नयी दिल्ली, चार अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) से डॉक्टरों के लिये डिग्री प्रमाणपत्र हासिल करना टेढ़ी खीर हो गई है क्योंकि ये लोग कोविड-19 मरीजों के इलाज में व्यस्त होने के बावजूद विश्वविद्यालय से प्रमाणपत्र हासिल करने के लिये संघर्ष कर रहे हैं।
स्नातक हो चुके छात्रों को डिजिटल डिग्री जारी करने के लिये उपयुक्त कदम नहीं उठाने के डीयू के आचरण से नाखुश न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में प्रशासन पूरी तरह से ध्वस्त हो गया है और यह दयनीय स्थिति को प्रदर्शित करता है।
उच्च न्यायालय 21 डॉक्टरों की याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिन्होंने 2018 और 2019 में लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज से एमबीबीएस का पाठ्यक्रम पूरा किया था। लेकिन आज की तारीख तक उन्हें डिग्री प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं हुआ है। ये संस्थान डीयू से संबद्ध हैं।
अदालत ने कहा कि विश्वविद्यालय को पर्याप्त समय दिय जाने के बावजूद उसने उपयुक्त कदम नहीं उठाये और डिजिटल डिग्री जारी करने में पूरी तरह से मानसिक बाधा नजर आती है।
अदालत ने कहा, ‘‘डिग्री जारी होने पर खुशी का माहौल होता है, लेकिन यह इन डॉक्टरों के लिये टेढ़ी खीर हो गई है, जो कोविड-19 मरीजों के इलाज में व्यस्त हैं। ’’
न्यायमूर्ति सिंह ने डिजिटल दस्तावेज जारी करने पर काम करने के लिये तीन अधिकारियों की एक समिति गठित की है , जिनमें दिल्ली उच्च न्यायालय के आईटी विभाग के एक अधिकारी, डिजिलॉकर (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की एक पहल) से एक वरिष्ठ अधिकारी और डीयू कंप्यूटर साइंस सेंटर के संयुक्त निदेशक संजीव सिंह शामिल हैं।
अदालत ने निर्देश दिया कि अधिकारी बुधवार को डीयू कार्यालय में सिंह से मिलेंगे और एक याचिककार्ता की डिग्री का एक नमूना प्राप्त करेंगे तथा उस पर डिजिटल हस्ताक्षर कराएंगे।
अदालत ने कहा कि डिग्री प्रमाणपत्र का नमूना सुनवाई की अगली तारीख सात अगस्त को उसके समक्ष पेश किया जाए और समिति को स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया।
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