जर्मनी में हुए एक सर्वे में लोगों ने कहा है कि चांसलर मैर्त्स नौकरशाही को कम करने के अपने वादे पर अब तक खरे नहीं उतरे हैं.जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की सरकार ने वादा किया था कि उनकी सरकार में लोगों को लाल फीताशाही से थोड़ी राहत जरूर मिलेगी. लेकिन यूगव के एक हालिया सर्वेक्षण से पता चला है कि लोगों को लगता है कि मौजूदा जर्मन सरकार अपने इस वादे को पूरा करने में अब तक नाकाम रही है. नौकरशाही में कटौती के जो वादे किए गए थे, उनका असर अभी तक ज्यादातर नागरिकों और उद्यमियों को महसूस नहीं हुआ है.
यूगव के सर्वे में सामने आया है कि 66 फीसदी जर्मन नागरिकों का मानना है कि फ्रीडरिष मैर्त्स के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यभार संभालने के बाद भी नौकरशाही का बोझ लगभग वैसा ही बना हुआ है. सर्वे में शामिल 22 फीसदी लोगों का तो यह तक मानना है कि नौकरशाही अब और भी बदतर हो गई है. केवल चार फीसदी ही ऐसे लोग हैं जो सोचते हैं कि मई 2025 से नौकरशाही के बोझ में कमी आई है, जबकि आठ फीसदी ने कहा कि वे इस मामले में फिलहाल कोई भी राय नहीं रखते हैं.
यह सर्वेक्षण 27-30 मार्च के बीच बर्लिन के यूरोपीयन सेंटर फॉर डिजिटल कम्पेटेटिवनेस की तरफ से बर्लिन के ईएससीपी बिजनस स्कूल ने कराया है. चांसलर मैर्त्स की पार्टी सीडीयू और उसकी सहयोगी पार्टियों क्रिश्चियन सोशल यूनियन और सोशल डेमोक्रेट्स ने अपने गठबंधन समझौते में नौकरशाही के व्यापक खात्मे पर सहमति जताई थी.
नौकरशाही से 150 अरब यूरो का नुकसान
यूरोपीयन सेंटर फॉर डिजिटल कम्पेटेटिवनेस के संस्थापक फिलिप माइजनर ने कहा कि लोग अब और घोषणाएं नहीं चाहते, वे चाहते हैं कि राज्य सरल तरीके से काम करना शुरू करे. इसी संस्था के सह-संस्थापक क्लाउस श्वाइन्सबर्ग ने कहा कि मौजूदा गठबंधन के कार्यकाल के लगभग 11 महीने बाद, सर्वे के नतीजे बताते हैं कि मैर्त्स डिजिटलीकरण बढ़ाने और नौकरशाही को कम करने में साफ तौर पर विफल रहे हैं.
जर्मनी की मौजूदा सरकार के इस वादे को सिस्टम के आधुनिकीकरण और सुधार के जरिये पूरा किया जाना था. निवेश को प्रभावी बनाने के लिए, इसमें कहा गया था कि सरकार सभी सरकारी कामों में दक्षता और डिजिटलीकरण को शामिल करेगी. लेकिन सर्वे के अनुसार, कंपनियों ने ऐसा होता बहुत कम महसूस किया है. सर्वे में 558 कंपनी मालिकों, प्रबंधन और कार्यकारी नेतृत्व के पदों पर काम करने वाले लोग शामिल थे.
इन लोगों में से 31 फीसदी ने तो कहा कि उन्होंने कागजी कार्रवाई को और ज्यादा होता महसूस किया है. वहीं 63 फीसदी लोगों ने कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यभार संभालने के बाद से नौकरशाही का बोझ वैसे का वैसा ही बना हुआ है. केवल चार फीसदी लोगों ने कहा कि उन्हें नौकरशाही के बोझ में कमी महसूस हुई, जबकि दो फीसदी लोगों कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है.
जर्मन सरकार ने पिछले साल 200 सरकार के आधुनिकीकरण के लिए 200 बिंदुओ वाली एक योजना तैयार की थी. चांसलर मैर्त्स ने भी तब कहा था कि ये उनकी प्राथमिकता है. इस योजना में कागजी दस्तावेजों की जगह ईमेल, एक बार में (वन टाइम) डेटा कलेक्शन, कागजी कार्रवाई में कटौती जैसे कदम शामिल किए गए थे. इफो इंस्टीट्यूट फॉर इकॉनमिक रिसर्च के आंकड़े बताते हैं कि नौकरशाही के कारण हर साल जर्मन अर्थव्यवस्था को करीब 150 अरब यूरो का नुकसान होता है. मैर्त्स से पहले पूर्व चांसलर ओलाफ शॉल्त्स ने भी नौकरशाही के डिजलटीकरण की बात कही थी. खासकर, दोनों की ही सरकार में बिजनस करने वालों के लिए कागजी कार्रवाई कम करने का वादा किया गया था.












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