टर और सैलरी कैलकुलेशन

वेतन आयोग की सिफारिशों में 'फिटमेंट फैक्टर' सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है. यह वह गुणक (Multiplier) है जिससे कर्मचारियों की बेसिक सैलरी तय की जाती है.

वर्तमान स्थिति: 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 है.

प्रस्तावित मांग: कर्मचारी संगठन इसे 3.68 से 4.00 के बीच रखने की मांग कर रहे हैं.

अनुमानित वृद्धि: यदि फिटमेंट फैक्टर 3.00 भी रहता है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी लगभग 54,000 रुपये हो जाएगी.

8वें वेतन आयोग का गठन और टाइमलाइन

भारत सरकार ने नवंबर 2025 में आधिकारिक तौर पर 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया था. इसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं. आयोग वर्तमान में विभिन्न हितधारकों और कर्मचारी संघों से ज्ञापन (Memoranda) प्राप्त कर रहा है. उम्मीद जताई जा रही है कि आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट 2027 की शुरुआत में सौंप सकता है, लेकिन नई वेतन दरें 1 जनवरी 2026 से ही प्रभावी मानी जाएंगी. इसका अर्थ है कि देरी होने पर कर्मचारियों को पिछले महीनों का एरियर (Arrears) भी दिया जाएगा.

सरकार का रुख और चुनौतियां

फिलहाल वित्त मंत्रालय ने न्यूनतम वेतन के सटीक आंकड़े पर कोई टिप्पणी नहीं की है. सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित करते हुए कर्मचारियों की उम्मीदों को पूरा करना है. विशेषज्ञों का मानना है कि 72,000 रुपये की मांग काफी अधिक है और सरकार बीच का रास्ता निकालते हुए न्यूनतम वेतन को 30,000 से 35,000 रुपये के बीच तय कर सकती है.

भत्तों और पेंशन पर प्रभाव

वेतन आयोग केवल बेसिक सैलरी ही नहीं, बल्कि हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रैवल अलाउंस (TA) और पेंशन संरचना में भी बड़े बदलाव लाएगा. 2026 के अपडेट के अनुसार, महंगाई भत्ता (DA) पहले ही 60% के स्तर को छू चुका है, जिसे नए वेतनमान लागू होने पर बेसिक सैलरी में मर्ज (Merge) किया जा सकता है. इससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है.

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 28, 2026 10:59 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).