9 अप्रैल की बड़ी खबरें और अपडेट्स
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

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ईरान-अमेरिका की बातचीत के लिए इस्लामाबाद में खाली करवाया गया होटल

23 फीसदी घट गई अमीर देशों द्वारा दी जाने वाली विकास सहायता

जर्मनी में पड़ोसी देशों के मुकाबले ईंधन की कीमतों में भारी उछाल

अजित पवार के बेटे बने राज्यसभा सांसद, पत्नी बन सकती हैं विधायक

ट्रंप ने कहा, "जब हमें जरूरत थी तब नाटो वहां नहीं था"

'असली समझौता' होने तक ईरान के पास डटी रहेगी अमेरिकी सेना: ट्रंप

आईएमएफ ने श्रीलंका के लिए 70 करोड़ डॉलर के कर्ज को मंजूरी दी

इस्राएल का दावा, हिज्बुल्लाह प्रमुख का मुख्य सहयोगी मारा गया

इस्राएली सेना (आईडीएफ) ने गुरुवार को दावा किया है कि उसने हिज्बुल्लाह के शीर्ष नेता नईम कासिम के भतीजे, अली यूसुफ हरशी को एक हमले में मार गिराया है. इस्राएली रक्षा बलों ने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा कि हरशी, नईम कासिम के कार्यालय के प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे.

हिज्बुल्लाह की ओर से अभी तक हरशी की मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. हालांकि, लेबनानी सुरक्षा सूत्रों ने बताया है कि बुधवार शाम को एक 10 मंजिला इमारत के उस फ्लैट पर भीषण हमला हुआ था, जहां कथित तौर पर हरशी ठहरे हुए थे.

इस घटनाक्रम के बीच, इस्राएल के रक्षा मंत्री इस्राएल काट्ज कई बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि हिज्बुल्लाह प्रमुख नईम कासिम भी उनकी हिट लिस्ट में शामिल हैं. गौरतलब है कि लंबे समय तक हिज्बुल्लाह का नेतृत्व करने वाले हसन नसरल्लाह के सितंबर 2024 में इस्राएली हमले में मारे जाने के बाद, नईम कासिम ने अक्टूबर 2024 में संगठन की कमान संभाली थी.

ईरान-अमेरिका की बातचीत के लिए इस्लामाबाद में खाली करवाया गया होटल

इस्राएल ने गुरुवार, 9 अप्रैल को लेबनान में और अधिक ठिकानों पर बमबारी की. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि इस्राएल के हालिया हमलों में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई है और 1,000 से अधिक लोग घायल हुए हैं. ये हमले ईरान और अमेरिका के बीच अस्थायी युद्धविराम की घोषणा के बाद हुए हैं. इस्राएल का कहना है कि लेबनान इस युद्धविराम समझौते में शामिल नहीं है. वहीं, ईरान का कहना है कि लेबनान पर इस्राएली हमले युद्धविराम का गंभीर उल्लंघन हैं. लेबनान पर सहमति न बनने के चलते यह युद्धविराम खतरे में पड़ता दिख रहा है.

दूसरी ओर, इस अस्थायी युद्धविराम में अहम भूमिका निभाने वाला पाकिस्तान अब आगे की बातचीत के लिए तैयारी कर रहा है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, संभावित बातचीत के पहले चरण से पहले इस्लामाबाद में सुरक्षा इंतजाम बढ़ा दिए गए हैं. फाइव स्टार सेरेना होटल के तीन किलोमीटर के दायरे में आने वाली सड़कों को आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है. संभावना है कि ईरानी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य इसी होटल में रुकेंगे. होटल में रुके लोगों को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का हवाला देते हुए होटल छोड़ने के लिए कह दिया गया है.

नेपाल: भ्रष्टाचार के आरोप में पूर्व पीएम शेर बहादुर देउबा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी

नेपाल के अधिकारियों ने कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है. 'डिपार्टमेंट ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग इन्वेस्टिगेशन' के अनुरोध पर काठमांडू की अदालत ने उनकी पत्नी और पूर्व विदेश मंत्री आरजू राणा देउबा के खिलाफ भी वारंट जारी किया है. नई सरकार के सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार की जांच के दायरे में आने वाले देउबा नवीनतम और सबसे बड़े हाई-प्रोफाइल नेता बन गए हैं.

