देश की खबरें | अफगानिस्तान में विवि में महिलाओं पर पाबंदी के फैसले का विरोध करे वैश्विक समुदाय : कार्यकर्ता

नयी दिल्ली, 23 दिसंबर मानवाधिकार समूहों व कार्यकर्ताओं ने अफगानिस्तान में विश्वविद्यालयों में महिलाओं पर प्रतिबंध लगाने के तालिबान सरकार के फरमान पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है।

कार्यकर्ताओं ने वैश्विक समुदाय से अनुरोध किया कि वे तालिबान से इस फैसले को तत्काल वापस लेने की अपील करें।

अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और ब्रिटेन सहित कई देशों ने तालिबान के नवीनतम कदम को अफगान महिलाओं और लड़कियों की स्वतंत्रता पर ‘क्रूर हमला’ करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।

तालिबान ने मार्च में लड़कियों को माध्यमिक विद्यालयों में जाने से रोक दिया था।

‘ह्यूमन राइट्स वॉच’ (एचआरडब्ल्यू) ने इसे एक ‘‘शर्मनाक’’ निर्णय करार दिया जो अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन करता है।

एचआरडब्ल्यू ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘तालिबान हर दिन यह स्पष्ट कर रहा है कि वह अफगान, विशेषकर महिलाओं के मौलिक अधिकारों का सम्मान नहीं करता है।’’

‘द इंडियन मुस्लिम फॉर सेक्यूलर डेमोक्रेसी’ (आईएमएसडी) ने भी तालिबान के “पूरी तरह से महिला विरोधी फरमान” की निंदा करते हुए कहा कि उसने सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए अफगानिस्तान में महिलाओं की शिक्षा पर प्रभावी रूप से प्रतिबंध लगा दिया है।

आईएमएसडी ने एक बयान में कहा, “जब से तालिबान ने 2021 में सत्ता संभाली है, लड़कियां स्कूलों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। हालांकि उन्होंने 23 मार्च से लड़कियों के स्कूल खोलने का वादा किया था, उसी दिन उन्होंने आदेश को रद्द कर दिया। स्कूलों के साथ उन्होंने जो किया है उसे देखते हुए प्रतिबंध स्थायी प्रतीत होता है।”

बाल अधिकार कार्यकर्ता और नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि लड़कियों को शिक्षा से वंचित करना पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

सत्यार्थी ने ट्वीट किया, “महिलाओं और लड़कियों के साथ भेदभाव, दमन और दुर्व्यवहार का हर कृत्य मानवता के खिलाफ अपराध है। लेकिन अंधेरा कब तक प्रकाश को रोक सकता है? स्वतंत्रता का प्रकाश जीतेगा।”

पाकिस्तानी महिला शिक्षा कार्यकर्ता और 2014 के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने ट्वीट किया, “तालिबान देश में सभी कक्षाओं और विश्वविद्यालय के गेटों को बंद कर सकता है - लेकिन वे महिलाओं के दिमाग को कभी बंद नहीं कर सकते। वे लड़कियों को ज्ञान प्राप्त करने से नहीं रोक सकते। वे सीखने की ललक को समाप्त नहीं कर सकते।”

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