देश की खबरें | प्रभावशाली लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के इस्तेमाल में अधिक जिम्मेदार होना चाहिए : न्यायालय
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, सात दिसंबर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि आम लोगों के बीच अपनी ‘पहुंच, प्रभाव’ आदि को देखते हुए प्रभावशाली लोगों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल करते हुए "अधिक जिम्मेदार" होना चाहिए। न्यायालय ने यह भी कहा कि ऐसे लोगों का अपना कर्तव्य भी है।

न्यायालय ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नफरत वाले भाषणों के विभिन्न पहलुओं पर गौर किया। न्यायालय ने कहा कि नफरत वाले भाषणों का "किसी विशेष समूह के प्रति घृणा के अलावा कोई अन्य उद्देश्य नहीं है।’’

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न्यायालय ने कहा कि बहुलतावाद के लिए प्रतिबद्ध राजनीति में, घृणा फैलाने वाला भाषण लोकतंत्र में किसी भी वैध तरीके से योगदान नहीं कर सकता और वास्तव में यह समानता के अधिकार को खारिज करता है।

सर्वोच्च अदालत ने अपने उस फैसले में यह टिप्पणी की, जिसमें उसने 15 जून को एक शो के दौरान सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के संबंध में कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर टीवी एंकर अमीश देवगन के खिलाफ दर्ज कई प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया।

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न्यायमूर्ति ए एम खानविल्कर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने कहा कि प्रभावशाली लोगों को, आम लोगों के बीच अपनी पहुंच, प्रभाव और अधिकार को ध्यान में रखते हुए और जिस विशेष वर्ग से वह आते हैं, उसका ध्यान रखते हुए उनका कर्तव्य है और उन्हें अधिक जिम्मेदार होना चाहिये।

पीठ ने कहा कि अनुभव और ज्ञान के साथ, ऐसे लोगों से बेहतर स्तर के संचार कौशल की उम्मीद होती है। यह कहना ​​उचित है कि वे अपने शब्दों का उपयोग करने में सावधान रहेंगे।

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