नयी दिल्ली, पांच जून भारत के शीर्ष गोल्फर राशिद खान ने कहा कि दिल्ली गोल्फ कोर्स (डीजीसी) उन्हें अभ्यास के लिए अंदर नहीं आने दे रहा है जिससे उनकी ओलंपिक तैयारियों को झटका लग रहा है।
राशिद ने कहा कि अगर डीजीसी के रवैये में बदलाव नहीं आया तो वह इस मामलें में हस्तक्षेप के लिए सरकार से संपर्क करेगें।
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कोविड-19 महामारी के कारण देश में लागू लॉकडाउन से सरकार द्वारा प्रतिबंधों में ढील मिलने के बाद अन्य गोल्फरों ने अभ्यास शुरू कर दिया लेकिन डीजीसी से कोर्स के इस्तेमाल की अनुमित नहीं मिलने के कारण राशिद अभ्यास शुरू नहीं कर पा रहे है।
दो बार के एशियाई टूर के विजेता राशिद पर कुछ अन्य गोल्फरों के साथ डीजीसी ने जनवरी 2018 में अनुशासनात्मक मुद्दों के कारण कोर्स में अभ्यास करने पर प्रतिबंध लगा दिया था। यह मामला पुलिस और अदालत तक पहुंचा था लेकिन बाद में सुलझा लिया गया।
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भारतीय गोल्फरों में तोक्यो ओलंपिक क्वालीफाई करने की दौड़ में आगे चल रहे राशिद ने कहा, ‘‘डीजीसी अभी भी मुझे कोर्स पर जाने की इजाजत नहीं दे रहा है। सरकार की दिशानिर्देशों के बाद भी मैं अभ्यास नहीं कर पा रहा हूं। हर कोई अभ्यास कर रहा है और मैं घर पर बैठा हूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ केवल डीजीसी सदस्य ही बुकिंग कर के खेल सकते हैं। मुझे ग्रीन शुल्क का भुगतान करने और खेलने की अनुमति नहीं है। दिल्ली की सीमाएं बंद है ऐसे में मैं अभ्यास के लिए नोएडा या गुड़गांव भी नहीं जा सकता हूं। मैं कहा खेलूं? इससे मेरी ओलंपिक की तैयारी प्रभावित हो रही और मैं मनासिक रूप से परेशान हो रहा हूं।’’
राशिद से जब पूछा गया कि वह इस स्थिति से कैसे निपटेंगे तो उन्होंने कहा, ‘‘ मैंने पांच-छह दिन पहले आईओए (भारतीय ओलंपिक संघ) को इसके बारे में लिखा था लेकिन अभी कोई जवाब नहीं मिला। ऐसे में मेरे पास एक ही विकल्प बचता है कि खेल मंत्री को लिखूं और उनसे जा कर मिलूं।’’
विश्व रैंकिंग में 185वें स्थान पर काबिज 29 साल के राशिद को इस साल अर्जुन पुरस्कार के लिए नामित किया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे जब इस बारे में पता चला तो काफी खुशी हुई। अगर मुझे पुरस्कार मिलता है तो यह बड़ी उपलब्धि होगी’’
एशियाई खेलों (2010) के इस रजत पदक विजेता ने कहा, ‘‘यह मुझे बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगा। मैंने पिछले साल अच्छा खेला। अगर मैं यह सम्मान हासिल करता हूं, तो मैं खुद को बता पाऊंगा कि तमाम बाधाओं के बावजूद मैंने कुछ हासिल किया।’’
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