नेपाली कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और पांच बार प्रधानमंत्री रह चुके देउबा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कहा कि उनके परिवार की संपत्ति को लेकर झूठा प्रचार किया जा रहा है. देउबा ने जानकारी दी कि वे और उनकी पत्नी वर्तमान में लंबी अवधि के चिकित्सा उपचार के लिए विदेश में हैं. हालांकि उन्होंने सटीक स्थान का खुलासा नहीं किया, लेकिन नेपाली मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार दोनों हाल ही में सिंगापुर में थे और अब पुलिस उनके खिलाफ इंटरपोल नोटिस जारी करने की तैयारी कर रही है.

यह बड़ी कार्रवाई नेपाल में हुए हालिया सत्ता परिवर्तन के ठीक एक महीने बाद हुई है. 35 वर्षीय पूर्व रैपर और नेता बालेन्द्र शाह ने युवाओं के नेतृत्व वाले राजनीतिक बदलाव के वादे के साथ हाल ही में भारी बहुमत से चुनाव जीता है और प्रधानमंत्री का पद संभाला है.

23 फीसदी घट गई अमीर देशों द्वारा दी जाने वाली विकास सहायता

साल 2025 में दुनिया के सबसे अमीर देशों द्वारा गरीब देशों को दी जाने वाली विदेशी विकास सहायता में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है. आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) द्वारा गुरुवार को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में यह सहायता वार्षिक आधार पर 23.1 फीसदी घटकर 174.3 अरब डॉलर रह गई है. संगठन के मुताबिक, विकास सहायता में यह अब तक की सबसे बड़ी वार्षिक गिरावट है.

ओईसीडी की 'विकास सहायता समिति' में अमेरिका, जापान और यूरोपीय संघ जैसी शक्तियां शामिल हैं. इस समिति के मुताबिक, 34 सदस्य देशों में से 26 ने अपनी सहायता राशि में कटौती की है. यह कटौती मुख्य तौर पर घरेलू आर्थिक और राजनीतिक दबाव के चलते की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, सहायता में आई 75 फीसदी कमी के लिए अकेला अमेरिका जिम्मेदार था.

ओईसीडी ने रिपोर्ट में कहा, "अमेरिकी सहायता में आई भारी गिरावट के कारण, जर्मनी पहली बार विदेशी विकास सहायता का सबसे बड़ा प्रदाता बन गया." जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन और जापान आमतौर पर शीर्ष पांच दानदाताओं में शामिल होते हैं. ओईसीडी के मुताबिक, इन देशों ने भी 2025 में अपनी सहायता में कटौती की.

जर्मनी में पड़ोसी देशों के मुकाबले ईंधन की कीमतों में भारी उछाल

यूरोपीय आयोग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, जर्मनी में पेट्रोल की कीमतों में यूरोपीय संघ (ईयू) के अन्य सदस्य देशों की तुलना में काफी अधिक वृद्धि दर्ज की गई है. 30 मार्च से 6 अप्रैल के बीच जर्मनी में पेट्रोल की कीमतें लगभग 11 सेंट प्रति लीटर बढ़ गईं. इसके विपरीत, जर्मनी के पड़ोसी देशों में कीमतों में केवल कुछ सेंट की बढ़ोतरी हुई, जबकि पोलैंड और ऑस्ट्रिया जैसे देशों में सरकारी हस्तक्षेप के बाद कीमतों में गिरावट देखी गई.

कीमतों में इस उछाल का समय जर्मनी में लागू किए गए एक नए कानून से मेल खाता है, जिसे "12 बजे का नियम" कहा जा रहा है. इस कानून के तहत गैस स्टेशनों को दिन में केवल एक बार, दोपहर 12 बजे ही अपनी कीमतें बढ़ाने की अनुमति है. यह नीति पड़ोसी देश ऑस्ट्रिया के मॉडल पर आधारित है. हालांकि, आलोचकों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि इससे कीमतें घटने के बजाय बढ़ सकती हैं, क्योंकि पेट्रोल पंप मालिक बाद में कीमतें न बढ़ा पाने की भरपाई के लिए दोपहर 12 बजे ही बड़ी बढ़ोतरी कर सकते हैं.

