मुजफ्फरनगर (उप्र), पांच जून उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक किसान का शव पेड़ से लटका मिला और अधिकारियों को संदेह है कि व्यक्ति ने आत्महत्या की है।
किसान कोरोना वायरस महामारी के चलते लागू लॉकडाउन की वजह से कथित तौर पर अपना गन्ना नहीं बेच पाया था।
इसको लेकर किसानों और मृतक ओमपाल सिंह के परिवार के सदस्यों ने शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर मांग की कि इस संबंध में चीनी मिल अधिकारियों के खिलाफ किसानों से गन्ना खरीदने में विफल रहने को लेकर मामला दर्ज किया जाए।
हालांकि प्रदर्शनकारियों ने जिला प्राधिकारियों द्वारा सिंह के परिवार के लिए 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा करने के बाद अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया। सिंह के परिवार ने शुरू में शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था। हालांकि बाद में सिंह का परिवार मान गया और पैतृक गांव सिसोली में उसका अंतिम संस्कार किया।
इस बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट करके भाजपा सरकार की आलोचना की। उन्होंने किसानों को गन्ने के बकाये का भुगतान नहीं होने पर सरकार की चुप्पी पर सवाल भी उठाया।
उन्होंने किसान की आत्महत्या को लेकर मीडिया की खबर को टैग करते हुए ट्वीट किया, ‘‘गन्ने की अपनी फसल को खेत में सूखता देख और पर्ची न मिलने के चलते मुजफ्फरनगर के एक गन्ना किसान ने आत्महत्या कर ली। सोचिए इस आर्थिक तंगी के दौर में भुगतान न पाने वाले किसान परिवारों पर क्या बीत रही होगी।’’
उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘भाजपा का दावा था कि 14 दिन में पूरा भुगतान दिया जाएगा लेकिन हजारों करोड़ रुपया दबाकर चीनी मिलें बंद हो चुकी हैं।’’
प्रियंका ने कहा, ‘‘मैंने दो दिन पहले ही सरकार को इसके लिए आगाह किया था। सोचिए, इस आर्थिक तंगी के दौर में भुगतान न पाने वाले किसान परिवारों पर क्या बीत रही होगी। लेकिन भाजपा सरकार अब 14 दिन में गन्ना भुगतान का नाम तक नहीं लेती।’’
ओमपाल सिंह बृहस्पतिवार को अपने घर से खेत के लिए निकला था और बाद में उसका शव पेड़ से लटका हुआ मिला।
किसान के परिवार ने पुलिस को बताया कि वह कोरोना वायरस के मद्देनजर लागू लॉकडाउन के कारण गन्ने की फसल नहीं बेच पाया था जिसकी वजह से वह अवसाद में था।
हालांकि अधिकारियों ने इस दावे से इनकार किया कि किसान ने अपने गन्ने की बिक्री नहीं होने की वजह से आत्महत्या की है।
जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे ने कहा कि प्राथमिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि किसान ने जमीन को लेकर हुए पारिवारिक विवाद की वजह से आत्महत्या की है।
उन्होंने कहा कि मिलों में गन्ने की खरीद पर कोई रोक नहीं थी।
जिलाधिकारी ने प्रदर्शन स्थल का दौरा किया और मृतक किसान के परिवार के लिए 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की।
घोषणा के बाद प्रदर्शनकारी किसानों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया और सिंह के परिवार ने उसका अंतिम संस्कार किया। पोस्टमार्टम के बाद शव सौंपे जाने पर, शुरू में परिवार ने अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था।
वहीं मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से सांसद एवं केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान प्रदर्शन स्थल पर गए। उनके साथ इस दौरान बुढ़ाना से भाजपा विधायक उमेश मलिक भी मौजूद थे।
इस बीच राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने परिवार के लिए अलग से एक एक लाख रुपये की वित्तीय सहायता की घोषणा की।
इसी बीच भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के प्रमुख नरेश टिकैत ने कहा कि लॉकडाउन के चलते अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने की वजह से किसान वित्तीय दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।
टिकैत ने किसानों के बिजली बिल और अन्य बकाए पूरी तरह से माफ किये जाने की मांग की।
बीकेयू ने सिंह के परिवार के लिए 50 हजार रुपये की वित्तीय सहायता की भी घोषणा की।
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