देश की खबरें | पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को स्वास्थ्य आधार पर मिली दो माह की अंतरिम जमानत
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

लखनऊ, चार सितंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने सामूहिक बलात्कार के मामले में आरोपी व पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को शुक्रवार को स्वास्थ्य के आधार पर दो माह की अंतरिम जमानत दे दी ।

अदालत ने सपा सरकार में मंत्री रहे प्रजापति को अंतरिम जमानत देते हुये पांच लाख रुपये के निजी मुचलके तथा दो-दो लाख रूपये की जमानत पेश करने को कहा है । गायत्री 15 मार्च 2017 से जेल में थे ।

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अदालत ने उन्हें निर्देश दिया है कि दो माह समाप्त होने के बाद वह अदालत के समक्ष या जेल अधीक्षक के समक्ष समर्पण कर दें ।

यह आदेश न्यायमूर्ति वेद प्रकाश वैश ने प्रजापति की दूसरी जमानत याचिका पर दिये । जमानत के साथ अदालत ने उन पर कई शर्तें भी लगायी हैं ।

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अदालत ने प्रजापति को अपना पासपोर्ट जमा करने तथा अदालत की इजाजत के बिना विदेश नहीं जाने को कहा है ।

अदालत ने प्रजापति से कहा है कि वह जमानत के दौरान पीड़िता और उसके परिवार तथा गवाहों को न तो किसी भी प्रकार से धमकायेंगे और न ही गवाहों को किसी तरह से मजबूर करेंगे ।

जमानत याचिका पर बहस करते हुये उनकी वकील रूकमिणी बोबड़े और एस के सिंह ने अदालत से कहा कि प्रजापति निर्दोष थे और उन्हें गलत तरीके से फंसाया गया है ।

उन्होंने कहा कि अदालत के समक्ष पेश किये गये साक्ष्य और डाक्टर के बयान अभियोजन पक्ष की बातों का समर्थन नही करते हैं । उन्होंने यह भी कहा कि प्रजापति गंभीर रोगों से पीड़ित हैं जिसका इलाज न तो जेल अस्पताल में है और न ही किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविदयालय में ।

प्रजापति की वकील ने मांग की कि उन्हें बेहतर इलाज के लिये कुछ समय की खातिर रिहा कर दिया जाये ।

जमानत याचिका का विरोध करते हुये सरकारी वकील ने कहा कि प्रजापति का उचित इलाज किया जा रहा है । सारे तथ्यों को ध्यान में रखते हुये अदालत ने प्रजापति को दो माह की अंतरिम जमानत दे दी ।

प्रजापति के खिलाफ लखनऊ के गौतम पल्ली पुलिस थाने में 2017 में मामला दर्ज किया गया था और उसके बाद 15 मार्च 2017 को उन्हें जेल भेज दिया गया था ।

इससे पहले प्रजापति को सत्र अदालत से जमानत मिली थी लेकिन उनके जेल से रिहा होने के पहले ही उच्च न्यायालय ने उनकी जमानत रदद कर दी थी ।

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