जर्मनी के मोटर चालकों के संघ 'एडीएसी' के अनुसार, नए नियम के लागू होने के शुरुआती दिनों में ही देशभर में औसत कीमतों में 10 सेंट से अधिक की उछाल देखी गई. अर्थव्यवस्था मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अभी यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि नया कानून अपने उद्देश्य में सफल रहा है या नहीं. मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण भी ईंधन की कीमतों पर वैश्विक दबाव बना हुआ है, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई है.

असम में 85 और पुडुचेरी में 89 फीसदी हुई वोटिंग, केरल पिछड़ा

असम विधानसभा चुनाव के मतदान में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है. चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, 9 अप्रैल को हुए मतदान में असम में करीब 85.21 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में इससे भी ज्यादा वोटिंग हुई है. वहां, 89.45 फीसदी वोटरों ने अपना वोट डाला. वहीं, केरल में 77.69 फीसदी मतदाताओं ने मतदान किया. इन आंकड़ों में अभी और बढ़ोतरी हो सकती है.

असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए 722 उम्मीदवार मैदान में उतरे. असम में पिछले दो बार से बीजेपी चुनाव जीतती आ रही है. केरल की 140 विधानसभा सीटों के लिए 883 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा. केरल में पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली यूडीएफ लगातार दो बार से जीतती आ रही है. वहीं, पुडुचेरी की 30 सीटों के लिए मतदान हुआ. पुडुचेरी में लड़ाई एनडीए गठबंधन बनाम कांग्रेस-डीएमके गठबंधन के बीच है.

आईएमएफ ने श्रीलंका के लिए 70 करोड़ डॉलर के कर्ज को मंजूरी दी

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने श्रीलंका के लिए 70 करोड़ डॉलर के कर्ज को मंजूरी दे दी है. आईएमएफ ने श्रीलंका को आर्थिक सुधारों में तेजी लाने के लिए भी कहा है, ताकि 2022 के बाद आयी आर्थिक बेहतरी को बरकरार रखा जा सके और मध्य पूर्व संकट से उपजे झटकों का सामना किया जा सके. आईएमएफ ने चार साल के 2.9 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज की हालिया किश्त जारी करते हुए कई शर्तें भी लगाई हैं, जिनमें बिजली कीमतों की लागत वसूली भी शामिल है.

ईरान युद्ध के चलते श्रीलंका में ईंधन की किल्लत हो गई है और कीमतें भी करीब एक तिहाई बढ़ गई हैं. इस बीच सरकार ने कहा है कि वह ईंधन पर सब्सिडी देने में 20 करोड़ डॉलर खर्च करेगी. आईएमएफ ने इन ऊर्जा सब्सिडियों का विरोध किया है. आईएमएफ चाहता है कि श्रीलंका बिजली उत्पादन की लागत को, बिजली बिलों के जरिए लोगों से वसूले. वहीं, श्रीलंका छोटे उपभोक्ताओं को बिजली बिल पर सब्सिडी देता है.

श्रीलंका ने साल 2022 में अपनी सबसे गंभीर आर्थिक मंदी का सामना किया था. इसके बाद स्थिति धीरे-धीरे सुधरने लगी लेकिन पिछले साल नवंबर में चक्रवाह दित्वाह ने श्रीलंका के बुनियादी ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया. विश्व बैंक के अनुमान के मुताबिक, श्रीलंका को 4.1 अरब डॉलर का नुकसान हुआ. जिसके बाद श्रीलंका को आपदा राहत के लिए आईएमएफ से 20 करोड़ डॉलर का कर्ज मांगना पड़ा.

बांग्लादेश ने दोहराई शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग, अधिक ईंधन भी मांगा

बांग्लादेश की नई सरकार के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान अपनी पहली आधिकारिक भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुंचे हैं. इस यात्रा को दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण रिश्तों में सुधार के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. 8 अप्रैल को हुई उच्च स्तरीय बैठकों के दौरान बांग्लादेश ने भारत से ईंधन और उर्वरक की आपूर्ति बढ़ाने का अनुरोध किया, साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग को भी दोहराया.

