देश की खबरें | प्रोफेसर को फेलोशिप के लिए अवकाश मंजूर करने का जेएनयू को निर्देश
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 14 सितम्बर दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) को निर्देश दिया कि वह एक फ्रांसीसी शोध संस्थान द्वारा पेशकश की गई नौ महीने के फेलोशिप के लिए अपने एक प्रोफेसर को असाधारण अवकाश (ईओएल) मंजूर करे।

उच्च न्यायालय ने कहा कि ईओएल खारिज करने का विश्वविद्यालय का आदेश ‘‘पूरी तरह से मनमाना’’ और विश्वविद्यालय के नियम के खिलाफ है।

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न्यायमूर्ति ज्योति सिंह ने प्रोफेसर उदय कुमार की अर्जी मंजूर की जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालय को यह निर्देश देने का अनुरोध किया था कि वह ईओएल की उनकी अर्जी पर फिर से विचार करे।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अर्जी मंजूर की जाती है। मैं विश्वविद्यालय को निर्देश देती हूं कि वह याचिकाकर्ता (कुमार) को एक अक्टूबर, 2020 से 30 जून 2021 तक ईओएल मंजूर करे जिससे वह अपनी फेलोशिप में शामिल हो सकें।’’

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जेएनयू में अंग्रेजी अध्ययन विभाग के प्रोफेसर उदय कुमार ने एक अक्टूबर, 2020 से 30 जून, 2021 तक नौ महीने के बिना वेतन के असाधारण अवकाश (ईओएल) के लिए 21 जनवरी, 2020 की तिथि वाली अपनी अर्जी खारिज करने के विश्वविद्यालय के कार्यकारी परिषद के 18 फरवरी के फैसले को चुनौती दी थी।

अदालत ने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं कि कुमार विदेश स्वयं सेवा या स्वरोजगार के लिए नहीं जा रहे हैं बल्कि उच्च अध्ययन के लिए जा रहे हैं।

अदालत ने कहा कि जेएनयू के लिए यह बहुत प्रतिष्ठा की बात है कि इसके प्रोफेसर को इतने प्रतिष्ठित संस्थान में फेलोशिप दी गई है।

कुमार की ओर से पेश अभिक चिम्नी ने संकाय सदस्यों की एक बैठक के कार्य विवरण की ओर अदालत का ध्यान आकृष्ट किया जिसमें कुमार ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि वह विदेश से कोर्स आनलाइन पढ़ाना जारी रखेंगे।

कुमार ने अपनी याचिका में तीन मार्च, 12 जून और सात जुलाई के जेएनयू के उन पत्रों को दरकिनार करने की भी मांग की थी जिसके जरिये नौ महीने के ईओएल के उनके अनुरोधों को कथित तौर पर बिना कारण बताये खारिज किया गया है।

उन्होंने ईओएल के लिए एक और अनुरोध किया जिसे जेएनयू ने फिर खारिज कर दिया।

उन्होंने अपनी दलील में कहा है कि उन्हें अक्टूबर 2020 से नौ महीने की अवधि के लिए फ्रांस के नैनटेस इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस स्टडी में फेलोशिप की पेशकश की गई है, जो एक शोध संस्थान है।

कुमार ने अपनी दलील में कहा था कि उन्होंने पिछले चार वर्षों में एक भी ईओएल का लाभ नहीं उठाया है और अपने पूरे कैरियर में उन्होंने केवल दो ईओएल ली हैं।

उन्होंने यह भी कहा है कि परिषद ने बिना किसी विचार-विमर्श के मनमाने ढंग से अपनी विवेकाधीन शक्ति का इस्तेमाल किया और याचिका को खारिज करने की कार्रवाई दुर्भावनापूर्ण थी।

अमित देवेंद्र

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