नयी दिल्ली, पांच जून भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने चंडीगढ़ और गुवाहाटी में अपने दो नव स्वीकृत कमानों का संचालन शुरू कर दिया है। ये चीन से लगी 3,488 किमी लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर सैनिकों की तैनाती की निगरानी करेगीं।
बल के यहां स्थित मुख्यालय से तीन जून को जारी एक आदेश में कहा गया है कि इन प्रतिष्ठानों में कामकाज फौरन शुरू करने की अत्यधिक जरूरत है।
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अधिकारियों ने कहा कि लद्दाख क्षेत्र में तथा एलएसी के अन्य हिस्सों में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हालिया गतिरोध, इन दोनों कमानों--चंडीगढ़ और गुवाहाटी-- का कामकाज शीघ्र शुरू करने की एक बड़ी वजह है। इनका नेतृत्व अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) रैंक के अधिकारी करेंगे, जो थल सेना में लेफ्टिनेंट जनरल के समकक्ष होंगे।
लगभग 90,000 कर्मियों वाले बल ने हाल ही में अपनी सीमावर्ती क्षेत्रों में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के साथ गतिरोध को ध्यान में रखते हुए अपनी शक्ति बढ़ाई है।
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केंद्र सरकार ने पिछले साल अक्टूबर में दोनों कमानों के गठन की स्वीकृति दी थी। चीन से लगी एलएसी, लद्दाख से लेकर अरूणाचल प्रदेश में तैनात बल की करीब 35-38 बटालिनों के बेहतर संचालन के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया था।
आदेश में कहा गया है कि आईटीबीपी महानिरीक्षक (अभियान) एम एस रावत चंडीगढ़ में एडीजी की क्षमता के साथ तत्काल प्रभाव से चंडीगढ़ स्थित पश्चिमी कमान में प्रभार संभालेंगे।
आदेश में कहा गया है कि वह एक नये व्यक्ति को नियुक्त किये जाने तक महानिरीक्षक (अभियान, खुफिया, पशु चिकित्सा सेवा) के महानिरीक्षक (आईजी) का प्रभार संभालेंगे।
इसी तरह आईजी रैंक के एक अन्य अधिकारी गुवाहाटी स्थित पूर्वी कमान का नेतृत्व करेंगे। इसका पूर्ण रूप से संचालन शुरू करने के लिये बल और अधिकारियों को तैनात कर रहा है।
अधिकारियों ने कहा कि ये कमान सीमावर्ती क्षेत्रों में आईटीबीपी कर्मियों के अभियान, खुफिया, तैनाती और प्रशासनिक गतिविधियों को कारगर बनाएंगे और थल सेना के साथ बेहतर समन्वय बनाएंगे।
अधिकारियों ने कहा कि बल में अभी एडीजी रैंक के अधिकारी पदस्थ नहीं हैं, आईजी रैंक के अधिकारियों को एडीजी पद पर काम करने के लिये तैनात किया जा रहा है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बल में एडीजी के फिलहाल तीन पद हैं और ये तीनों ही खाली हैं।
अधिकारी ने कहा कि आईटीबीपी में एडीजी रैंक में इसके कैडर से कोई अधिकारी नहीं है और इस सिलसिले में विभागीय पदोन्नति समिति की बैठकें लंबित हैं।
केंद्रीय मंत्रिमंडल पिछले साल अक्टूबर में दो कमानों के गठन की स्वीकृति प्रदान की थी। साथ ही, अधिकारी रैंक पर करीब 60 पदों को भी स्वीकृति दी थी, जिनमें एडीजी रैंक के दो पद भी शामिल हैं।
पश्चिमी कमान को देहरादून स्थित उत्तरी सीमांत में आईटीबीपी नियुक्तियों पर नियंत्रण प्राप्त होगा, जिसके शिमला, देहरादून और बरेली सेक्टर हैं।
वहीं, उत्तर पश्चिम सीमांत कमान को पिछले साल अप्रैल में चंडीगढ़ से हटा कर लेह कर दिया गया था और इसके श्रीनगर एवं लद्दाख सेक्टर हैं।
आईटीबीपी लेह सीमांत का नेतृत्व महानिरीक्षक रैंक के एक अधिकारी करते हैं, जो थल सेना में मेजर जनरल के समकक्ष हैं।
लेह में सेना की 14 वीं कोर भी स्थिति है, जिसे 1999 के करगिल युद्ध के बाद स्थापित किया गया था।
पूर्वी कमान, उत्तरी सीमांत और उत्तर पूर्वी सीमांत में आईटीबीपी तैनातियों को देखेगी।
आईटीबीपी पर्वतीय युद्ध के लिये प्रशिक्षित है और इसके सैनिक लद्दाख इलाके में चीनी सैनिकों के साथ हाल ही में हुए गतिरोध के दौरान भारतीय थल सेना के साथ उपस्थित थे।
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