खलीलुर रहमान ने भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी के साथ ऊर्जा सहयोग पर चर्चा की. बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, पुरी ने संकेत दिया है कि ईंधन आपूर्ति बढ़ाने के अनुरोध पर "तत्काल और अनुकूल रूप से" विचार किया जाएगा. भारत ऊर्जा संकट से जूझ रहे बांग्लादेश को पहले भी डीजल शिपमेंट भेज चुका है, जिसके लिए खलीलुर रहमान ने आभार व्यक्त किया.

खलीलुर रहमान ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ यात्रा प्रतिबंधों में छूट देने के बारे में भी चर्चा की. बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, भारत ने कहा है कि आने वाले हफ्तों में बांग्लादेशी नागरिकों के लिए वीजा प्रक्रिया आसान की जाएगी, खासतौर पर मेडिकल और बिजनेस वीजाओं के लिए. मौजूदा समय में दोनों देशों ने एक-दूसरे के नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं बंद कर रखी हैं.

खलीलुर रहमान ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से भी मुलाकात की है. इस दौरान व्यापाक क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों के बारे में बात हुई. साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई.

अजित पवार के बेटे बने राज्यसभा सांसद, पत्नी बन सकती हैं विधायक

28 जनवरी, 2026 को विमान दुर्घटना में जान गंवाने वाले महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार राज्यसभा सांसद बन गए हैं. उन्होंने 9 अप्रैल को उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की मौजूदगी में पद की शपथ ली. वे महाराष्ट्र से निर्वाचित होकर राज्यसभा पहुंचे हैं. यह सीट उनकी मां और अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी.

अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. इसके बाद उन्हें राज्यसभा सीट छोड़नी पड़ी और अब वे विधानसभा जाने के लिए चुनाव लड़ रही हैं. अजित पवार के निधन के बाद उनकी बारामती सीट खाली हो गई थी. सुनेत्रा उसी सीट से उपचुनाव लड़ रही हैं. वहां, 23 अप्रैल को वोट डाले जाने हैं.

इस उपचुनाव में सुनेत्रा पवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है क्योंकि कांग्रेस उम्मीदवार ने अपना नामांकन वापस ले लिया है. न्यूज एजेंसी आईएएनएस ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल से नामांकन वापस लेने का अनुरोध किया था.

आईएएनएस के मुताबिक, एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से इस बारे में बात की थी. एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने भी कांग्रेस से नामांकन वापस लेने की अपील की थी. महाराष्ट्र की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाला पवार परिवार चाहता है कि अजित पवार की पारंपरिक सीट से चुनाव लड़ रही सुनेत्रा निर्विरोध यह चुनाव जीत जाएं.

ताइवान की विपक्षी नेता बोलीं, आसमान में मिसाइलें नहीं पक्षी उड़ने चाहिए

ताइवान की विपक्षी नेता चेंग ली-वुन ने अपनी चीन यात्रा के दौरान शांति का संदेश देते हुए कहा कि आसमान में मिसाइलें नहीं, बल्कि पक्षी उड़ने चाहिए और पानी में लड़ाकू जहाज नहीं, बल्कि मछलियां तैरनी चाहिए. ताइवान की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी कुओमिंतांग की अध्यक्ष चेंग दो दिवसीय चीन यात्रा पर हैं. उन्होंने इस यात्रा को एक “शांति मिशन” बताया है, ताकि दोनों देशों के बीच तनाव कम किया जा सके.

हालांकि, चेंग की चीन यात्रा के दौरान भी ताइवान के आसपास चीन की सैन्य गतिविधियां जारी हैं. ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार सुबह कहा कि पिछले 24 घंटों के दौरान उसने द्वीप के आसपास छह चीनी सैन्य विमान और आठ लड़ाकू जहाज देखे हैं.

9 अप्रैल को चेंग की मुलाकात, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ होने की भी उम्मीद है. ताइवान सरकार ने उनसे कहा है कि वे चीन से उसकी धमकियों को रोकने के लिए कहें. ताइवान का कहना है कि चीन को ताइवान की लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार के साथ बातचीत करनी चाहिए. वहीं, चीन ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते को एक “अलगाववादी” बताता है और उनके साथ बातचीत करने से इनकार करता है.

