भविष्य के डिजिटल 'कच्चे माल' की तरह डाटा जुटा रहा है चीन
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

चीन की योजना है कि आने वाले समय में कंपनियों के पास मौजूद डाटा को देखने के बाद इनकी कीमत तय की जाएगी. इसके बाद बैंक इन तय की गई कीमतों को लोन देते समय गिरवी या जमानत के तौर पर स्वीकार कर सकता है.सर्वर या क्लाउड में रहने वाले 'डाटा' के बिना आज औद्योगिक भविष्य की कल्पना भी संभव नहीं है. यह डाटा हमारे भविष्य के डिजिटल कच्चे संसाधन जैसा है, जिसका महत्व आज के दौर में बिजली और कच्चे तेल जितना है.आने वाले समय में डाटा ही तय करेगा कि प्रतिस्पर्धा में किसे बढ़त मिलेगी और बाजार में किसकी कितनी हिस्सेदारी होगी. इसी से यह भी तय हो सकता है कि किस देश की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था सबसे मजबूत होगी.

सरकारी निगरानी में डाटा

चीन में निजी डाटा या जानकारी को काफी पहले से ही सार्वजनिक रूप से इकट्ठा किया जा रहा है. इस डाटा से मिले आंकड़ों के आधार पर हर व्यक्ति को एक स्कोर मिलता है, जिसे 'सोशल क्रेडिट सिस्टम' कहा जाता है. वहां की सरकार इसे उचित ठहराते हुए तर्क देती है कि इससे समाज में ईमानदारी और नैतिकता बढ़ेगी. सरकार का यह भी कहना है कि इससे धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार को रोकने में भी सहायता मिलेगी. इस निगरानी में अब औद्योगिक आंकड़ों को भी शामिल किया जा रहा है.

चीन की हुनान वीमेंस यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता ची हे के अनुसार, "पिछले वर्षों में चीनी सरकार ने डिजिटल ट्रांसफॉरमेशन को प्राथमिकता दी है. सूचना ढांचे, डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम भी उठाए हैं." वह बताती हैं कि "सरकार पैसे की मदद, टैक्स में छूट, क्षेत्रीय नवाचार फंड और उद्योग व शोध संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा देकर इस परिवर्तन प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रही है."

डाटा विभाग भी हुआ स्थापित

डाटा के इस रणनीतिक महत्व को चीनी सरकार ने काफी पहले पहचान लिया था. अक्टूबर 2023 में नेशनल डाटा एडमिनिस्ट्रेशन की स्थापना की गई. आर्थिक नीति से जुड़ा सुधार एवं विकास आयोग इस प्रशासन की देखरेख और निगरानी करता है. इस विभाग का काम डाटा के ढांचे को विकसित करना, मजबूत करना और डाटा के साझा उपयोग को बढ़ावा देना है. चीन में डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में तकनीक और कंपनियों की भरमार है. इन्हीं फायदों के आधार पर चीन विदेशी शोध संस्थानों और निवेशकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है.

डाटा पर होने वाली रिसर्च और टेस्ट के नतीजों पर सरकार की हमेशा नजर रहती है. इसी के तहत वर्ष 2022 में बीजिंग सरकार ने डाटा को विदेश भेजने के नियमों को सख्त कर दिया और डाटा की सुरक्षा की जांच को भी जरूरी कर दिया. सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार 'महत्वपूर्ण डाटा' को निर्यात से पहले सरकार को रिपोर्ट किया जाना अनिवार्य है. चीन के डाटा और साइबर सुरक्षा कानून के अनुसार, जरूरी डाटा केवल आवेदन और अनुमति के बाद ही कहीं बाहर या विदेश भेजा जा सकता है. हालांकि, नियमों में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि 'महत्वपूर्ण' डाटा की परिभाषा क्या है.

डाटा: एक रणनीतिक शक्ति

यूरोपीय संघ ने चिंता जताई है कि हाल के वर्षों में यूरोपीय कंपनियों के लिए चीन से डाटा बाहर भेजना बेहद मुश्किल और अनिश्चित होता जा रहा है. खास तौर पर चिंता का कारण यह है कि कंपनियों को 'महत्वपूर्ण डाटा' कहीं भेजने से पहले हर बार सुरक्षा अनुमति लेनी पड़ती है. युरोपियन संघ आयोग के मुताबिक यह चिंता और भी ज्यादा बढ़ गई है क्योंकि, 'महत्वपूर्ण डाटा' की परिभाषा स्पष्ट नहीं की गई है. साथ ही, इस शब्द का इस्तेमाल बहुत बड़े दायरे में किया गया है जो इसकी अस्पष्टता को और बढ़ाता है. इसके अतिरिक्त, सीमा‑पार डाटा ट्रांसफर पर लगाए गए प्रतिबंधों ने चीन में यूरोपीय निवेशकों का भरोसा भी कमजोर किया है.

