Marathi Mandatory in Schools: महाराष्ट्र सरकार की स्कूलों पर सख्ती, कक्षा 1-10 तक मराठी पढ़ाना अनिवार्य, नियम तोड़ने पर लगेगा ₹1 लाख का जुर्माना
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Marathi Mandatory in Schools:  महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी शिक्षा बोर्डों के स्कूलों के लिए मराठी भाषा को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाने के नियम को और कड़ा कर दिया है. स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी नए शासनादेश (GR) के अनुसार, जो स्कूल कक्षा 1 से 10 तक मराठी नहीं पढ़ाएंगे, उन पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. साथ ही, बार-बार नियमों की अनदेखी करने पर स्कूलों की मान्यता भी रद्द की जा सकती है.

सभी बोर्डों के लिए लागू होगा नियम

यह निर्देश स्पष्ट करता है कि महाराष्ट्र में संचालित होने वाले सभी बोर्ड, चाहे वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), ICSE, अंतरराष्ट्रीय बोर्ड (IB/IGCSE) हों या राज्य बोर्ड, सभी को कक्षा 1 से 10 तक मराठी पढ़ाना अनिवार्य है. यह कदम 'महाराष्ट्र अनिवार्य मराठी भाषा शिक्षण और सीखना अधिनियम, 2020' के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है . यह भी पढ़े:  महाराष्ट्र में रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के लिए मराठी अनिवार्य: 1 मई से लागू होगा नियम, भाषा न आने पर रद्द होगा लाइसेंस

कार्रवाई की प्रक्रिया और समय सीमा

नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ विभाग ने एक चरणबद्ध प्रक्रिया तय की है:

  • नोटिस और स्पष्टीकरण: नियम तोड़ने वाले स्कूलों को सबसे पहले नोटिस जारी किया जाएगा. स्कूल प्रबंधन को 15 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण देना होगा.

  • आर्थिक दंड: यदि स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो स्कूल पर ₹1 लाख तक का जुर्माना लगाया जाएगा.

  • अपील का अवसर: स्कूल प्रबंधन को इस निर्णय के खिलाफ 30 दिनों के भीतर अपील करने का मौका मिलेगा.

  • मान्यता रद्द करना: यदि अपील के बाद भी स्कूल आदेश का पालन नहीं करता है, तो अगले शैक्षणिक वर्ष से उस स्कूल की मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी.

विशेषज्ञों की मांग

मराठी अभ्यास केंद्र के संस्थापक दीपक पवार और अन्य शिक्षाविदों ने इस कदम का स्वागत किया है, लेकिन साथ ही कुछ सुधारों की मांग भी की है. पवार का तर्क है कि वर्तमान ग्रेडिंग प्रणाली और केवल 50 अंकों के मूल्यांकन से इस विषय का महत्व कम हो जाता है. उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि बोर्ड परीक्षाओं में मराठी को 100 अंकों का अनिवार्य पेपर बनाया जाना चाहिए ताकि स्कूल और छात्र इसे प्राथमिकता दें.

वर्तमान स्थिति

इससे पहले, CBSE और ICSE जैसे बोर्डों में मराठी केवल कक्षा 8 तक ही अनिवार्य थी. हालांकि, 2020-21 शैक्षणिक वर्ष से इसे कक्षा 10 तक बढ़ा दिया गया था. हाल के सर्वेक्षणों में सामने आया कि मुंबई, ठाणे और पुणे जैसे बड़े शहरों के कई निजी स्कूलों ने अब तक न तो मराठी विषय शुरू किया है और न ही इसके लिए योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की है. इसी लापरवाही को रोकने के लिए सरकार ने अब आर्थिक दंड और मान्यता रद्द करने का कड़ा रुख अपनाया है.