ट्रंप ने कहा, "जब हमें जरूरत थी तब नाटो वहां नहीं था"

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बुधवार को व्हाइट हाउस में नाटो महासचिव मार्क रुटे के साथ हुई बैठक के दौरान सैन्य गठबंधन के प्रति अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की है. ईरान के खिलाफ अमेरिका और इस्राएल के युद्ध में नाटो सहयोगियों की सक्रिय भागीदारी न होने से ट्रंप पूरी तरह निराश दिखे. बैठक के तुरंत बाद उन्होंने ट्रुथ सोशल पर बड़े अक्षरों में लिखा, "जब हमें जरूरत थी, तब नाटो वहां नहीं था और अगर हमें फिर से जरूरत पड़ी तो वे वहां नहीं होंगे."

बंद दरवाजों के पीछे हुई इस चर्चा के बाद मार्क रुटे ने एक साक्षात्कार में इसे स्पष्ट और खुली बातचीत बताया. रुटे को ट्रंप के साथ तालमेल बिठाने की उनकी क्षमता के कारण अक्सर "ट्रंप विस्परर" कहा जाता है. उन्होंने कहा कि यह दो अच्छे दोस्तों के बीच की चर्चा थी. यह बैठक अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो सप्ताह के अस्थाई युद्धविराम के ठीक एक दिन बाद हुई है.

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर 32 सदस्यीय इस सैन्य गठबंधन से बाहर निकलने की संभावना पर चर्चा की है. ट्रंप पहले भी कई बार नाटो को "कागजी शेर" करार दे चुके हैं और यूरोप व उत्तरी अमेरिका के इस गठबंधन से हटने की धमकी दे चुके हैं. उनका तर्क है कि जब अमेरिका महत्वपूर्ण सैन्य संघर्षों में शामिल होता है, तो नाटो सहयोगी अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहते हैं.

ईरान ने जारी किया होर्मुज जलमार्ग में बिछी समुद्री 'बारूदी सुरंगों' का नक्शा

ईरानी समाचार एजेंसियों ने गुरुवार को एक नक्शा जारी किया है, जिससे संकेत मिलता है कि युद्ध के दौरान रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज जलडमरूमध्य के मुख्य शिपिंग मार्ग में समुद्री 'बारूदी सुरंगें' बिछाई थीं. इस नक्शे में मुख्य ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम वाले क्षेत्र को फारसी भाषा में 'खतरनाक क्षेत्र' के रूप में चिह्नित किया गया है. यह वही मार्ग है जिसे वैश्विक तेल और माल ढुलाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.

सुरंगों के इस कथित खतरे को देखते हुए ईरान ने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए वैकल्पिक मार्गों की घोषणा की है. नक्शे के अनुसार, जहाजों को अब ईरान की मुख्य भूमि के करीब लारक द्वीप के उत्तरी जल क्षेत्र से होकर गुजरने का सुझाव दिया गया है. युद्ध के दौरान भी कुछ जहाजों को इसी वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करते हुए देखा गया था. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि रिवोल्यूशनरी गार्ड ने मुख्य मार्ग से इन समुद्री सुरंगों को हटाना शुरू किया है या नहीं.

नक्शे पर दी गई तारीखें 28 फरवरी से 9 अप्रैल तक की हैं, जो इस क्षेत्र में लंबे समय से जारी तनाव और सैन्य गतिविधियों की पुष्टि करती हैं. बुधवार को ऐसी खबरें आई थीं कि ईरान ने इस सामरिक जलमार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया है, जिसे व्हाइट हाउस ने पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया था.

2028 में COP-33 की मेजबानी से पीछे हटा भारत

भारत ने साल 2028 में होने वाले जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (कॉप33) की मेजबानी करने का अपना प्रस्ताव वापस ले लिया है. मामले की जानकारी रखने वाले दो सरकारी अधिकारियों ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के साथ यह जानकारी साझा की है. अधिकारियों के मुताबिक, भारत ने इस महीने अपने इस फैसले की जानकारी दे दी है. हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं है कि यह कदम क्यों उठाया गया.