भारत में नए डेटा प्राइवेसी नियम लागू, कंपनियों पर सख्त शर्तें

नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के शोधकर्ता जीवेई कियान के अनुसार, "चीन अपने नियमों के जरिए अपने डाटा पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता है." यह उन्होंने अपनी किताब 'गवर्निंग चाइनाज डिजिटल ट्रांसफॉरमेशन' (चीन की डिजिटल परिवर्तन नीति) में लिखा है. वह किताब में यह भी लिखते हैं कि "एक ओर ये कदम राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंताओं को शांत करते हैं, वहीं दूसरी ओर उन वैश्विक कंपनियों के लिए मुश्किलें भी खड़ी करते हैं, जिन्हें अपना कारोबार चलाने के लिए डाटा को बिना रुकावट सीमा-पार भेजना होता है." इसके अलावा, डाटा से जुड़े नियम कई अलग अलग हिस्सों में बिखरे हुए हैं, जिसके कारण देश के भीतर विभिन्न सरकारी एजेंसियों और क्षेत्रों के बीच असहमति पैदा होती है. यह मुश्किलें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पैदा होती हैं, क्योंकि हर देश डाटा प्रबंधन के लिए अपने‑अपने, और कई बार विरोधी कानून लागू करता है.

डिजिटल संपत्ति बनता डाटा

चीन में सत्ता और बाजार दोनों इस बात से सहमत हैं कि डाटा सोने से भी ज्यादा बेशकीमती है. यही सोच चीन की नई पंचवर्षीय योजना में भी झलकती है, जहां डिजिटल और स्वतंत्र इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की बात कही गई है. बर्लिन स्थित मर्काटॉर इंस्टीट्यूट फॉर चाइना स्टडीज की चीन विशेषज्ञ रेबेका आर्चेसाती का कहना है "चीन बड़े तौर पर एआई ढांचे को तेजी से मजबूत कर रहा है और विदेशी तकनीक पर निर्भरता को भी घटा रहा है. इसके अलावा, घरेलू सॉफ्टवेयर, एल्गोरिदम और एआई ट्रेनिंग डाटा को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है."

डाटा अगर कीमती संपत्ति है, तो भविष्य में डाटा की कीमत भी कंपनियों के खातों में दिखाई देनी चाहिए. यह सोच महज हिसाब-किताब का हिस्सा नहीं बल्कि एक बड़ी राजनीतिक और रणनीतिक सोच का हिस्सा है. डीडब्ल्यू को दिए एक इंटरव्यू में नाम न बताने की शर्त पर एक चीनी लॉ प्रोफेसर ने बताया कि सरकार फिलहाल 'महत्वपूर्ण डाटा' की कीमत तय करने में जुटी हुई है.

योजना के मुताबिक, आने वाले समय में डाटा की जांच सरकारी मंजूरी प्राप्त संस्थाओं द्वारा की जाएगी. साथ ही, डाटा को देखने के बाद इनकी कीमत तय की जाएगी. इसके बाद बैंक इन तय की गई कीमतों को लोन देते समय गिरवी या जमानत के तौर पर स्वीकार कर सकता है. यह योजना दिवालिया हो चुकी कंपनियों के मामले में भी लागू होती है. एक कानूनी विशेषज्ञ बताते हैं कि "दिवालिया हो चुकी कंपनियां अदालत में अपने डाटा की कीमत भी पेश कर सकती हैं." हालांकि इस नियम को लागू करने में अभी लंबा समय लगेगा.

डाटा सहयोग में जर्मनी की भूमिका

जर्मनी जैसे औद्योगिक देश के लिए चीन से डाटा की उपलब्धता विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है. इस डाटा की जरूरत विशेष रूप से जर्मन ऑटोमोबाइल कंपनियों को है, ताकि वे स्वचालित ड्राइविंग जैसे भविष्य के विषयों पर शोध कर सकें. फिलहाल, चीन के तेजी से बढ़ते बाजार में सभी जर्मन कार निर्माता मुनाफा कमा रहे हैं. हालांकि, नई खोज और तकनीक की कमी इस लाभ में गिरावट का कारण बन सकती है.

वर्ष 2024 में चीन और जर्मनी ने स्वचालित और नेटवर्क‑आधारित ड्राइविंग के क्षेत्र में बातचीत करने पर सहमति जताई. इसका मकसद है कि डाटा सब तक समान रूप से पहुंचे और उसे कानूनी व सुरक्षित तरीके से इस्तेमाल किया जाए, खासकर कार और संचार से जुड़े डाटा को. यह व्यवस्था 2029 तक सुनिश्चित की जानी है.

जर्मन उद्योग और वाणिज्य मंडल ने संकेत दिया है कि चीन में डाटा प्रतिबंधों को दूर करने के लिए कंपनियों को सर्टिफिकेट लेने की प्रक्रिया से गुजरना होगा या चीनी अधिकारियों द्वारा की जाने वाली सुरक्षा जांच का सामना करना होगा.

यूरोपीय संघ भी डाटा ट्रांसफर की अहमियत को भलीभांति समझता है. ईयू आयोग के अनुसार, "व्यापार के लिए डाटा का प्रवाह बेहद जरूरी है. यूरोप और चीन के बीच विदेशी निवेश का बड़ा हिस्सा इस पर टिका है कि कंपनियां अपने डाटा को सीमा‑पार कितनी अच्छी तरह मैनेज करने की क्षमता रखती हैं." यह डाटा ट्रांसफर बैंकिंग, बीमा, दवाइयों, ऑटोमोबाइल और आईटी जैसे क्षेत्रों के लिए काफी महत्व रखता है. शोध और विकास के नजरिए से भी डाटा का देशों के बीच आना-जाना बेहद अहम है और कंपनियों की सफलता के लहजे से एकदम अनिवार्य है.