नयी दिल्ली, 16 जून चुनावी हलफनामों में झूठी जानकारी देने वालों पर शिकंजा कसने की कोशिश करते हुए निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को फैसला किया कि उम्मीदवारों द्वारा "गंभीर चूक" के मामलों को जांच प्राधिकारियों को भेजा जाए।
अपनी बैठक में आयोग ने देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और नैतिक चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनावी हलफनामों में गलत सूचना की "चुनौती" से "सख्ती से निपटने " का निर्णय लिया।
एक बयान में, आयोग ने कहा कि उसे कुछ प्रत्याशियों द्वारा दायर हलफनामों में झूठी जानकारियां देने के संबंध में शिकायतें मिल रही हैं।
फिलहाल, व्यक्ति को जन प्रतिनिधि कानून 1951 की धारा 125ए के तहत जरूरी कार्रवाई के लिए अदालत में ऐसी शिकायत दर्ज करानी होती है।
बयान में कहा गया है कि आयोग ने इस स्थिति की समीक्षा की और फैसला किया कि वह ऐसी शिकायतों का संज्ञान लेगा जिनमें उम्मीदवार की तरफ से गंभीर चूक का संकेत मिलता हो और मामला दर मामला के आधार पर उसे प्रासंगिक जांच प्राधिकारी को भेजेगा।
लोग अपनी ऐसी शिकायतों को लेकर अदालत का रुख कर सकते हैं।
आयोग ने कुछ साल पहले उच्चतम न्यायालय को बताया था कि नामांकन पत्र दाखिल करने के वक्त झूठा हलफनामा देने की कुल सजा जन प्रतिनिधि कानून की धारा 125ए के तहत छह महीने का कारावास या जुर्माना या दोनो हैं।
चुनाव सुधार के तहत आयोग ने 2011 में केंद्र सरकार को सिफारिश की थी कि कानून की धारा 125ए में संशोधन किया जाए और झूठा हलफनामा देने पर दो साल की सजा की जाए।
मामला केंद्रीय कानून मंत्रालय के पास लंबित है।
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