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2023 में इस सम्मेलन की मेजबानी करने का प्रस्ताव दिया था. मेजबानी से पीछे हटने की खबर सबसे पहले क्लाइमेट होम न्यूज ने साझा की थी. उनकी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अपनी प्रतिबद्धताओं की समीक्षा करने के बाद मेजबानी नहीं करने का फैसला लिया. इसके लिए एक भारतीय अधिकारी द्वारा एशिया-प्रशांत समूह के अध्यक्ष को लिखे गए पत्र का हवाला दिया गया है.

भारत के पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है. कॉप सम्मेलन पूरी दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण आयोजन होता है, जहां भविष्य के पर्यावरण लक्ष्यों पर चर्चा की जाती है. इस साल कॉप31 का आयोजन तुर्की में होना है. वहीं, 2027 में कॉप32 का आयोजन इथियोपिया में किया जाना है.

केरलम, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान जारी

भारतीय राज्य केरलम, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की विधानसभा सीटों के लिए गुरुवार, 9 अप्रैल को मतदान हो रहा है. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, केरलम की 140, असम की 126 और पुडुचेरी की 30 सीटों के लिए वोट डाले जा रहे हैं. वोटों की गिनती अगले महीने 4 मई को होगी.

केरल की 140 विधानसभा सीटों के लिए 883 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं. राज्य के 2.6 करोड़ से ज्यादा मतदाता इनकी हार-जीत का फैसला करेंगे. केरल में पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली यूडीएफ लगातार तीसरी बार सत्ता में आने का प्रयास कर रही है. वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ की कोशिश राज्य में सत्ता परिवर्तन करने की है.

असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए 722 उम्मीदवार मैदान में हैं. राज्य के 2.5 करोड़ से ज्यादा मतदाता इनकी हार-जीत का फैसला करेंगे. असम में पिछले दो बार से बीजेपी चुनाव जीतती आ रही है. पार्टी की कोशिश लगातार तीसरी बार भी अपना झंडा फहराने की होगी. वहीं, कांग्रेस ने सत्ता में वापसी के लिए छह पार्टियों के साथ गठबंधन किया है.

पुडुचेरी में 30 विधानसभा सीटों पर विजेताओं का फैसला करीब 10 लाख वोटर करेंगे, जिनमें करीब 5.39 लाख महिलाएं और करीब 4.74 लाख पुरुष हैं. पुडुचेरी में लड़ाई एनडीए गठबंधन बनाम कांग्रेस-डीएमके गठबंधन के बीच है. इसके अलावा, अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी टीवीके ने भी केंद्र शासित प्रदेश में अपने उम्मीदवार उतारे हैं.

लेबनान पर इस्राएली हमले के बाद ईरान ने दी युद्धविराम खत्म करने की धमकी

लेबनान में इस्राएल द्वारा किए गए हवाई हमलों में कम से कम 182 लोगों की मौत और 900 अन्य के घायल होने के बाद मध्य पूर्व में स्थिति फिर से तनावपूर्ण हो गई है. इन हमलों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान ने चेतावनी दी है कि वह युद्धविराम को समाप्त कर अपनी सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू कर सकता है.

इस मुद्दे पर एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान का 10-सूत्रीय प्रस्ताव उन शर्तों का हिस्सा नहीं था जिन पर व्हाइट हाउस ने युद्ध रोकने के लिए सहमति जताई थी. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका ने कभी भी लेबनान को युद्धविराम का हिस्सा नहीं माना था. उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर ईरान लेबनान के मुद्दे पर इस बातचीत को विफल होने देता है, तो यह पूरी तरह से उनका अपना फैसला होगा, क्योंकि उस क्षेत्र से उनका सीधा कोई लेना-देना नहीं है.

दूसरी ओर, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने युद्धविराम के भविष्य को लेकर गंभीर आशंकाएं जताई हैं. उन्होंने एक्स पर लिखा कि बातचीत के लिए तय किए गए व्यावहारिक आधार का पहले ही उल्लंघन हो चुका है, जिससे आगे की वार्ता अब अनुचित हो गई है. गालिबाफ ने 10-सूत्रीय प्रस्ताव की तीन शर्तों के कथित उल्लंघनों का भी जिक्र किया, जिनमें लेबनान में जारी इस्राएली हमले, ईरानी हवाई क्षेत्र में ड्रोन का प्रवेश और ईरान के संवर्धन के अधिकार को नकारना शामिल है.